
भाग 2
डैनियल ने जैसे ही मारियाना को छोड़ा, वह लगभग एक ओर गिर पड़ी। एलेना मेज़ के चारों ओर दौड़ी और कुर्सी के कोने से टकराने से पहले उसे कंधों से थाम लिया। उसकी बेटी ऐसे काँप रही थी मानो उसे ठंड लग रही हो, जबकि रेस्तराँ लोगों से भरा हुआ और गर्म था।
—माँ, प्लीज़… —मारियाना ने डर से भरी आँखों के साथ फुसफुसाया।
—नहीं, बेटी —एलेना ने जवाब दिया—। आज नहीं।
डैनियल ने अपनी कुर्सी पीछे धकेल दी।
—यह पागलपन है। यह हर बात को बढ़ा-चढ़ाकर बता रही है।
एलेना ने फ़ोन कान से लगाए रखा।
—इसने उसे छोड़ दिया है —उसने ऑपरेटर से कहा—। लेकिन यह अब भी यहीं खड़ा है, आक्रामक है और गवाह मौजूद हैं।
पूरा भोजन कक्ष खामोश हो गया था। एक बुज़ुर्ग ने अपनी प्लेट पर रखे चम्मच-कांटे नीचे रख दिए। एक युवती ने चुपके से अपना मोबाइल निकाल लिया। वह वेटर जिसने सब कुछ देखा था, मैनेजर के पास गया। सफेद बालों वाला वह व्यक्ति गहरे रंग का सूट पहने तनावभरे चेहरे के साथ मेज़ तक आया।
—क्या कोई समस्या है? —उसने पूछा।
—हाँ —एलेना ने उत्तर दिया—। आपके सुरक्षा कैमरे में इस आदमी को मेरी बेटी के बाल खींचते हुए रिकॉर्ड किया गया है। मुझे चाहिए कि आप वह वीडियो पुलिस के लिए सुरक्षित रखें।
डैनियल ने पलकें झपकाईं।
पूरी रात में पहली बार उसका आत्मविश्वास टूट गया।
—कैमरे? —उसने पूछा।
मैनेजर ने छत की ओर देखा, जहाँ एक कैमरा मुख्य मेज़ों वाले हिस्से की ओर लगा था।
—जी हाँ, सर। यहाँ कैमरे लगे हैं।
रेबेका तुरंत खड़ी हो गई।
—चलो, डैनियल। हमें यह घटियापन सहने की ज़रूरत नहीं है।
—आप लोग जा सकते हैं —एलेना ने कहा—। लेकिन आपके नाम पहले ही कॉल में दर्ज हो चुके हैं।
डैनियल मारियाना की ओर एक कदम बढ़ा।
एलेना उसके सामने आकर खड़ी हो गई।
वह उससे छोटी थी, दुबली थी और उसकी उम्र अट्ठावन साल थी। लेकिन उसने अपने पति की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु के बाद अकेले अपनी बेटी को पाला था। उसने सरकारी अस्पताल में दोहरी ड्यूटी की थी। उसने खून, डर, मौत और पूरे परिवारों को आपातकालीन वार्ड में टूटते देखा था।
डैनियल उसे डरा नहीं सकता था।
—आपको इसका पछतावा होगा —उसने दाँत भींचकर कहा।
एलेना बिना पलक झपकाए उसे देखती रही।
—नहीं, डैनियल। मुझे तो इस बात का पछतावा है कि मैंने इतना इंतज़ार किया।
रेबेका ने मारियाना की ओर इशारा किया।
—इसे देखो। हर बात पर रोती है। मेरे बेटे ने बहुत धैर्य रखा है। शादीशुदा औरत को अपने पति का सम्मान करना चाहिए।
मारियाना ने सिर झुका लिया।
उसी पल एलेना सब कुछ दर्दनाक स्पष्टता के साथ समझ गई।
यह सिर्फ़ डर नहीं था।
यह आदत बन चुकी थी।
