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मेरा पति अपनी प्रेमिका से शादी करने के लिए विदेश चला गया और मुझे संदेश भेजा, “मेरी ज़िंदगी से हमेशा के लिए गायब हो जाओ।” लेकिन जब वह हँसते हुए वापस लौटा, तो उसने देखा कि उसका घर ही अब मौजूद नहीं था।

भाग 2

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पहला ट्रक सुबह होने से पहले ही आ गया।

मरियाना प्रवेश द्वार पर जींस, धूसर स्वेटशर्ट, पुराने स्नीकर्स और बाँह के नीचे एक काली फ़ाइल लिए खड़ी थी। वह किसी छोड़ी हुई पत्नी जैसी नहीं लग रही थी। वह ऐसी महिला लग रही थी जिसने आखिरकार किसी से अनुमति माँगना बंद कर दिया था।

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मज़दूरों की टीम ने तेज़ी से काम किया।

उन्होंने अनुमति के साथ सभी सेवाएँ बंद कर दीं। दरवाज़े उतार दिए। खिड़कियों को क्रमांकित किया। मॉड्यूल अलग किए। अलमारियाँ, लाइटें, वार्डरोब और पूरी संरचनाएँ हटा दीं।

हर हिस्से की तस्वीर ली गई।

हर गतिविधि का दस्तावेज़ बनाया गया।

वकील पेट्रीशिया ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था।

—अगर वह पागलों की तरह बर्ताव करना चाहता है तो करने दीजिए। आपको बिल, अनुमति-पत्र और गवाह चाहिए।

मरियाना ने वैसा ही किया।

ज़मीन उसी की थी। घर का एक हिस्सा उसकी माँ की विरासत के पैसों और उन बैंक ट्रांसफ़रों से खरीदा गया था जिन्हें आर्तुरो ने कभी देखने की ज़रूरत नहीं समझी, क्योंकि उसे पूरा भरोसा था कि मरियाना कभी अपने अधिकारों के लिए खड़ी नहीं होगी।

यही उसकी सबसे बड़ी भूल थी।

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उधर कार्ताहेना में आर्तुरो लगातार सोशल मीडिया पर तस्वीरें डाल रहा था।

ब्रेंडा सफ़ेद पोशाक में एक छत पर।

आर्तुरो समुद्र के सामने उसे चूमते हुए।

उसकी माँ दोना रेबेका, उस युवा दुल्हन को गले लगाते हुए, मानो मरियाना कोई नौकरी से निकाली गई नौकरानी रही हो।

आर्तुरो के भाई जाम उठाकर जश्न मना रहे थे।

एक तस्वीर की पृष्ठभूमि में सोफ़िया और मातेओ दिखाई दे रहे थे।

उनमें से कोई भी मुस्कुरा नहीं रहा था।

रात 10:47 बजे सोफ़िया ने लिखा:

माँ, आप हमें लेने क्यों नहीं आईं?

मरियाना को लगा जैसे उसका सीना धँस गया हो।

किसने तुमसे यह कहा, मेरी बच्ची?

पापा ने कहा कि आप अकेले रहने चली जाना चाहती थीं और अब आप हमसे थक चुकी थीं।

मरियाना ने अपनी आँखें बंद कर लीं।

यही असली चोट थी।

आर्तुरो सिर्फ़ उसकी जगह किसी और को लाना नहीं चाहता था।

वह एक माँ के रूप में उसकी जगह भी मिटा देना चाहता था।

उसने गालियाँ देकर जवाब नहीं दिया। उसके बच्चे पहले ही बहुत आहत हो चुके थे।

उसने सिर्फ़ लिखा:

यह सच नहीं है। तुम्हारा और मातेओ का मेरे साथ हमेशा घर रहेगा। जब तुम वापस आओगे, तब हम बात करेंगे। मैं तुम दोनों से दुनिया की हर चीज़ से ज़्यादा प्यार करती हूँ।

सोफ़िया ने टूटा हुआ दिल भेजा।

मरियाना ने मोबाइल को अपने सीने से लगा लिया और चुपचाप रोने लगी, आर्तुरो के लिए नहीं, बल्कि इस बात के लिए कि एक पिता कितनी आसानी से अपने बच्चों का इस्तेमाल किसी महिला को सज़ा देने के लिए कर सकता है।

