
भाग 1
तलाक के कागज़ मेज़ पर पटकते हुए आरव मल्होत्रा ने अपने 7 साल के बेटे की तरफ इशारा किया और कहा—
—इसे साथ ले जाओ, मीरा। मुझे ऐसा बेटा नहीं चाहिए जो लोगों की तरह नहीं, मशीनों की तरह सोचता है।
गुरुग्राम के डीएलएफ फेज 5 वाले उस आलीशान पेंटहाउस की रसोई में कुछ पल के लिए सब कुछ जम गया। संगमरमर की लंबी मेज़ पर नाश्ता लगा था, लेकिन कोई खा नहीं रहा था। छोटा विहान अपनी प्लेट में रखे अनार के दानों को 10-10 की कतारों में बाँट रहा था। उसकी उंगलियाँ धीमी थीं, मगर गिनती बिल्कुल साफ थी। वह हर दाने को ऐसे रख रहा था जैसे दुनिया की सारी गड़बड़ी ठीक करना उसी का काम हो।
मीरा ने पति की तरफ देखा। आरव मल्होत्रा, मल्होत्रा इंफ्रा ग्लोबल का चेहरा, टीवी चैनलों का पसंदीदा उद्योगपति, बिजनेस मैगज़ीन के कवर पर छपने वाला आदमी, आज अपने ही बच्चे को पुराने सामान की तरह त्याग रहा था।
आरव ने चमड़े की एक मोटी फाइल उसकी तरफ सरका दी।
—यहाँ सब कुछ है। मुंबई वाला फ्लैट, जयपुर की जमीन, 250 करोड़ का सेटलमेंट, विहान की पढ़ाई का खर्च। तुम्हारे लिए इससे ज़्यादा कोई आदमी नहीं करेगा। बस साइन करो और हमारी ज़िंदगी से निकल जाओ।
मीरा ने फाइल नहीं खोली। उसकी नज़र विहान पर थी। बच्चे ने सिर नहीं उठाया। उसने बस अनार के दानों की कतार देखी और धीमे से कहा—
—पापा, 250 नहीं हैं। प्लेट में 248 दाने हैं। नायना आंटी ने 2 खा लिए थे जब वो अंदर आई थीं।
रसोई में खड़ी नायना कपूर की मुस्कान तन गई। वह आरव की पहली मोहब्बत थी, कॉलेज के दिनों की वह लड़की जिसके बारे में मीरा ने कभी सिर्फ अफवाहें सुनी थीं। आज वह उसी घर में खड़ी थी, सफेद रेशमी साड़ी में, मीरा की अलमारी से गायब हुआ वही मोती वाला क्लिप बालों में लगाए।
मीरा की आँखें उस क्लिप पर टिक गईं।
आरव हँसा, मगर उस हँसी में शर्म नहीं, घृणा थी।
—देखा? यही तो कह रहा हूँ। हर बात में नंबर, पैटर्न, गिनती। यह सामान्य बच्चा नहीं है।
विहान की उंगलियाँ रुक गईं।
मीरा के भीतर कुछ टूटा, मगर वह दिल नहीं था। वह डर था।
8 साल तक उसने आरव की चुप पत्नी बनकर जीवन बिताया था। पार्टियों में मुस्कुराना, मेहमानों को संभालना, माँ की तरह घर चलाना, और हर बार यह सुनना कि वह भाग्यशाली है क्योंकि उसकी शादी आरव मल्होत्रा से हुई है। किसी को नहीं पता था कि शादी से पहले मीरा राव एक फॉरेंसिक ऑडिटर थी। किसी को नहीं पता था कि उसने 29 की उम्र में 3 बड़े बैंक अधिकारियों को जेल भिजवाने वाले केस में मुख्य गवाही दी थी। और आरव को तो यह भी याद नहीं था कि मल्होत्रा इंफ्रा की पहली बड़ी गिरावट में किस परिवार ने उसे चुपचाप बचाया था।
