
भाग 2:
इनेस दरवाज़े पर ही जड़ हो गई।
—मैंने कुछ नहीं सुना —श्रीमती रोब्लेस ने बाद में कहा।
लेकिन उनकी आवाज़ काँप रही थी।
—हाँ, आपने सुना था।
—तो फिर उसे तुरंत भूल जाओ।
उस दोपहर हवेली मानो उसे देख रही थी। अलेजान्द्रो भी।
वह रिसेप्शन की मेज़ पर अपनी सोने की घड़ी छोड़ देता, जेब से निकाला हुआ पैसों से भरा लिफ़ाफ़ा वहीं रख देता, और बिना लॉक किया हुआ मोबाइल सोफ़े पर छोड़ देता।
इनेस ने किसी भी चीज़ को हाथ नहीं लगाया।
वह धूल साफ़ करती रही, कुशन ठीक करती रही और अपना काम करती रही।
शुक्रवार की रात शहर पर बर्फ़ीला तूफ़ान आ गया।
हवेली की खिड़कियाँ काँपने लगीं, आसमान बिजली की गड़गड़ाहट से फटता हुआ-सा लग रहा था।
इनेस खाने की मेज़ का कपड़ा तह कर रही थी कि तभी उसे दस्तक की आवाज़ सुनाई दी।
वह दौड़ पड़ी।
अलेजान्द्रो मेज़ का सहारा लिए खड़ा था, एक हाथ सीने पर, और ऐसे साँस ले रहा था मानो हवा काँच बन गई हो।
—बाहर निकल जाओ —उसने खुद को संभालने की कोशिश करते हुए कहा।
—आपके सीने में दर्द हो रहा है।
—आपने कहा था कि आपको दिल की बीमारी है।
—आपको अपनी ज़िद की वजह से मरने की ज़रूरत नहीं है।
पहली बार अलेजान्द्रो के पास कोई कठोर जवाब नहीं था।
उस दिन के बाद उसकी परीक्षाएँ और भी कठोर हो गईं।
एक सुबह इनेस दफ़्तर में गई और देखा कि वह सोफ़े पर सो रहा है।
या शायद सोने का नाटक कर रहा था।
वह गहरी साँसें ले रहा था और उसकी छाती पर एक खुली किताब रखी थी।
मेज़ पर पैसों वाला वही लिफ़ाफ़ा रखा था।
उसके बगल में एक चाँदी की चाबी थी।
वह उसी प्रतिबंधित कमरे की चाबी थी।
इनेस जाल समझ गई।
उसने सिर्फ़ एक कंबल उठाया।
—अगर आप ऐसे ही सोने का नाटक करते रहे, तो सचमुच दिल का दौरा पड़ जाएगा —उसने बुदबुदाया।
अलेजान्द्रो ने आँखें खोल दीं।
वह न तो गुस्से में था और न ही बेचैन दिखाई दे रहा था।
—मुझे पता था कि तुम जाग रही थीं।
—हाँ।
—फिर भी तुमने चाबी नहीं उठाई।
—वह मेरी नहीं है।
—तुम्हें ज़रा भी जिज्ञासा नहीं है?
उस शाम हवेली फिर मानो उसे देख रही थी। अलेजान्द्रो भी।
वह फिर से अपनी सोने की घड़ी, पैसों वाला लिफ़ाफ़ा और बिना लॉक किया हुआ मोबाइल वहीं छोड़ गया।
इनेस ने किसी भी चीज़ को हाथ नहीं लगाया।
वह धूल साफ़ करती रही, कुशन ठीक करती रही और अपना काम करती रही।
शुक्रवार की रात बर्फ़ीला तूफ़ान फिर हवेली को झकझोरने लगा।
अलेजान्द्रो मेज़ का सहारा लिए खड़ा था, एक हाथ सीने पर, ऐसे साँस ले रहा था मानो हवा काँच बन गई हो।
—बाहर निकल जाओ —उसने खुद को संभालते हुए कहा।
—आपके सीने में दर्द हो रहा है।
—आपने कहा था कि आपको दिल की बीमारी है।
—आपने कहा था कि आपको दिल की बीमारी है।
—आपको अपनी ज़िद की वजह से मरने की ज़रूरत नहीं है।
टिप्पणियाँ, बर्फ़ीला तूफ़ान, क्लिनिक, यादें।
जब डॉक्टर चले गए, अलेजान्द्रो गलियारे में रुक गया।
—मैंने चाबी क्यों छोड़ दी थी?
