भाग 1:
तलाक की सुनवाई के बीच अर्जुन राठौड़ ने अपनी 8 महीने की गर्भवती पत्नी समीरा को देखकर हँसते हुए कहा कि वह इस अदालत से 1 सूटकेस और खाली हाथ बाहर निकलेगी।
समीरा ने अपने पेट पर हथेली रखी। बच्चे ने अंदर हल्की-सी करवट ली, जैसे वह भी अपने पिता की आवाज़ पहचानता हो। मुंबई के बांद्रा फैमिली कोर्ट की उस भरी हुई अदालत में कैमरे बाहर खड़े थे, वकीलों की फाइलें मेजों पर फैली थीं, और राठौड़ परिवार का नाम हर कान में फुसफुसाहट बनकर घूम रहा था।
अर्जुन सफेद शर्ट, महँगी घड़ी और उसी बेफिक्र मुस्कान में बैठा था, जिसने कभी समीरा को भरोसा दिलाया था कि वह दुनिया से लड़ जाएगा। आज वही मुस्कान उसे तोड़ने के लिए सजाई गई थी।
उसके पीछे पहली पंक्ति में नैना कपूर बैठी थी। 25 साल की, चमकदार साड़ी में, होंठों पर नकली मासूमियत और कानों में वही पन्ने के झुमके, जो समीरा की नानी ने उसकी शादी में उसे दिए थे।
समीरा की आँखें सबसे पहले उन झुमकों पर अटक गईं।
न अर्जुन के 5 वकीलों पर।
न मीडिया के शोर पर।
न उस फाइल पर जिसमें अर्जुन ने उसकी बर्बादी लिखवाई थी।
सिर्फ उन झुमकों पर।
अर्जुन ने उसकी नजरों का पीछा किया और धीमे से हँसा।
—उस पर ज्यादा अच्छे लग रहे हैं, समीरा। आदत डाल लो। अब तुम्हें हर चीज़ खोनी है।
नैना ने होंठ दबाकर हँसी छिपाने की कोशिश की, मगर अदालत में बैठे कई लोगों ने वह आवाज़ सुन ली।
समीरा का गला सूख गया। पैरों में सूजन थी। पीठ में ऐसा दर्द था जैसे कोई जलती हुई छड़ भीतर रख दी गई हो। फिर भी उसने सिर नहीं झुकाया।
6 साल पहले जब उसने अर्जुन राठौड़ से शादी की थी, तब पूरा जयपुर और मुंबई उसकी किस्मत पर बात कर रहा था। राठौड़ इंफ्राटेक देश की सबसे बड़ी निर्माण कंपनियों में से 1 थी। मेट्रो प्रोजेक्ट, लग्जरी टाउनशिप, सरकारी कॉन्ट्रैक्ट, विदेशी निवेश—सब अर्जुन के इशारे पर चलते थे। लोग कहते थे, एक मध्यमवर्गीय चार्टर्ड अकाउंटेंट लड़की ने राजमहल में कदम रख दिया।
पर कोई यह नहीं देखता था कि उस महल के दरवाजे बंद होते ही अर्जुन उसका फोन चेक करता था।
कोई यह नहीं सुनता था कि वह उसे बोर्ड मीटिंग से बाहर रखते हुए कहता था।
—तुम घर संभालो, पैसा मैं संभालता हूँ।
कोई यह नहीं जानता था कि शादी के बाद भी समीरा ने चुपचाप कंपनी के बैलेंस शीट पढ़े थे। वह 8 साल तक फॉरेंसिक ऑडिटर रही थी। उसने उन कंपनियों में गड़बड़ियाँ पकड़ी थीं जहाँ करोड़ों रुपये ऐसे छिपाए जाते थे जैसे मंदिर की दीवारों में पुराने राज।
अर्जुन ने उसे हमेशा कम आँका।
गर्भवती पत्नी।
थकी हुई औरत।
भावुक और कमजोर।
वह भूल गया था कि कुछ औरतें रोते हुए भी गिनती नहीं भूलतीं।