नायना मीठी आवाज़ में बोली—
—मीरा, बात को इतना खराब मत करो। आरव तुम्हारे साथ बहुत उदार है। हम दोनों ने बहुत इंतज़ार किया है। तुम दोनों वैसे भी खुश नहीं थे।
—हम दोनों? मीरा ने पूछा।
नायना ने पलक भी नहीं झपकाई।
आरव ने जेब में हाथ डाला।
—नायना और मैं तलाक के बाद शादी करेंगे। यह बात साफ है। मुझे कंपनी चाहिए, तुम्हें पैसा और यह बच्चा। मैं कस्टडी नहीं माँगूँगा।
मीरा ने पहली बार फाइल खोली। पन्नों पर कानूनी भाषा थी, लंबी धाराएँ थीं, सीलें थीं, रकम थी, मगर इंसानियत नहीं थी।
विहान ने अचानक सिर उठाया।
—पेज 14 पर गलती है।
आरव ने उसे घूरा।
—चुप रहो।
—अनुबंध का नंबर पीछे वाले संलग्नक से अलग है। यहाँ 7 लिखा है, वहाँ 4 होना चाहिए।
नायना हँस पड़ी।
—बेचारा। कितना अजीब ध्यान देता है।
मीरा का हाथ मेज़ के किनारे पर कस गया। विहान अजीब नहीं था। वह टूटा हुआ नहीं था। वह बस अलग था। वह शोर में नहीं, संरचना में सोचता था। लोग चेहरे भूल जाते थे, वह गाड़ियों के नंबर याद रखता था। लोग बातें अनसुनी करते थे, वह आवाज़ों के बीच छिपे बदलाव पकड़ लेता था। आरव को कभी ऐसा बेटा नहीं चाहिए था। उसे ऐसा बेटा चाहिए था जो क्रिकेट खेले, कैमरे के सामने मुस्कुराए और पिता की गोद में बैठकर अखबार की तस्वीर बने।
मीरा ने फाइल बंद कर दी।
—मैं साइन नहीं करूँगी।
आरव का चेहरा बदल गया।
—तुम्हें अंदाज़ा भी है तुम किससे भिड़ रही हो?
—उसी आदमी से, जिसे 6 साल पहले उसकी ही बैलेंस शीट में छेद दिखाने पड़े थे।
नायना की मुस्कान गायब हो गई।
आरव ने धीमी आवाज़ में कहा—
—तुम मेरी पत्नी थीं, मेरी पार्टनर नहीं।
—यही तुम्हारी सबसे बड़ी भूल है।
आरव ने मेज़ पर हाथ मारा। विहान काँप गया, लेकिन रोया नहीं। उसने अपनी छोटी नोटबुक बैग में और अंदर धकेल ली।
—सुन लो मीरा, सुनवाई 3 दिन बाद है। मेरे वकील साबित कर देंगे कि तुम इस बच्चे की जीवनशैली नहीं संभाल सकती। और जरूरत पड़ी तो यह भी साबित होगा कि विहान को विशेष देखभाल चाहिए, किसी जिद्दी औरत की महत्वाकांक्षा नहीं।
मीरा ने विहान को अपने पास खींच लिया।
—मेरे बेटे को अपनी गंदगी से दूर रखो।
आरव ने हँसकर कहा—
—तुम्हारा बेटा? अच्छा है। अदालत में भी यही कहना। शायद न्यायाधीश समझ जाएँ कि कोई समझदार आदमी ऐसा बोझ क्यों नहीं उठाना चाहता।
विहान ने पहली बार सीधे पिता को देखा। उसकी आँखें लाल नहीं थीं, मगर उनमें एक अजीब स्थिरता थी।
वह बहुत धीमे बोला—
—मम्मा बोझ नहीं उठातीं। वो गलती पकड़ती हैं।
आरव झुका।
—क्या कहा?