उसकी बेटी किसी चौंक जाने वाले इंसान की तरह प्रतिक्रिया नहीं दे रही थी। वह किसी ऐसे व्यक्ति की तरह व्यवहार कर रही थी जिसे इसकी आदत हो चुकी थी। वह डैनियल का चेहरा देखने से पहले उसके हाथों को देखती थी। हर शब्द सोच-समझकर बोलती थी। माफ़ी उसके होंठ खुलने से पहले उसके झुके हुए कंधों से निकल जाती थी।
एलेना अपराधबोध से भर गई।
गहरा, पुराना अपराधबोध।
उसे शक हुआ था।
उसने पूछा भी था।
उसने अपना घर भी प्रस्तावित किया था।
लेकिन मारियाना हमेशा यही कहती थी—
—मैं ठीक हूँ, माँ। वह बस तनाव में है।
पहली पुलिस गाड़ी आठ मिनट बाद पहुँची।
दो अधिकारी रेस्तराँ में दाखिल हुए। सालगादो उपनाम वाली एक महिला पुलिस अधिकारी मारियाना के पास आई। उसका साथी मैनेजर से बात करने लगा।
—क्या आपके साथ मारपीट हुई है? —महिला अधिकारी ने दृढ़ लेकिन नरम आवाज़ में पूछा।
मारियाना ने मुँह खोला ही था कि डैनियल बीच में बोल पड़ा।
—यह पति-पत्नी की बहस थी। मेरी पत्नी बहुत भावुक है।
—सर, कृपया चुप रहिए —महिला अधिकारी ने कहा।
रेबेका ने सूखी हँसी हँसी।
—यह सब बेतुका है। उसी ने उसे उकसाया।
तभी पास वाली मेज़ पर बैठे बुज़ुर्ग खड़े हो गए।
—मैंने सब देखा है —उन्होंने कहा—। इसने उसके बाल खींचे थे। उसने इसे नहीं उकसाया।
खिड़की के पास बैठी युवती ने हाथ उठाया।
—मैंने भी देखा।
वेटर ने घबराकर कहा—
—मैंने भी।
रेबेका का चेहरा पीला पड़ गया।
अधिकारी सालगादो मारियाना के पास झुक गई।
—मुझे आपसे एक बात पूछनी है। क्या यह पहले भी हुआ है?
डैनियल अचानक आगे बढ़ा।
—जवाब मत देना।
दूसरा पुलिस अधिकारी उसके सामने आकर खड़ा हो गया।
—सर, पीछे हट जाइए।
मारियाना की साँसें तेज़ चल रही थीं। एलेना ने उसका हाथ पकड़ लिया।
कई वर्षों में पहली बार मारियाना ने बोलने से पहले डैनियल की ओर नहीं देखा।
—हाँ —उसने बहुत धीमी आवाज़ में कहा—। यह पहले भी हो चुका है।
और ठीक उसी समय जब डैनियल गालियाँ देने लगा, मारियाना ने सिर उठाकर ऐसी बात कही कि उसकी माँ की साँसें थम गईं।
—मेरे पास तस्वीरें हैं। मेरे पास ऑडियो रिकॉर्डिंग हैं। और आज रात मैं उन्हें अब और नहीं छिपाऊँगी।
भाग 3
अधिकारी सालगादो मारियाना को खिड़की के पास एक अलग मेज़ पर ले गई।
बाहर रोमा कॉलोनी अपनी रफ़्तार से चल रही थी। गाड़ियाँ गुजर रही थीं। लोग फुटपाथ पर चल रहे थे। दुकानदार अपना सामान समेट रहे थे। पूरा शहर इस बात से अनजान था कि उसी रेस्तराँ के अंदर एक औरत ने अभी-अभी अपनी आवाज़ वापस पाई थी।
एलेना उसके पास रही, लेकिन उस पर हावी नहीं हुई।
उसका मन था कि वह उसे गले लगा ले, उसकी जगह खुद बोले, उसकी रक्षा वैसे ही करे जैसे बचपन में करती थी जब वह यह कहकर उसके कमरे में भाग आती थी कि बिस्तर के नीचे राक्षस हैं।
लेकिन इस बार उसने कुछ अलग समझा।
मारियाना को अपनी माँ से अपनी हर लड़ाई लड़वाने की ज़रूरत नहीं थी।