न्यायाधीश प्रकाश देशमुख अदालत में आए तो सभी खड़े हो गए। उनका चेहरा गंभीर था। उन्होंने पहले समीरा को देखा, फिर अर्जुन, फिर नैना और पीछे बैठी राजेश्वरी देवी को। अर्जुन की माँ राजेश्वरी देवी राठौड़ परिवार की असली दीवार कही जाती थीं। शहर के मंत्री, बिल्डर, बैंकर्स—सब उनके फोन उठाते थे।
—कार्यवाही शुरू की जाए।
अर्जुन के मुख्य वकील विकास सूद खड़े हुए। उनका अंदाज ऐसा था जैसे फैसला पहले ही जेब में रखकर आए हों।
—माननीय न्यायालय, यह मामला बिल्कुल स्पष्ट है। श्रीमती समीरा राठौड़ ने विवाह से पहले एक वैध समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने राठौड़ इंफ्राटेक की संपत्ति, शेयर, लाभांश, बोनस, ट्रस्ट, बंगले, फार्महाउस और किसी भी पारिवारिक पूंजी पर अपना दावा छोड़ दिया था।
उन्होंने मोटी फाइल मेज पर रखी।
—मेरे मुवक्किल श्री अर्जुन राठौड़, अपनी उदारता दिखाते हुए, श्रीमती समीरा को 1 करोड़ रुपये और उनके निजी कपड़े देने को तैयार हैं।
नैना ने तिरछी मुस्कान के साथ कहा।
—इतना भी बहुत है। आई तो थी बिना कुछ लिए।
समीरा ने उसकी तरफ देखा नहीं। उसने सिर्फ अपने पेट पर हाथ कस लिया।
अर्जुन आगे झुका।
—आज साइन कर दो। बच्चे के जन्म तक तुम्हें जुहू वाले बंगले में रहने दूँगा। वरना अस्पताल का खर्च भी खुद देखना।
समीरा की वकील काव्या मेहरा ने मेज के नीचे उसकी कलाई को हल्के से छुआ।
यह संकेत था।
अभी नहीं।
समीरा ने गहरी साँस ली। उसे वे रातें याद आईं जब अर्जुन देर से घर आता था और उसके कपड़ों से किसी और के इत्र की गंध आती थी। उसे होटल ताज लैंड्स एंड की रसीदें याद आईं। उसे वे ट्रांसफर याद आए जो “कंसल्टेंसी फीस” के नाम पर नैना कपूर से जुड़ी एक शेल कंपनी को भेजे गए थे।
उसे राजेश्वरी देवी की आवाज़ याद आई।
—राठौड़ परिवार की बहुएँ शोर नहीं करतीं। सहती हैं।
समीरा ने सहा था।
पर उसने साथ-साथ सब दर्ज भी किया था।
तारीखें।
भुगतान।
गवाह।
ईमेल।
बैंक स्टेटमेंट।
झूठ।
न्यायाधीश ने काव्या की तरफ देखा।
—क्या आपकी मुवक्किल प्रस्तावित शर्तें स्वीकार करती हैं?
काव्या धीरे से उठीं। उनका चेहरा शांत था, पर उनकी आँखों में तूफान साफ दिखता था।
—नहीं, माननीय न्यायालय। इन शर्तों पर आगे बढ़ने से पहले हम राठौड़ पारिवारिक ट्रस्ट में शामिल एक विशेष प्रावधान की समीक्षा चाहते हैं।
अर्जुन की मुस्कान पहली बार अटकी।
विकास सूद हँस पड़े।
—माननीय न्यायालय, पारिवारिक ट्रस्ट का इस तलाक से कोई संबंध नहीं है।
काव्या ने काली फाइल खोली।
—है। खासकर धारा 14 का।
राजेश्वरी देवी का चेहरा एक पल में पीला पड़ गया।
अर्जुन ने गर्दन मोड़कर अपनी माँ को देखा।
—माँ, कौन-सी धारा?