विहान ने नज़र नीचे कर ली।
—कुछ नहीं।
नायना ने आरव की बाँह पकड़ी।
—चलो, आरव। इस औरत को उसकी औकात समझ में आ जाएगी।
दरवाज़े तक जाते-जाते नायना मुड़ी।
—इस घर को आखिरी बार देख लो, मीरा। जल्द ही यहाँ एक असली परिवार रहेगा।
दरवाज़ा बंद हुआ। रसोई में सिर्फ एसी की आवाज़ और विहान की हल्की साँसें रह गईं।
मीरा घुटनों के बल बैठी और उसने बेटे का चेहरा अपने हाथों में लिया।
—तुम ठीक हो?
विहान ने जवाब नहीं दिया। उसने अपने बैग से काली नोटबुक निकाली। उसके पन्ने मुड़े हुए थे, किनारों पर छोटे-छोटे अंक लिखे थे। उसने एक पन्ना खोला और मीरा की ओर बढ़ाया।
—मम्मा, अदालत में मैं ये खराब नंबर दिखा सकता हूँ?
मीरा की उंगलियाँ ठंडी पड़ गईं। पन्ने पर तारीखें, रकम, खाते और कोड लिखे थे। वे बच्चे की ड्राइंग नहीं थे। वे किसी ऐसे रहस्य की चाबी थे जिसे आरव ने समझा था कि कोई नहीं देख पाएगा।
विहान ने फुसफुसाकर कहा—
—पापा हर शुक्रवार कुछ मिटाते हैं। लेकिन मिटाने से पहले नंबर गलत नाचते हैं।
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भाग 2
उस रात मीरा नहीं सोई। विहान अपने कमरे में रंगों के हिसाब से रखी खिलौना कारों के बीच सो गया, मगर काली नोटबुक उसके तकिए के नीचे थी, जैसे वह कोई खिलौना नहीं, एक गवाही हो। मीरा ने आरव की दी हुई तलाक वाली फाइल खोली और सीधे पेज 14 पर गई। विहान सही था। मुख्य अनुबंध और संलग्नक का नंबर अलग था। एक छोटा-सा 7, जहाँ 4 होना चाहिए था। आम आदमी के लिए यह टाइपिंग की गलती थी, लेकिन मीरा जानती थी कि कॉर्पोरेट कागज़ों में छोटी गलती कई बार छिपे दरवाज़े खोलती है। उसने लैपटॉप खोला। मल्होत्रा इंफ्रा की पुरानी रिपोर्टें, कर्ज़ पुनर्गठन के दस्तावेज़, सप्लायर भुगतान और पिछले 6 महीनों के चालान एक-एक करके स्क्रीन पर खुलते गए। रात के 2:17 पर उसे पहली दरार मिली। फिर दूसरी। फिर तीसरी। “एनके स्ट्रेटेजिक कंसल्टिंग” नाम की एक कंपनी को बार-बार छोटे-छोटे भुगतान हुए थे, कभी सलाहकार शुल्क, कभी प्रोजेक्ट एडवांस, कभी ग्रामीण सड़क सर्वे। एनके, नायना कपूर। सुबह तक मीरा समझ चुकी थी कि यह सिर्फ विवाहेतर संबंध नहीं था। आरव कंपनी से पैसा निकाल रहा था, आने वाली सार्वजनिक सूचीकरण प्रक्रिया से पहले रकम छिपा रहा था और तलाक में उसे झूठी तस्वीर देकर बाहर करना चाहता था। नाश्ते में विहान ने चुपचाप इडली के टुकड़ों को आकार के हिसाब से रखा और फिर नोटबुक खोल दी। उसने उन भुगतान श्रेणियों पर उंगली रखी जिनमें हर शुक्रवार सातवाँ अंक बदला गया था। कई तारीखें वही थीं जब आरव बेंगलुरु या अहमदाबाद