अगले दिन अदालत ने अस्थायी आदेश जारी कर दिए। तलाक़ की कार्यवाही पूरी होने तक मरियाना को संपत्ति के विशेष उपयोग का अधिकार दिया गया और आर्तुरो बिना अनुमति वहाँ प्रवेश नहीं कर सकता था, न बेच सकता था, न कब्ज़ा कर सकता था और न ही किसी प्रकार का अधिकार जता सकता था।

पेट्रीशिया ने उसके लौटने वाले दिन के लिए नोटिस तैयार किया।

—उसका अकेले सामना मत कीजिए —उसने चेतावनी दी।

—मैं वहाँ रहना चाहती हूँ।

—ठीक है। लेकिन बहस मत कीजिए। वह आपको पागल साबित करने की कोशिश करेगा।

मरियाना हल्का-सा कड़वाहट भरा हँस पड़ी।

—वह पिछले 18 सालों से यही करने की कोशिश कर रहा था।

आख़िरी मॉड्यूल शुक्रवार की दोपहर को वहाँ से ले जाया गया।

पड़ोसी अपनी खिड़कियों से देख रहे थे। किसी ने कुछ नहीं पूछा, लेकिन सब जानते थे।

बंद रिहायशी कॉलोनियों में लोग दिखावा करते हैं कि उन्हें कुछ पता नहीं, लेकिन परदे हमेशा सच बोल देते हैं।

सामने रहने वाली दोना चायो एक थैले में मीठी ब्रेड लेकर आई।

—बेटी, मुझे ठीक से नहीं पता क्या हुआ —उसने धीमी आवाज़ में कहा—, लेकिन अगर उस निकम्मे ने तुम्हें घर से निकालना चाहा था, तो अच्छा हुआ तुमने उससे दरवाज़ा तक छीन लिया।

मरियाना लगभग टूट ही गई।

जाने से पहले उसने वही चीज़ें समेटीं जो सचमुच मायने रखती थीं: स्कूल की तस्वीरें, मातेओ की बनाई हुई ड्रॉइंग्स, वह टूटा हुआ मग जो सोफ़िया ने किंडरगार्टन में बनाया था, और गलियारे के चौखट का वह लकड़ी का टुकड़ा जिस पर बचपन से उनकी लंबाई के निशान बने थे।

वह सब पीछे नहीं छूटा।

वह सब उसके साथ चला गया।

घर को अस्थायी रूप से लेरमा में उसकी माँ की एक मित्र की ज़मीन पर ले जाया गया, जब तक कि दोबारा स्थापित करने की अनुमति नहीं मिल जाती।

वह आरामदायक नहीं था।

वह परिपूर्ण भी नहीं था।

लेकिन वह उसका था।

और कई वर्षों में पहली बार मरियाना उन दीवारों के भीतर इस एहसास के बिना चली कि उसे साँस लेने के लिए भी आर्तुरो का एहसान मानना चाहिए।

रविवार को उसने अपनी कार खाली ज़मीन से आधा ब्लॉक दूर एक पेड़ के नीचे खड़ी की।

सामने वाली सीट पर ज़मीन के कागज़ात, अदालत के अस्थायी आदेश, घर स्थानांतरित करने का अनुबंध, बिल, घर खोलने की तस्वीरें और रात 2:13 बजे भेजे गए संदेश की प्रिंट कॉपी रखी थी।

दोपहर 12:24 बजे आर्तुरो की काली एसयूवी मोड़ से मुड़ी।

वे सब हँस रहे थे।

आर्तुरो धूप का चश्मा लगाए गाड़ी चला रहा था। ब्रेंडा उसके बगल में बैठी थी, धूप से तपी हुई त्वचा और गोद में मुरझाया हुआ गुलदस्ता। पीछे दोना रेबेका और दोन् जूलियन थके हुए लेकिन मुस्कुराते हुए बैठे थे।

सबसे अंत में सोफ़िया और मातेओ उतरे।

हँसी एक पल में गायब हो गई।

जहाँ पहले घर था, वहाँ अब सिर्फ़ निशान पड़ी मिट्टी, धूल, टायरों के निशान और खुला आसमान था।