राजेश्वरी देवी ने होंठ खोले, मगर आवाज़ नहीं निकली।
समीरा ने पहली बार सुबह से हल्की मुस्कान दी।
काव्या ने फाइल से 1 पन्ना निकाला और न्यायाधीश के सामने रखा।
विकास सूद ने पन्ना उठाया। पहले उनकी भौंहें सिकुड़ीं। फिर उनकी उंगलियाँ काँपीं। फिर उनके चेहरे से वही आत्मविश्वास उतर गया जो कुछ मिनट पहले अदालत में फैल रहा था।
अर्जुन बेचैन होकर बोला।
—क्या लिखा है उसमें?
काव्या ने स्क्रीन की तरफ इशारा किया।
—माननीय न्यायालय की अनुमति हो तो हम यह साबित करना चाहेंगे कि श्री अर्जुन राठौड़ ने न केवल अपनी गर्भवती पत्नी को आर्थिक रूप से बेदखल करने की कोशिश की, बल्कि पारिवारिक धन का इस्तेमाल अपनी प्रेमिका के लिए भी किया।
नैना की हँसी गायब हो चुकी थी।
अर्जुन अचानक खड़ा हो गया।
—यह निजी मामला है! कोई भी चीज़ स्क्रीन पर नहीं जाएगी!
न्यायाधीश की आवाज़ कठोर हो गई।
—श्री राठौड़, बैठ जाइए।
अर्जुन बैठ गया, पर उसकी आँखें समीरा पर टिक गईं। वह अब पहली बार उसे पत्नी की तरह नहीं, खतरे की तरह देख रहा था।
काव्या ने पेन ड्राइव निकाली।
समीरा ने पेट पर हाथ रखते हुए आँखें बंद कीं। बच्चा फिर हिला।
उसी क्षण अदालत की स्क्रीन पर पहला दस्तावेज खुलने वाला था।
और अर्जुन के चेहरे पर वह डर उतर आया, जिसे देखने के लिए समीरा ने 3 महीने तक चुप्पी ओढ़ी थी।
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भाग 2:
3 महीने पहले समीरा जुहू के उसी समुद्र किनारे वाले बंगले में रहती थी, जिसे लोग राठौड़ परिवार का सपना कहते थे, मगर उसके लिए वह संगमरमर का बना पिंजरा बन चुका था। अर्जुन ने स्टाफ को आदेश दिया था कि “मैडम की तबीयत नाजुक है”, इसलिए उन्हें किसी फाइल, किसी कॉल, किसी बैंक मैसेज या किसी मेहमान से परेशान न किया जाए। असल में वह उसे दुनिया से काट रहा था। जब समीरा ने पहली बार नैना कपूर के नाम पर खरीदा गया 18 लाख का डायमंड ब्रेसलेट देखा, अर्जुन ने कहा कि यह कॉर्पोरेट गिफ्ट है। जब उसने लोअर परेल के एक अपार्टमेंट का रेंट एग्रीमेंट पाया, जिसकी पेमेंट राठौड़ इंफ्राटेक की सप्लायर कंपनी से जा रही थी, अर्जुन ने लैपटॉप बंद करके कहा कि गर्भावस्था ने उसके दिमाग को कमजोर कर दिया है। उसी रात उसके कार्ड बंद कर दिए गए। अगले दिन उसके ईमेल पासवर्ड बदल दिए गए। 1 हफ्ते बाद तलाक का ड्राफ्ट आया, जिसमें लिखा था कि वह लगभग खाली हाथ जाएगी। मगर अर्जुन ने 1 गलती की। उसने समीरा को डराने की जगह गुस्सा दिला दिया। एक रात, जब अर्जुन दिल्ली में “मंत्रालय की मीटिंग” के नाम पर नैना के साथ था, समीरा पुराने मालाबार हिल हवेली के तहखाने में गई, जहाँ राठौड़ परिवार के पुराने दस्तावेज रखे जाते थे। कोड उसे याद था, क्योंकि शादी के 2 साल बाद अर्जुन ने खुद उससे एक आंतरिक ऑडिट में मदद ली थी। लोहे का दरवाजा खुला तो भीतर धूल, चमड़े और छिपे हुए पापों की गंध थी। 