की यात्रा बताकर नायना के फार्महाउस में था। मीरा उसे लेकर अपने पुराने वकील और पारिवारिक मित्र समर सेन के पास पहुँची। समर ने 20 मिनट तक नोटबुक देखी, फिर उसका चेहरा सफेद पड़ गया। उसने कहा कि यह तलाक का बचाव नहीं, एक साम्राज्य के गिरने की शुरुआत है। सुनवाई के दिन फैमिली कोर्ट की सीढ़ियों पर आरव 4 वकीलों और नायना के साथ खड़ा था। उसने विहान को देखकर नकली नरमी से मुस्कुराया, मगर विहान ने सिर्फ इतना पूछा कि क्या इस बार भी शुक्रवार वाली पंक्ति मिटेगी। आरव की मुस्कान मर गई। तभी अदालत का दरवाज़ा खुला, और अंदर जाने से पहले विहान ने मीरा का हाथ कसकर पकड़ लिया। वह फुसफुसाया कि सबसे बड़ा खराब नंबर कंपनी में नहीं, नायना के निजी खाते में है।
भाग 3
न्यायाधीश देवेंद्र सूद अपनी सख्ती के लिए जाने जाते थे। उनकी अदालत में आँसू, ऊँची आवाज़ और दिखावटी नाटक जल्दी नहीं चलते थे। इसलिए जब आरव मल्होत्रा आत्मविश्वास से कमरे में दाखिल हुआ, जैसे वह किसी बोर्ड मीटिंग में आया हो, तो मीरा ने न्यायाधीश की आँखों में हल्की-सी थकान देख ली।
आरव के वकीलों ने महँगी फाइलें, टैबलेट और मोटे दस्तावेज़ मेज़ पर रखे। नायना उसके पीछे बैठी थी, हल्की गुलाबी साड़ी में, मानो फैसला पहले ही उसके पक्ष में लिखा जा चुका हो। उसने मीरा की साधारण सूती साड़ी को देखा और हल्के से मुस्कुरा दी।
मीरा की मेज़ पर सिर्फ 3 चीज़ें थीं। एक पेन ड्राइव, विहान की काली नोटबुक और पानी की बोतल।
न्यायाधीश ने फाइल देखी।
—मामला तलाक, संपत्ति विभाजन और नाबालिग बच्चे की जिम्मेदारी से जुड़ा है। श्रीमती मीरा राव, आप प्रस्तावित समझौते पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर रही हैं?
मीरा खड़ी हुई।
—जी, माननीय न्यायालय।
आरव के मुख्य वकील तुरंत उठे।
—माननीय न्यायालय, मेरी मुवक्किल पक्ष की बात बहुत स्पष्ट है। श्री आरव मल्होत्रा ने अत्यंत उदार प्रस्ताव दिया है। 250 करोड़, अतिरिक्त संपत्ति, बच्चे की शिक्षा का खर्च। इसके बावजूद श्रीमती मीरा भावनात्मक दबाव बनाकर कंपनी पर दावा करना चाहती हैं। मल्होत्रा इंफ्रा विवाह से पहले स्थापित हुई थी और विवाहपूर्व अनुबंध से सुरक्षित है।
आरव ने गर्दन सीधी की। नायना ने संतोष से आँखें झुका लीं।
वकील आगे बोला—
—बच्चे की स्थिति भी असामान्य है। उसे विशेष देखभाल चाहिए। मेरे मुवक्किल आर्थिक सहायता देने को तैयार हैं, परंतु प्राथमिक जिम्मेदारी माँ को दी जानी चाहिए क्योंकि पिता और बच्चे के बीच भावनात्मक कार्यात्मकता नहीं है।
न्यायाधीश ने चश्मा उतारा।
—भावनात्मक कार्यात्मकता? इसका अर्थ?