आर्तुरो ने चश्मा उतार दिया।

तीन कदम आगे बढ़ा।

उसका चेहरा सफ़ेद पड़ गया।

—मेरे घर का क्या हुआ? —उसने फुसफुसाते हुए कहा।

ब्रेंडा ने खाली प्लॉट की ओर देखा।

—आर्तुरो… तुमने तो कहा था कि यह घर तुम्हारा है।

उसी क्षण मरियाना ने अपनी कार का दरवाज़ा खोला।

सबने उसकी ओर देखा।

वह धीरे-धीरे सड़क पार करके आई, फ़ाइल को सीने से लगाए हुए। उसने कोई शानदार पोशाक नहीं पहनी थी, न ही कोई विशेष मेकअप किया था। उसके चेहरे पर कई दिनों की जागी हुई थकान थी, लेकिन उसकी आँखों में उस महिला की दृढ़ता थी जो अब कभी सिर नहीं झुकाएगी।

आर्तुरो उसे ऐसे देख रहा था जैसे वह कोई अजनबी हो।

शायद पहली बार उसने उसे सच में देखा था।

—मरियाना —उसने दाँत भींचते हुए कहा—, यहाँ तमाशा मत करो।

वह खाली ज़मीन के सामने रुक गई।

—तुमने ही कहा था कि तुम्हारे लौटने से पहले मैं गायब हो जाऊँ।

दोना रेबेका ने तिरस्कार से आवाज़ निकाली।

—अरे, बस भी करो। तुम हमेशा इतनी नाटकीय रहती हो।

मरियाना उसकी ओर मुड़ी।

—आपके बेटे ने रात 2:13 बजे मुझे लिखा था कि उसे पुरानी चीज़ों से नफ़रत है। उसी ने मेरे बच्चों से यह भी कहा कि मैं अब उनके साथ नहीं रहना चाहती। मुझसे नाटक की बात मत कीजिए, मैडम। क्रूरता की बात कीजिए।

सोफ़िया रोने लगी।

मातेओ ने अपने पिता को गुस्से और शर्म के मिले-जुले भाव से देखा।

आर्तुरो आगे बढ़ने लगा।

—देखो, यह सब ठीक हो सकता है। चाबियाँ दो और बच्चों जैसी ज़िद बंद करो।

मरियाना ने फ़ाइल खोल दी।

—कोई चाबियाँ नहीं हैं। यहाँ अब कोई घर नहीं है।

—वह घर मेरा था! —वह चिल्लाया—। मैंने उसके पैसे दिए थे!

वकील पेट्रीशिया दूसरी कार से उतरी और शांति से उनकी ओर चली आई।

—श्रीमान वियासेन्योर, मैं श्रीमती मरियाना लेदेस्मा की वकील हूँ। यह ज़मीन पूरी तरह मेरी मुवक्किल के नाम दर्ज है। साथ ही अदालत का अस्थायी आदेश भी है, जो आपको यहाँ प्रवेश करने या इस संपत्ति पर कोई अधिकार जताने से रोकता है।

आर्तुरो हँसा, लेकिन उसकी हँसी टूटी हुई थी।

—कौन-सी संपत्ति? यहाँ तो कुछ है ही नहीं!

पेट्रीशिया ने ज़मीन के कागज़ उठाए।

—संपत्ति यह ज़मीन है। और यह ज़मीन आपकी नहीं है।

यह वाक्य किसी तमाचे से भी ज़्यादा ज़ोर से लगा।

ब्रेंडा ने धीरे-धीरे आर्तुरो की ओर देखा।

—क्या तुमने मुझसे झूठ बोला?

—बात इतनी आसान नहीं है —उसने बुदबुदाते हुए कहा।

—तुमने कहा था कि मरियाना पागल होने की वजह से जा रही है। तुमने कहा था कि तुम्हारे बच्चे बहुत खुश हैं। तुमने कहा था कि यह घर हमारा होगा।

मरियाना ने उस संदेश की प्रिंट कॉपी निकालकर उसे दे दी।

ब्रेंडा ने उसे पढ़ा।

उसका चेहरा बदल गया।

कुछ ही सेकंड में वह आत्मविश्वासी, युवा और विजयी दुल्हन गायब हो गई।

—“मुझे पुरानी चीज़ों से नफ़रत है” —ब्रेंडा ने लगभग बिना आवाज़ के दोहराया—। तुमने अपने बच्चों की माँ के बारे में ऐसे कहा?