4 घंटे तक उसने फाइलें पलटीं। बच्चे की हलचल तेज थी, उसके पैरों में दर्द था, फिर भी वह रुकी नहीं। सुबह 3:27 पर उसे भूरी चमड़े की फाइल मिली, जिस पर सुनहरे अक्षरों में लिखा था—राठौड़ परिवारिक ट्रस्ट, संशोधन 1996-2020। उसी में धारा 14 थी। यह कोई भावुक वादा नहीं था, यह राठौड़ साम्राज्य के नीचे छिपा बारूद था। उसमें लिखा था कि यदि कोई उत्तराधिकारी अपने वैवाहिक जीवन में व्यभिचार करे, पारिवारिक या कॉर्पोरेट धन से उस संबंध को चलाए, और फिर धोखे से अपने वैध जीवनसाथी को आर्थिक रूप से बेदखल करने का प्रयास करे, तो उसके व्यक्तिगत शेयरों के वोटिंग अधिकार तुरंत निलंबित होकर वैध संतान के ट्रस्ट में चले जाएंगे। बच्चे के 25 साल का होने तक पीड़ित जीवनसाथी ही उन अधिकारों का एकमात्र प्रशासक होगा। अर्जुन ने 2020 में यह संशोधन खुद साइन किया था, बिना पढ़े, क्योंकि उसे लगता था कि दुनिया में कोई भी कागज उससे बड़ा नहीं हो सकता। अगले 3 महीने तक समीरा ने टूटने का नाटक किया। भीतर से वह हर होटल बिल, हर फ्लाइट टिकट, हर गहना, हर शेल कंपनी, हर चैट और हर बैंक ट्रेल जोड़ती रही। तभी काव्या को एक और फाइल मिली—अर्जुन ने खुद नैना पर निजी जासूसी करवाई थी, क्योंकि नैना उससे 15 करोड़ और अलीबाग का फार्महाउस मांग रही थी। रिपोर्ट पढ़कर काव्या ने कहा था कि यह फाइल सिर्फ अर्जुन को नहीं गिराएगी, नैना को भी नंगा कर देगी। अब अदालत में वही सीलबंद लिफाफा काव्या की मेज पर पड़ा था, और अर्जुन की आवाज़ पहली बार सचमुच काँपी। —काव्या, उसे मत खोलना। ❤️नमस्ते, प्यारे रीडर्स! अगर आप अगले पार्ट के लिए तैयार हैं, तो प्लीज़ नीचे “Yes” लिखें, और मैं इसे तुरंत भेज दूँगा। मैं उन सभी के अच्छे स्वास्थ्य और खुशी की कामना करता हूँ जिन्होंने यह कहानी पढ़ी और पसंद की है! 💚
भाग 3:
अदालत में ऐसा सन्नाटा छा गया, जैसे किसी ने पूरा कमरा एक काँच के डिब्बे में बंद कर दिया हो।
समीरा ने अर्जुन को देखा। उसे अचानक एहसास हुआ कि अर्जुन को अपनी बेवफाई पर शर्म नहीं थी। उसे इस बात का डर था कि उसकी बेवफाई अब उसके साम्राज्य की चाबी छीन सकती थी।
काव्या ने सीलबंद लिफाफा उठाया।
—माननीय न्यायालय, श्री अर्जुन राठौड़ ने अपने तलाक के आवेदन में यह कहा है कि वे जल्द ही नैना कपूर के साथ नया परिवार शुरू करने वाले हैं।
नैना ने तुरंत अपना चेहरा संभाला। उसने साड़ी का पल्लू ठीक किया और आगे झुककर बोली।
—हाँ, क्योंकि मैं उनके बच्चे की माँ बनने वाली हूँ।
अदालत में हलचल हुई। राजेश्वरी देवी ने आँखें बंद कर लीं। अर्जुन ने नैना की तरफ नहीं देखा।
वही चुप्पी नैना के चेहरे पर पहली दरार बनकर उतरी।
काव्या ने लिफाफा खोला।
—पर श्री राठौड़ ने 4 हफ्ते पहले खुद एक निजी जांच एजेंसी को नियुक्त किया था, क्योंकि नैना कपूर ने उनसे बांद्रा में 1 पेंटहाउस, अलीबाग का फार्महाउस और 15 करोड़ रुपये अपने नाम करने की मांग की थी।
नैना का चेहरा लाल पड़ गया।
—झूठ है!