आरव खुद बोल पड़ा।
—माननीय न्यायालय, विहान… सामान्य बच्चों जैसा नहीं है। वह लोगों से जुड़ नहीं पाता। हर समय नंबर, पैटर्न, चीज़ों को लाइन में लगाना। वह मेरे साथ रिश्ता बना ही नहीं पाया।
विहान ने नीचे अपने जूतों को देखा। वह रोया नहीं। यही मीरा को चीर गया।
मीरा ने शांत स्वर में कहा—
—माननीय न्यायालय, आज मैं विवाहपूर्व अनुबंध पर बहस नहीं करूँगी। मैं उस झूठ पर बात करूँगी जिसके सहारे यह समझौता बनाया गया है।
आरव के वकील ने हँसने की कोशिश की।
—यह पारिवारिक अदालत है, कॉर्पोरेट ट्रिब्यूनल नहीं।
न्यायाधीश ने उसे रोका।
—उन्हें बोलने दीजिए।
मीरा ने पेन ड्राइव कोर्ट के सहायक को दी। स्क्रीन पर दस्तावेज़ खुलने लगे। पुराने ऋण, बोर्ड प्रस्ताव, पुनर्गठन नोट, वोटिंग अधिकार और फिड्युशरी नियंत्रण की फाइलें।
मीरा ने कहा—
—6 साल पहले मल्होत्रा इंफ्रा गंभीर नकदी संकट में थी। स्पेन प्रोजेक्ट की विफलता के बाद कंपनी गिरने वाली थी। उस समय एक निजी ट्रस्ट ने कंपनी की देनदारियाँ खरीदीं और कुछ शर्तों के तहत उन्हें मतदान अधिकारों में बदलने का विकल्प लिया।
आरव की भौंहें सिकुड़ गईं।
मीरा ने अगली स्लाइड खोली।
—वह ट्रस्ट राव फैमिली कैपिटल ट्रस्ट था। त्रैमासिक मानकों के 5 बार टूटने के बाद, ट्रस्ट ने अधिकार लागू किए। आज कंपनी के 61% मतदान अधिकार उसी ट्रस्ट के पास हैं।
आरव का वकील टैबलेट पर तेजी से कुछ खोजने लगा।
न्यायाधीश ने पूछा—
—इस ट्रस्ट की प्रमुख प्रशासक कौन है?
मीरा ने आरव की तरफ देखा।
—मैं।
कमरे में एक ऐसी खामोशी फैल गई जो किसी चीख से ज्यादा भारी थी। आरव ने होंठ खोले, पर शब्द नहीं निकले। शायद उसे वे सभी शामें याद आई होंगी जब उसने मीरा को मेहमानों से मिलवाते हुए कहा था कि वह घर संभालना पसंद करती है। शायद वे सभी पल भी, जब उसने उसे वित्त समझाने की कोशिश की थी, जैसे वह कोई भोली गृहिणी हो।
न्यायाधीश ने दस्तावेज़ देखे।
—इससे संपत्ति समझौते की प्रकृति बदल जाती है।
आरव अचानक उठा।
—यह मेरी कंपनी है। मैंने बनाई है। मेरा नाम है, मेरी मेहनत है, मेरे कर्मचारी हैं। वह मुझे परिवार अदालत में लूट नहीं सकती।
मीरा की आवाज़ पहली बार ठंडी हुई।
—तुम्हें कोई लूट नहीं रहा, आरव। तुमने पहले ही कंपनी को लूटा है।
नायना का चेहरा सख्त हो गया।
आरव का वकील उसकी तरफ मुड़ा।
—क्या मतलब है इसका?