आर्तुरो ने उससे कागज़ छीनने की कोशिश की।

—बीच में मत पड़ो।

मातेओ एक कदम आगे बढ़ा।

—उनसे इस तरह बात मत करो।

आर्तुरो गुस्से से उसकी ओर मुड़ा।

—चुप रहो, लड़के।

मरियाना दोनों के बीच आकर खड़ी हो गई।

—मेरे बेटे से तुम दोबारा इस तरह बात नहीं करोगे।

पहली बार आर्तुरो के पास कोई जवाब नहीं था।

क्योंकि अब सब उसे देख रहे थे।

उसके माता-पिता। उसकी नई पत्नी। उसके बच्चे। परदों के पीछे से झाँकते पड़ोसी।

और अब झूठ टिक नहीं सकता था।

सोफ़िया दौड़कर मरियाना से लिपट गई।

—पापा ने कहा था कि आप हमें छोड़ देंगी।

मरियाना ने उसके बालों पर हाथ फेरा।

—कभी नहीं। तुम दोनों ही मेरा घर हो, चाहे दीवारें हों या नहीं।

मातेओ भी पास आ गया, अपनी आँखों के आँसू रोकने की कोशिश करते हुए।

—हमारा सामान कहाँ है?

—जो सबसे ज़रूरी था, वह सब मेरे पास है —उसने कहा—। तुम्हारी किताबें, तुम्हारी ड्रॉइंग्स, तस्वीरें और वह लकड़ी का तख्ता जिस पर हम तुम्हारी लंबाई नापते थे। मैंने तुम दोनों की कोई भी चीज़ पीछे नहीं छोड़ी।

मातेओ ने अपनी बाँह से चेहरा पोंछा।

—तो फिर चलो, हम आपके साथ चलते हैं।

आर्तुरो तुरंत बोल उठा।

—हरगिज़ नहीं।

पेट्रीशिया ने हस्तक्षेप किया।

—अस्थायी आदेश में यह भी शामिल है कि अदालत द्वारा स्थिति की समीक्षा होने तक बच्चे अपनी माँ के साथ रहेंगे, विशेष रूप से उन संदेशों और सिद्ध हो चुकी मानसिक हेरफेर को देखते हुए।

दोना रेबेका ने सीने पर हाथ रख लिया।

—हेरफेर? वह उनका पिता है!

मरियाना ने बिना नफ़रत, लेकिन बिना डर के उसकी ओर देखा।

—पिता होने से किसी को यह अधिकार नहीं मिल जाता कि वह अपने बच्चों को अपने हनीमून का सामान बना दे।

ब्रेंडा ने गुलदस्ता ज़मीन पर गिरा दिया।

—मैं अपनी शादी की शुरुआत एक खाली प्लॉट पर खड़ी होकर, दो रोते हुए बच्चों और एक मुक़दमे के बीच नहीं करूँगी।

—ब्रेंडा, ऐसा मत करो —आर्तुरो ने कहा।

वह कड़वाहट से हँसी।

—मैं? यह सब तुमने किया है। तुमने मुझे एक नई ज़िंदगी बेची थी, जिसकी नींव एक अपमानित औरत पर रखी गई थी।

दोना रेबेका ने उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की।

—बेटी, यह सब ठीक हो जाएगा।

ब्रेंडा ने अपना हाथ छुड़ा लिया।

—मुझे बेटी मत कहिए। आप भी हँसती हुई आई थीं।

सन्नाटा भयावह था।

आर्तुरो ने सिर झुकाकर ज़मीन की ओर देखा, जैसे मिट्टी में कोई दरवाज़ा, बैठक, भोजन कक्ष या अपनी ताकत का कोई निशान ढूँढ़ रहा हो।

लेकिन वहाँ सिर्फ़ धूल थी।

और वही धूल अब उसकी थी।

पेट्रीशिया ने उसे नोटिस की एक प्रति थमा दी।

—आपको इस ज़मीन के पास आने या मेरी मुवक्किल को डराने-धमकाने की मनाही है। आदेश का कोई भी उल्लंघन अदालत को सूचित किया जाएगा।

आर्तुरो ने मरियाना की ओर देखा।

—और तुम चाहती हो कि मैं कहाँ जाऊँ?