काव्या ने 3 पन्ने निकाले।
—जांच में वे अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट भी शामिल हैं जिन्हें नैना कपूर ने गर्भावस्था का प्रमाण बताकर श्री राठौड़ को भेजा था।
अर्जुन ने दाँत भींचे।
—काव्या, बस।
काव्या नहीं रुकीं।
—वे अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट एक विदेशी मेडिकल इमेज बैंक से डाउनलोड की गई थीं। नैना कपूर गर्भवती नहीं हैं। कभी थीं ही नहीं।
नैना के मुँह से निकली आवाज़ चीख और हँसी के बीच कहीं टूट गई।
—अर्जुन!
अर्जुन ने आखिर उसे देखा।
—तुमने मुझे धोखा दिया।
नैना खड़ी हो गई। उसकी आँखों में आँसू नहीं, जहर था।
—मैंने तुम्हें धोखा दिया? तुमने मुझे कहा था कि यह औरत बस कागज की पत्नी है। तुमने कहा था कि बच्चा पैदा होने से पहले इसे घर से निकाल दोगे। तुमने कहा था कि उसके गहने, उसका कमरा, उसकी जगह—सब मेरा होगा।
समीरा के भीतर कुछ टूटकर शांत हो गया।
वह जानती थी अर्जुन ने उसे अपमानित किया है। पर अपने जीवन को किसी दूसरी औरत के सामने “जगह” की तरह बांटे जाते सुनना अलग दर्द था।
नैना मेज की तरफ बढ़ी।
—तुमने कहा था, तुम्हारा बच्चा भी तुम्हारे नाम के बिना कुछ नहीं!
समीरा की आँखें अचानक कठोर हो गईं।
अर्जुन चिल्लाया।
—चुप रहो!
नैना ने उसके गाल पर जोरदार थप्पड़ मारा। आवाज़ दीवारों से टकराकर लौट आई। सुरक्षाकर्मी तुरंत आगे बढ़े और उसे रोक लिया। उसके कानों में झूलते पन्ने के झुमके कांप रहे थे।
—ये भी तुम्हीं ने दिए थे! कहा था कि असली रानी मैं हूँ!
समीरा ने पहली बार सीधे नैना से कहा।
—वे मेरी नानी के झुमके हैं।
नैना ने उसे देखा, फिर अर्जुन को।
अर्जुन ने आँखें फेर लीं।
उस छोटे-से इशारे ने नैना को बता दिया कि वह भी इस्तेमाल हुई थी।
काव्या ने स्क्रीन पर अगला दस्तावेज खोला। होटल की लॉबी की तस्वीर। अर्जुन और नैना, हाथों में हाथ डाले। फिर 72 लाख की ज्वेलरी इनवॉइस। फिर “के.पी. अर्बन कंसल्टिंग” नाम की कंपनी को किए गए 4 ट्रांसफर। फिर उसी कंपनी से नैना के अपार्टमेंट का किराया। फिर अर्जुन का मैसेज:
“डिलीवरी से पहले उसका आर्थिक ऑक्सीजन बंद कर दूँगा।”
न्यायाधीश प्रकाश देशमुख ने वह पंक्ति 2 बार पढ़ी। उनकी आँखों में नाराजगी साफ थी।
—श्री राठौड़, क्या यह आपका संदेश है?