मीरा ने दूसरा फोल्डर खुलवाया। स्क्रीन पर भुगतान की लंबी सूची आई। तारीखें, रकम, सप्लायर कोड, बैंक संदर्भ और एनके स्ट्रेटेजिक कंसल्टिंग के खाते।
—पिछले 6 महीनों में मल्होत्रा इंफ्रा से धन निकाला गया। भुगतान झूठे सलाहकार अनुबंधों और बदले हुए सप्लायर कोड से किए गए। यह पैसा नायना कपूर से जुड़ी कंपनी और निजी खातों में गया।
नायना खड़ी हो गई।
—यह झूठ है। मैं एक स्वतंत्र सलाहकार हूँ।
तभी विहान ने माँ का हाथ छोड़ा।
—झूठ नहीं है।
सभी चेहरों ने उसकी तरफ देखा।
आरव का चेहरा पीला पड़ गया।
—मीरा, बच्चे को इसमें मत घसीटो।
विहान खड़ा हुआ। उसकी काली नोटबुक सीने से लगी थी। उसकी आवाज़ धीमी थी, लेकिन काँप नहीं रही थी।
—मैं टूटा हुआ नहीं हूँ।
न्यायाधीश का स्वर नरम हो गया।
—बेटा, तुम्हें बोलने की कोई मजबूरी नहीं है।
—मुझे गलती दिखानी है।
न्यायाधीश ने कुछ क्षण सोचा, फिर सिर हिलाया। कोर्ट सहायक ने नोटबुक ली और दस्तावेज़ कैमरे के नीचे रख दी। स्क्रीन पर बच्चे की छोटी लिखावट दिखी। तारीखें, कोड, रकमें, लाल पेंसिल से बने गोले, किनारे पर छोटे निशान।
आरव हँसने की कोशिश में बोला—
—ये तो बच्चे की बकवास है।
विहान ने सिर हिलाया।
—नहीं। अच्छे भुगतान में 12 अंकों का पैटर्न है। खराब भुगतान में पहला हिस्सा वही रहता है, लेकिन 7वाँ अंक बदलता है। हर शुक्रवार। फिर पंक्ति मिट जाती है। पापा सोचते थे कि मिटाने से नंबर खत्म हो जाते हैं।
न्यायाधीश आगे झुके।
—तुमने यह कैसे देखा?
—पापा लैपटॉप खुला छोड़ देते थे जब वो बालकनी में नायना आंटी से बात करते थे। मुझे नंबर अच्छे लगते हैं। जो नंबर सही होते हैं, वे शांत रहते हैं। ये नहीं थे।
कोर्ट में कोई नहीं बोला।
विहान ने एक पन्ने पर उंगली रखी।
—यहाँ 18 तारीख को 3 भुगतान हैं। असली सप्लायर को सिर्फ 1 मिला। बाकी 2 एनके खाते में गए। फिर 25 तारीख को सातवाँ अंक बदला। फिर 1 तारीख को वही रकम ब्याज जोड़कर दूसरी जगह गई।
न्यायाधीश ने पूछा—
—कुल रकम?
विहान ने पहली बार पिता की आँखों में देखा।
—42 करोड़ 18 लाख 400। लेकिन नायना आंटी के निजी खाते वाला जोड़ेंगे तो और ज्यादा है।
नायना पीछे हट गई। उसके चेहरे से सारा रंग उतर चुका था।
आरव के वकील ने दाँत भींचकर कहा—
—आरव, मुझे अभी सच बताइए।
आरव चुप रहा।
कभी-कभी चुप्पी, अपराध स्वीकारने से भी ज्यादा साफ होती है।
न्यायाधीश ने विहान की नोटबुक धीरे से बंद की। उसमें कोई उपहास नहीं था। जैसे वह समझ गए हों कि यह सिर्फ बच्चे की कॉपी नहीं, एक ऐसे मन की गवाही है जिसे उसके पिता ने कमजोरी समझा था।
न्यायाधीश की आवाज़ कठोर हो गई।
—यह न्यायालय ऐसे समझौते को मान्यता नहीं दे सकता जो संपत्ति छिपाने, संभावित कॉर्पोरेट धोखाधड़ी और नाबालिग बच्चे के प्रति अपमानजनक आचरण पर आधारित हो। प्रस्तावित तलाक समझौता तत्काल स्थगित किया जाता है। संबंधित खातों पर अंतरिम रोक लगाने और वित्तीय अनियमितताओं की प्रतियाँ सक्षम प्राधिकरण को भेजने का आदेश दिया जाता है।