उसने उसकी आँखों में देखते हुए कहा।

—यह तुम्हें उस दिन सोचना चाहिए था, जिस दिन तुमने मुझसे कहा था कि मैं गायब हो जाऊँ।

उसने न चीखा।

न मुस्कुराई।

न कोई जश्न मनाया।

क्योंकि अपने बच्चों को रोते हुए देखना कोई सुंदर जीत नहीं थी। यह न्याय था, लेकिन ऐसा न्याय जो हमेशा के लिए निशान छोड़ जाता है।

अगले कुछ महीने कठिन रहे।

आर्तुरो ने अदालत में लड़ाई लड़ी। उसने कहा कि मरियाना ने यह सब बदले की भावना से किया, उसे बर्बाद करना चाहती थी और सबके सामने उसका अपमान किया था।

पेट्रीशिया ने दस्तावेज़ों से जवाब दिया।

ज़मीन के कागज़। बिल। अनुमति-पत्र। विरासत से मिली बैंक ट्रांसफ़र। तस्वीरें। संदेश। ईमेल। अदालत के आदेश।

आर्तुरो के पास सिर्फ़ गुस्सा था।

मरियाना के पास सबूत थे।

ब्रेंडा शादी के एक महीने पूरे होने से पहले ही उसे छोड़कर चली गई। उसने कार्ताहेना की सारी तस्वीरें मिटा दीं और केरेतारो में अपनी मौसी के घर रहने चली गई।

दोना रेबेका ने पहले गाली-गलौज भरे वॉइस मैसेज छोड़े। फिर रोई। उसके बाद ऐसे सोफ़िया और मातेओ से मिलने की विनती करने लगी जैसे कुछ हुआ ही न हो।

मरियाना ने उन अपमानों का कभी जवाब नहीं दिया।

उसने अपने बच्चों के सामने आर्तुरो के बारे में भी कभी बुरा नहीं कहा, जबकि उसका बहुत मन होता था।

जब मातेओ ने पूछा कि क्या उसके पापा बुरे इंसान हैं, तो उसने गहरी साँस ली।

—तुम्हारे पापा ने बहुत बुरे काम किए हैं। लेकिन तुम्हें उनकी शर्म का बोझ उठाने की ज़रूरत नहीं है।

कुछ महीनों बाद घर को एक छोटे से प्लॉट पर फिर से स्थापित कर दिया गया, जहाँ सड़क के किनारे पेड़ थे और रविवार को भुट्टे बेचने वाले ठेले लगते थे।

वह वही पुरानी कॉलोनी नहीं थी।

वह वही पुराना मोहल्ला भी नहीं था।

लेकिन वह सचमुच एक घर था।

सोफ़िया ने फिर से अपनी तस्वीरें दीवार पर टाँग दीं। मातेओ ने अपनी किताबें खिड़की के पास रख दीं। मरियाना ने बच्चों की लंबाई वाला लकड़ी का तख्ता नए गलियारे में लगा दिया।

एक बरसाती रात उसने बरामदे की बत्ती जलाई और बाहर खड़ी होकर उसे देखती रही।

उसने अपनी माँ के बारे में सोचा।

उसने रात 2:13 बजे वाले संदेश के बारे में सोचा।

उसने उन सभी बारों के बारे में सोचा जब उसने सहते रहने को प्यार समझ लिया था।

कुछ समय बाद वह पुराने प्लॉट के सामने से गुज़री।

अब वहाँ ट्रकों के निशान भी नहीं थे। घास असमान रूप से उग आई थी। पड़ोसी कहते थे कि आर्तुरो फिर कभी वहाँ नहीं आया।

ऊपर से देखने पर वह सिर्फ़ एक खाली ज़मीन लगती थी।

लेकिन मरियाना जानती थी कि वह खाली नहीं थी।

वहीं उस आदमी का अहंकार दफ़न हो गया था, जिसने यह समझ लिया था कि पत्नी भी किसी पुराने फर्नीचर जैसी होती है।

वहीं वह झूठ टूट गया जिसने लगभग उसके बच्चों को उससे छीन लिया था।

वहीं एक औरत को याद आया कि किसी और की नई ज़िंदगी शुरू करने के लिए उसे ख़ुद गायब होने की ज़रूरत नहीं थी।

जब किसी ने उससे पूछा कि क्या उसे घर हटाने का पछतावा है, तो मरियाना ने आर्तुरो को उस वैन से उतरते हुए और उस दरवाज़े को खोजते हुए याद किया जो अब वहाँ था ही नहीं।

फिर उसने शांति से जवाब दिया:

—मुझे घर हटाने का पछतावा नहीं है। मुझे सिर्फ़ इस बात का पछतावा है कि मुझे यह याद करने में पूरे 18 साल लग गए कि असली मालिक हमेशा मैं ही थी।

Disclaimer : This content may be created by AI for entertainment purposes. Any resemblance to real persons, events, or places is coincidental.