अर्जुन चुप रहा।
विकास सूद ने तुरंत कहा।
—माननीय न्यायालय, संदर्भ—
न्यायाधीश ने उन्हें रोक दिया।
—संदर्भ बाद में देखा जाएगा। पहले उत्तर चाहिए।
अर्जुन ने गला साफ किया।
—वह निजी बातचीत थी।
काव्या ने शांत स्वर में कहा।
—निजी क्रूरता जब आर्थिक अपराध से जुड़ जाए, तो अदालत उसे निजी नहीं मानती।
राजेश्वरी देवी धीरे से अपने बेटे की तरफ झुकीं।
—मैंने कहा था, पैसे को अपनी हवस से मत मिलाना।
अर्जुन ने गुस्से से फुसफुसाया।
—माँ, इसे रोकिए।
राजेश्वरी देवी ने पहली बार उसकी आँखों में देखकर सिर हिला दिया।
—अब कुछ नहीं रुक सकता।
समीरा ने यह सुना। उसे कोई खुशी नहीं हुई। बस एक भारी सच सामने खड़ा था—इस परिवार ने उसे बचाने के लिए नहीं, खुद को बचाने के लिए चुप्पी चुनी थी। और आज वही चुप्पी उनके गले में फंदा बन गई थी।
काव्या ने धारा 14 की प्रति अदालत में प्रस्तुत की।
—माननीय न्यायालय, यह धारा किसी नैतिक गलती पर दंड नहीं लगाती। यह धारा तब सक्रिय होती है जब कोई उत्तराधिकारी वैवाहिक विश्वासघात के साथ पारिवारिक या कॉर्पोरेट धन का दुरुपयोग करे और फिर जीवनसाथी को आर्थिक रूप से मिटाने की कोशिश करे। हमारे पास 19 बैंक ट्रांजेक्शन, 6 होटल रिकॉर्ड, 3 संपत्ति अनुबंध, 1 शेल कंपनी का रजिस्ट्रेशन, गहनों की खरीद के प्रमाण और धमकी वाले संदेश हैं।
विकास सूद की आवाज़ अब धीमी थी।
—माननीय न्यायालय, ट्रस्ट का मामला सिविल कोर्ट—
न्यायाधीश ने फाइल बंद की।
—जब विवाहपूर्व समझौते को इसी ट्रस्ट से जोड़ा गया है, तब यह अदालत प्रारंभिक संरक्षण आदेश पारित कर सकती है।
अर्जुन अचानक खड़ा हो गया।
—यह कंपनी मेरी है! मेरे पिता ने मुझे दी है!