आरव ने कुर्सी पकड़ ली।
—माननीय न्यायालय…
—मैंने अभी पूरा नहीं किया, न्यायाधीश ने काट दिया। बच्चे की कस्टडी उसके सर्वोत्तम हित के आधार पर पुनः जाँची जाएगी। और श्री मल्होत्रा को सलाह है कि अगली बार उदारता शब्द बोलने से पहले आपराधिक बचाव की तैयारी कर लें।
हथौड़े की आवाज़ छोटी थी, असर विशाल।
नायना बाहर निकलते समय लगभग दौड़ रही थी। उसकी साड़ी कुर्सी में अटक गई। पहली बार वह परफेक्ट नहीं दिख रही थी। आरव वहीं खड़ा रह गया, अपने वकीलों के बीच अकेला, जैसे उसका साम्राज्य अभी भी कमरे में था, लेकिन उसकी कुर्सी खाली हो चुकी थी।
जब वह विहान के पास आया, उसकी आवाज़ टूट गई।
—बेटा…
विहान एक कदम पीछे हटा।
—आपने कहा था आपका कोई ऐसा बेटा नहीं है।
आरव ने सिर झुका लिया।
कोई चिल्लाया नहीं। कोई थप्पड़ नहीं पड़ा। लेकिन उस छोटे वाक्य ने आरव को उस दिन अदालत में सबसे गहरी सजा दे दी।
1 साल बाद मल्होत्रा परिवार का गुरुग्राम वाला पेंटहाउस बिक चुका था। कंपनी बच गई, क्योंकि ट्रस्ट ने प्रबंधन बदला, कर्मचारियों की नौकरियाँ बचाईं और खातों की सफाई कराई। आरव का नाम बचा नहीं। अखबारों ने उसे वही आदमी कहा जिसने तलाक से पहले पैसा छिपाया, पत्नी को खरीदा हुआ समझा और अपने बच्चे को बोझ कहा।
नायना कपूर सामाजिक पार्टियों से गायब हो गई। जिन लोगों ने कभी उसके साथ तस्वीरें खिंचवाई थीं, वे उसे पहचानने से बचने लगे। उसके खातों की जाँच हुई, और उसकी चमक उन कागज़ों के नीचे दब गई जिन पर विहान ने लाल गोले बनाए थे।
मीरा और विहान दिल्ली के शोर से दूर देहरादून के पास एक छोटे घर में रहने लगे। घर बड़ा नहीं था, पर खिड़कियाँ खुली थीं। रसोई में धूप आती थी। वहाँ कोई फल गिनने पर हँसता नहीं था। हर शनिवार मीरा अनार, अंगूर और स्ट्रॉबेरी लाती। विहान उन्हें कतारों में सजाता। अब वह डर से नहीं करता था। वह इसलिए करता था क्योंकि उसे चीज़ों का ठीक जगह पर होना सुंदर लगता था।
कभी-कभी लोग मीरा से पूछते कि 7 साल के बच्चे ने वह कैसे देख लिया जो बड़े वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट और कारोबारी नहीं देख पाए।
मीरा हर बार एक ही बात कहती।
अहंकार आदमी को अंधा कर देता है। वह चुप्पी को कमजोरी समझता है, अलग सोच को कमी समझता है और प्रेम को ऐसी चीज़ समझता है जिसे 250 करोड़ में खरीदा जा सकता है।
आरव ने सोचा था कि वह मीरा को एक “असामान्य” बच्चे के साथ छोड़ रहा है।
असल में वह अपनी ज़िंदगी की इकलौती सच्ची गवाही छोड़ रहा था।
वह बच्चा, जिसे उसने बोझ कहा था, वही अकेला था जो उसकी क्रूरता की पूरी कीमत गिन सकता था।
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