उसे सिर्फ़ यह जानने की ज़रूरत थी कि अगर वह गिर गई, तो उसके पीछे कोई खड़ा होगा।
—क्या आपको आज रात अपने घर लौटने से डर लग रहा है? —महिला अधिकारी ने पूछा।
मारियाना ने बिना झिझक जवाब दिया।
—हाँ।
बार काउंटर के पास खड़ा डैनियल कड़वी हँसी हँसा।
—क्या सस्ता नाटक है।
महिला अधिकारी के साथी ने उसकी ओर देखा।
—एक और शब्द कहा तो मामला और बिगड़ जाएगा।
रेबेका ने बाँहें बाँध लीं।
—मेरा बेटा अपराधी नहीं है। वह बस एक निकम्मी पत्नी से परेशान आदमी है।
पीछे की मेज़ पर बैठी एक महिला उठी और एलेना के पास एक नैपकिन रख गई।
—मैं पारिवारिक मामलों की वकील हूँ —उसने धीमी आवाज़ में कहा—। मेरा नाम पत्रिसिया लूना है। अगर आपकी बेटी को मदद चाहिए, तो यह मेरा नंबर है।
एलेना ने उस नैपकिन को ऐसे पकड़ा जैसे डूबते हुए इंसान को रस्सी मिल गई हो।
उधर मारियाना बोलती रही।
उसने बताया कि डैनियल उसकी बाँहें इतनी ज़ोर से दबाता था कि निशान पड़ जाते थे। वह दरवाज़ा रोक देता था ताकि वह बाहर न जा सके। उसकी चाबियाँ छिपा देता था। उसके पास गिलास फेंककर तोड़ देता और फिर कहता कि उसने उसे कभी मारा नहीं, मानो इससे बाकी सब कुछ मिट जाता हो।
—वह कहता था कि कोई मेरी बात पर विश्वास नहीं करेगा —मारियाना ने कहा—। कि मेरी माँ मुझसे तंग आ जाएगी। कि उसके परिवार के बड़े-बड़े संपर्क हैं। कि अगर मैंने शिकायत की, तो सब मुझे पागल समझेंगे।
एलेना का गला भर आया।
—मैं तुमसे कभी तंग नहीं आऊँगी —उसने कहा।
मारियाना रोई, लेकिन इस बार उसने सिर नहीं झुकाया।
उसी रात पुलिस ने डैनियल को गिरफ़्तार कर लिया।
कोई फ़िल्मी दृश्य नहीं हुआ।
न कोई संगीत बजा।
न कोई परिपूर्ण न्याय मिला।
बस हथकड़ियों के बंद होने की ठंडी आवाज़ और उन ग्राहकों की असहज फुसफुसाहट, जो देखने का नाटक नहीं कर रहे थे।
डैनियल लाल चेहरे के साथ मारियाना के सामने से गुज़रा।
—तुमने मेरी ज़िंदगी बर्बाद कर दी —उसने थूकते हुए कहा।
मारियाना सहज प्रतिक्रिया में सिमट गई।
एलेना ने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया।
मारियाना ने गहरी साँस ली।
—नहीं।
डैनियल रुक गया।
—तुमने अपनी ज़िंदगी खुद बर्बाद की है।
वह उसे ऐसे देखने लगा जैसे उसे पहचान ही न पा रहा हो।
शायद यह सच भी था।
क्योंकि उसके सामने खड़ी औरत अब वह नहीं थी जो रेस्तराँ में यह विनती करती हुई दाखिल हुई थी कि कोई नाराज़ न हो।
उस रात एलेना मारियाना को कोयोआकान स्थित अपने घर ले गई। वही घर जहाँ वह पली-बढ़ी थी, जहाँ आँगन में अब भी बूगनवेलिया का पेड़ था और दीवार पर उसकी बचपन की लंबाई के छोटे-छोटे निशान अब भी मौजूद थे।
उसने उसके लिए चाय बनाई।
साफ़ कपड़े रख दिए।
ज़्यादा सवाल नहीं पूछे।
बाथरूम से एलेना ने अपनी बेटी के रोने की आवाज़ शॉवर के पानी में घुलती हुई सुनी।