न्यायाधीश की आवाज़ हथौड़े की तरह गिरी।
—बैठ जाइए, श्री राठौड़।
अर्जुन बैठ गया। अब उसके चेहरे पर वह घमंड नहीं था। सिर्फ भय था।
न्यायाधीश ने आदेश पढ़ना शुरू किया।
—अदालत विवाहपूर्व समझौते की वैधता को स्वीकार करती है। परंतु अदालत यह भी दर्ज करती है कि उक्त समझौता राठौड़ पारिवारिक ट्रस्ट के प्रावधानों से जुड़ा है, जिन पर श्री अर्जुन राठौड़ ने 2020 में हस्ताक्षर किए थे।
समीरा की उंगलियाँ काव्या की उंगलियों में कस गईं।
—प्रस्तुत साक्ष्यों से प्रथम दृष्टया यह प्रमाणित होता है कि श्री अर्जुन राठौड़ ने व्यभिचार किया, पारिवारिक और कॉर्पोरेट संसाधनों का उपयोग उस संबंध को बनाए रखने में किया, और अपनी गर्भवती पत्नी को आर्थिक रूप से बेदखल करने की मंशा दिखाई।
अर्जुन ने सिर हिलाया।
—नहीं… नहीं…
—इसलिए धारा 14 सक्रिय की जाती है। श्री अर्जुन राठौड़ के व्यक्तिगत शेयरों से जुड़े वोटिंग अधिकार तत्काल प्रभाव से निलंबित होकर अजन्मे वैध शिशु के ट्रस्ट में स्थानांतरित किए जाते हैं।
नैना, जिसे सुरक्षाकर्मी पकड़े हुए थे, एकदम शांत हो गई।
राजेश्वरी देवी ने अपना मुँह हथेली से ढक लिया।
विकास सूद ने फाइल बंद कर दी।
न्यायाधीश ने आगे कहा।
—श्रीमती समीरा राठौड़ उस ट्रस्ट की एकमात्र प्रशासक होंगी, जब तक बच्चा 25 साल का नहीं हो जाता।
अदालत में बैठे लोग एक-दूसरे को देखने लगे।
सबने एक ही बात समझी।
अर्जुन ने सिर्फ तलाक नहीं हारा था।
उसने राठौड़ इंफ्राटेक पर अपना नियंत्रण खो दिया था।
न्यायाधीश ने समीरा के लिए पूर्ण चिकित्सा खर्च, प्रसव तक सुरक्षित आवास, बैंक खातों तक सीमित आपात पहुंच और सभी संदिग्ध कॉर्पोरेट लेनदेन की स्वतंत्र जांच का आदेश भी दिया।
—यदि वित्तीय अपराधों के संकेत पुष्ट होते हैं, तो मामला संबंधित एजेंसी को भेजा जाएगा।
अर्जुन ने समीरा की तरफ देखा। पहली बार उसकी आँखों में न पति का अधिकार था, न मालिक का अहंकार। बस एक गिरते हुए आदमी की घबराहट थी।
—तुमने यह सब प्लान किया।
समीरा धीरे से उठी। उसकी कमर दर्द से झुक रही थी, मगर आवाज़ सीधी निकली।
—नहीं, अर्जुन। तुमने सब प्लान किया था। मैंने बस वह पढ़ लिया, जिस पर तुमने बिना पढ़े साइन किया था।
अर्जुन का चेहरा लाल हो गया।
—तुम कंपनी नहीं चला पाओगी।
समीरा ने उसकी ओर देखा।
—शायद अकेले नहीं। पर मैं बैलेंस शीट पढ़ सकती हूँ। पैसा कहाँ गया, यह ढूँढ सकती हूँ। और सबसे जरूरी बात, मैं उस आदमी को पहचान सकती हूँ जो खुद को अछूत समझता है, ठीक उसके गिरने से पहले।
बाहर निकलते ही मीडिया ने गलियारा भर दिया। कैमरों की रोशनी समीरा के चेहरे पर पड़ी। वह थकी हुई थी, आँखों के नीचे गहरे घेरे थे, मगर वह टूटी हुई नहीं दिख रही थी।
—समीरा जी, जीत के बाद कैसा महसूस हो रहा है?