—मुझे पता था कि तुम जाग रही थीं।
—हाँ।
—फिर भी तुमने चाबी नहीं उठाई।
—वह मेरी नहीं है।
—इनेस जाल समझ गई। उसने एक कंबल उठा लिया।
—उसी दिन अलेजान्द्रो ने आँखें खोल दीं।
वह न तो गुस्से में था और न ही बेचैन दिखाई दे रहा था।
—मुझे पता था कि तुम जाग रही थीं।
—हाँ।
—फिर भी तुमने चाबी नहीं उठाई।
—वह मेरी नहीं है।
—किसी भी चीज़ को मत छूना।
इनेस ने दूसरी मंज़िल की ओर देखा।
—बिल्कुल। लेकिन बंद दरवाज़े हमेशा राज़ नहीं छिपाते। कभी-कभी वे दर्द को छिपाते हैं।
वह धीरे-धीरे बैठ गया।
—कल तुमने कुछ सुना था, है न?
इनेस ने झूठ नहीं बोला।
—एक आवाज़।
अलेजान्द्रो ने आँखें बंद कर लीं।
—लूसिया सिर्फ़ चार साल की थी जब उसकी मृत्यु हुई।
—क्या आपको पूरा यक़ीन है?
यह सवाल किसी तमाचे की तरह गिरा।
—तुम्हारा मतलब क्या है?
—मेरी दादी कई साल तक अस्पताल में काम करती थीं। वह कहती थीं कि जब कोई ताकतवर परिवार किसी सच को छिपाना चाहता है, तो उसे हमेशा किसी की हत्या करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। कभी-कभी सिर्फ़ एक नाम बदल देना ही काफ़ी होता है।
अलेजान्द्रो अचानक खड़ा हो गया।
—यह बात दोबारा मत कहना।
—तो फिर वह कमरा खोल दीजिए।
पूरी हवेली मानो साँस रोककर खड़ी हो गई।
अगली सुबह अलेजान्द्रो हाथ में वही चाँदी की चाबी लेकर सीढ़ियाँ चढ़ा।
श्रीमती रोब्लेस चुपचाप रो रही थीं।
इनेस उनके साथ उस सफ़ेद दरवाज़े तक गई।
—आपको यह अकेले करने की ज़रूरत नहीं है —उसने कहा।
अलेजान्द्रो ने चाबी ताले में डाली।
दरवाज़ा एक लंबी चरमराहट के साथ खुला।
अंदर एक बच्चे का कमरा था, जो समय में जैसे ठहर गया था।
पीली दीवारें, कहानी की किताबें, छोटी-छोटी पोशाकें, लाल जूते।
तकिए पर एक साबुत लकड़ी का खरगोश रखा था, जिस पर नया गुलाबी रिबन बँधा हुआ था।
श्रीमती रोब्लेस ने अपना मुँह ढक लिया।
—वह खरगोश वहाँ नहीं था।
अलेजान्द्रो ने उसे उठाया।
उससे एक पत्र बँधा हुआ था।
उसने काँपते हाथों से उसे खोला।
—उसमें क्या लिखा है? —इनेस ने पूछा।
उसने पढ़ा, और उसका चेहरा टूटकर बिखर गया।
—“पापा, मैं आपका इंतज़ार करती रही।”
उसी क्षण अलमारी के अंदर रखा एक म्यूज़िक बॉक्स अपने आप बजने लगा।
ठीक वही धुन, जो पिछली रात इनेस ने गुनगुनाई थी।
और फिर अँधेरे से एक छोटी बच्ची की हँसी सुनाई दी।
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