तभी फ़ोन बजा।
अनजान नंबर।
एलेना ने फ़ोन उठाया।
—आपको अंदाज़ा भी नहीं है कि आपने अभी क्या किया है —रेबेका ने ज़हर भरी आवाज़ में कहा।
—मुझे अच्छी तरह पता है।
—आपने एक निजी मामले को सार्वजनिक शर्मिंदगी बना दिया।
—आपके बेटे ने मेरी बेटी पर हमला किया।
—उसी ने उसे उकसाया। मारियाना हमेशा से कमज़ोर रही है।
एलेना ने गलियारे की ओर देखा, जहाँ बाथरूम की बत्ती अब भी जल रही थी।
—नहीं। आपने उसे यही विश्वास दिलाया।
—मेरा बेटा उसका खर्च उठाता था।
—मेरी बेटी भी नौकरी करती थी।
रेबेका हँस पड़ी।
—अरे छोड़िए। मार्केटिंग की उस छोटी-सी तनख्वाह से कोई कहीं नहीं पहुँचता।
एलेना ने शांत स्वर में कहा—
—वह वहाँ तक पहुँचेगी, जहाँ तक आपने कभी उसे पहुँचने नहीं दिया।
उसने फ़ोन काट दिया और नंबर ब्लॉक कर दिया।
अगली सुबह मारियाना अपनी माँ का पुराना स्वेटर पहने और गीले बालों के साथ नीचे आई। बिना मेकअप के वह बहुत छोटी लग रही थी, मानो पिछले कुछ साल उससे छीन लिए गए हों।
—मुझे अपार्टमेंट वापस जाना होगा —उसने कहा।
एलेना डर गई।
—क्यों?
—मेरे दस्तावेज़, मेरा लैपटॉप, पापा की घड़ी वाला डिब्बा… और कुछ ऐसी चीज़ें जो सबूत बन सकती हैं।
उन्होंने अधिकारी सालगादो को फ़ोन किया। उसने बताया कि सामान लेने के लिए पुलिस सुरक्षा कैसे माँगी जाती है।
दोपहर तक दो पुलिस गाड़ियाँ नरवार्ते स्थित इमारत के बाहर उनका इंतज़ार कर रही थीं।
डैनियल अब भी हिरासत में था।
रेबेका अपार्टमेंट में मौजूद थी।
दरवाज़ा खटखटाने से पहले ही उसने खोल दिया।
—मैं अपने बेटे का सामान लेने आई हूँ, इससे पहले कि यह एहसानफ़रामोश लड़की उसे चुरा ले।
मारियाना काँपी, लेकिन अंदर चली गई।
एलेना उसके साथ थी।
उस अपार्टमेंट की हर चीज़ एक ऐसी कहानी सुना रही थी जिसे किसी ने पढ़ना ही नहीं चाहा था।
सोफ़े के पीछे टूटा हुआ फ़ोटो फ़्रेम।
गलियारे की दीवार पर गहरा धँसा हुआ निशान।
रसोई की ढीली अलमारी।
और ताले के पास से टूटा हुआ दरवाज़ा।
मारियाना ने अपना पासपोर्ट, जन्म प्रमाणपत्र, कार्ड, दवाइयाँ, चार्जर, कपड़े और अपने पिता की घड़ी वाला मखमली डिब्बा इकट्ठा किया।
अलमारी में एलेना ने दरवाज़े के हैंडल से बँधा एक दुपट्टा देखा।
मारियाना ने उसकी ओर देखा।
—एक बार उसने मुझे इसी से कमरे में बंद कर दिया था —उसने ऐसी शांति से कहा जो रोने से भी ज़्यादा दर्दनाक थी।
एलेना कुछ नहीं कह सकी।
मारियाना ने दुपट्टा बैग में रख लिया।
—सबूतों की फ़ाइल के लिए।
उसी पल एलेना समझ गई कि उसकी बेटी सिर्फ़ भाग नहीं रही थी।
वह सच को आकार दे रही थी।
Disclaimer : This content may be created by AI for entertainment purposes. Any resemblance to real persons, events, or places is coincidental.