वह रुकी। उसने अपने पेट पर हाथ रखा।
—मैं जीतने नहीं आई थी। मैं यह तय करने आई थी कि मेरा बच्चा अपने पिता की कायरता विरासत में न पाए।
वह वाक्य उसी रात पूरे देश में वायरल हो गया।
पर कहानी वहीं खत्म नहीं हुई।
अगले 12 दिनों में राठौड़ इंफ्राटेक की बोर्ड मीटिंग बुलाई गई। बैंकों ने स्पष्टीकरण मांगा। 3 बड़े सरकारी कॉन्ट्रैक्ट अस्थायी रूप से रोक दिए गए। आयकर विभाग ने “के.पी. अर्बन कंसल्टिंग” की जांच शुरू की। नैना कपूर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट बंद कर दिए, जब यह साबित हुआ कि उसकी गर्भावस्था की रिपोर्ट नकली थीं।
राजेश्वरी देवी जुहू बंगले में समीरा से मिलने आईं। वह माफी मांगने नहीं आई थीं। वह परिवार बचाने आई थीं।
—बेटी, बात घर की थी। घर में ही रहनी चाहिए थी।
समीरा सोफे पर बैठी थी। उसके पैरों के नीचे तकिया था। चेहरा पीला था, पर आँखें शांत थीं।
—घर की बात तब घर में रहती, जब घर मुझे अपना मानता।
राजेश्वरी देवी ने धीमे से कहा।
—राठौड़ नाम डूब जाएगा।
समीरा ने जवाब दिया।
—नाम तब डूबता है जब सच सामने आता है, या तब जब झूठ करते समय कोई रोकता नहीं?
राजेश्वरी देवी के पास उत्तर नहीं था।
1 महीने बाद समीरा ने एक बेटे को जन्म दिया। बच्चे का नाम आरव रखा गया। अस्पताल के कमरे में सुबह की धूप सफेद पर्दों से होकर भीतर आ रही थी। समीरा ने उसे सीने से लगाया, तो इतने महीनों में पहली बार उसे लगा कि उसकी साँस पूरी हुई है।
रात को अर्जुन का 1 संदेश आया।
“तुमने मुझसे सब छीन लिया।”
समीरा ने उसे पढ़ा। फिर आरव की बंद मुट्ठी देखी।
उसने संदेश मिटा दिया।
उसने अर्जुन से कुछ नहीं छीना था।
उसने बस खुद से छिनना बंद कर दिया था।
जन्म के 40 दिन बाद समीरा पहली बार राठौड़ इंफ्राटेक की बोर्डरूम में दाखिल हुई। वही कमरा जहाँ कभी अर्जुन ने उसे बाहर रुकने को कहा था क्योंकि “यह औरतों की चाय पार्टी नहीं है।” आज दरवाजा उसके लिए खुला था।
वह साधारण काली साड़ी में थी। बाल बंधे हुए। कानों में वही पन्ने के झुमके थे, जो अदालत के आदेश से वापस मिल चुके थे।
कमरे में 12 निदेशक बैठे थे। समीरा अंदर आई तो सब खड़े हो गए।
वे उस छोड़ी हुई पत्नी के लिए नहीं खड़े हुए थे।
न उस गर्भवती औरत के लिए, जिसे सबने कमजोर समझा था।
वे ट्रस्ट की प्रशासक के लिए खड़े हुए थे।
उस माँ के लिए, जिसके बच्चे के नाम पर साम्राज्य की चाबी रखी जा चुकी थी।
उस औरत के लिए, जिसे एक अरबपति ने मिट्टी समझकर कुचलना चाहा, पर उसे पता नहीं था कि वही मिट्टी नींव भी बन सकती है और भूकंप भी।
समीरा ने अपनी फाइल मेज पर रखी।
कमरे में कोई फुसफुसाहट नहीं थी।
कोई हँसी नहीं।
कोई ताना नहीं।
सिर्फ इंतजार।
समीरा ने सामने बैठे अधिकारियों को देखा और शांत आवाज़ में कहा।
—शुरू करते हैं। सबसे पहले वे खाते खोलिए, जिन्हें अर्जुन ने कभी किसी को पढ़ने नहीं दिया।
उस दिन पहली बार राठौड़ इंफ्राटेक के उस बोर्डरूम में किसी राठौड़ पुरुष की आवाज़ नहीं गूँजी।
और किसी ने उसे रोका नहीं।
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