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डीएनए किट तो बस एक मज़ाक होना था। मेरे भाई माइल्स ने नाश्ते के समय उसे मुझे दिया। वह नीले गिफ्ट पेपर में लिपटा हुआ था, और वह ऐसे मुस्कुरा रहा था जैसे उसने मुझे कोई ख़ज़ाने का नक्शा दिया हो।

वे अंग्रेज़ी शब्द थे।

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बिल्कुल साफ़।

लेकिन मेरा दिमाग़ उनका अर्थ जोड़ ही नहीं पा रहा था।

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“क्या पता चला?”

उन्होंने खुद को संभालने के लिए रसोई के काउंटर को कसकर पकड़ लिया।

“तुम्हें कभी गोद नहीं लिया गया था,” उन्होंने फुसफुसाकर कहा। “कानूनी तौर पर नहीं। किसी एजेंसी के ज़रिए नहीं। कोई दस्तावेज़ नहीं। कोई अदालत नहीं।”

मेरा गला कस गया।

“तो… फिर क्या हुआ था?”

उनकी आँखें आँसुओं से भर गईं।

“हमने… तुम्हें अपने पास रख लिया।”

मैं एक कदम पीछे हट गया।

उन्होंने अपना मुँह ढक लिया, फिर धीरे-धीरे हाथ नीचे कर लिया।

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“हमें तुम मिली थीं।”

रसोई में असहनीय ख़ामोशी छा गई।

फ़्रिज की हल्की-सी आवाज़ सुनाई दे रही थी।

बारिश खिड़की पर थपथपा रही थी।

कहीं गलियारे में क्लोवर के टैग की हल्की-सी झंकार सुनाई दी।

“आपको मैं कहाँ मिली थी?”

माँ ने अपनी आँखें बंद कर लीं।

“हमारे ड्राइववे पर।”

मैं साँस नहीं ले पा रहा था।

उन्होंने बताया कि उस समय मैं छह महीने की थी।

पीले रंग के रज़ाईदार कंबल में लिपटी हुई।

गुलाबी रंग का छोटा-सा कपड़ा पहने।

आधी रात के थोड़ी देर बाद उनके बरामदे पर बहुत धीमे-धीमे रो रही थी।

पापा ने पुलिस को फ़ोन किया।

अधिकारी आए।

उन्होंने तस्वीरें लीं।

कंबल अपने कब्ज़े में लिया।

पूरे पड़ोस में पूछताछ की।

अस्पतालों की जाँच की।

किसी लापता शिशु की रिपोर्ट ढूँढ़ी।

लेकिन…

कोई नहीं आया।

न माँ।

न पिता।

न कोई घबराया हुआ रिश्तेदार।

कोई सुराग नहीं मिला…

सिवाय उस कागज़ के, जो कंबल पर पिन से लगा हुआ था।

उस पर सिर्फ़ एक शब्द लिखा था।

भागो।

मैं बैठ गई।

मेरे घुटनों ने जैसे मेरा साथ छोड़ दिया था।

“फिर… आपने मुझे अपने पास रख लिया?”

माँ हिचकिचाईं।

“शुरुआत में हमें लगा था कि बस कुछ घंटों की बात होगी।”

“फिर कुछ दिन।”

“फिर पुलिस ने कहा कि कोई सुराग नहीं मिला। कोई तुम्हें लेने नहीं आया।”

उनकी आवाज़ टूट गई।

“तुम बहुत छोटी थीं, एवन।”

“तुमने मेरी उँगली पकड़ ली थी… और छोड़ी ही नहीं।”

“इससे मेरे सवाल का जवाब नहीं मिलता।”

उन्होंने सिर हिलाया।

अब वे खुलकर रो रही थीं।

“हाँ।”

“हमने तुम्हें अपने पास रख लिया।”

वह शब्द…

हम दोनों के बीच किसी सबूत की तरह आकर गिरा।

अपने पास रख लिया।

गोद नहीं लिया।

किसी कानूनी प्रक्रिया से नहीं।

बस…

अपने पास रख लिया।

“क्या पापा को पता था?”

उनका चेहरा बिखर गया।

“बिल्कुल पता था।”

मैं इतनी तेज़ी से खड़ी हुई कि खुद चौंक गई।

उनतीस वर्षों तक…

मेरी ज़िंदगी अटल थी।

ग्रांट और लाइरा ब्लाइथ मेरे माता-पिता थे।

माइल्स मेरा छोटा भाई था।

हमारी पारिवारिक तस्वीरें चिमनी के ऊपर लगी थीं।

मेरे जन्म प्रमाणपत्र पर उन्हीं के नाम थे।

मेरा बचपन कैंपिंग यात्राओं…

विज्ञान प्रदर्शनियों…

क्रिसमस के एक जैसे पायजामों…

और टिफ़िन में रखे हाथ से लिखे नोटों से भरा था।

अब…

हर याद के बीच एक दरार पड़ चुकी थी।

“मैं कौन हूँ?” मैंने पूछा।

माँ मेरी ओर बढ़ीं।

मैं पीछे हट गई।

उनका हाथ हवा में ही रुक गया।

“मैं तुमसे प्यार करती हूँ,” उन्होंने फुसफुसाया।

“मैंने यह नहीं पूछा।”

उस रात जब मैं घर से निकली, तो बिना यह जाने गाड़ी चलाती रही कि कहाँ जा रही हूँ।

आख़िरकार मैं लिंकन एलीमेंट्री स्कूल के बाहर गाड़ी रोककर बैठ गई।

अपने ही कक्षा-कक्ष की अँधेरी खिड़कियों को देखती रही।

मुझे वह पाठ याद आया…

जो मैं हर साल बच्चों को आनुवंशिक विशेषताओं के बारे में पढ़ाती थी।

आँखों का रंग।

बालों की बनावट।

पारिवारिक वंश-वृक्ष।

मैं हमेशा अपने विद्यार्थियों से कहती थी कि विज्ञान शक्तिशाली होता है…

क्योंकि वह हमें उत्तर देता है।

लेकिन अब…

विज्ञान ने मुझे ऐसा प्रश्न दिया था…

जिसने मेरी पूरी पहचान निगल ली।

रात 10 बजकर 47 मिनट पर…

मैंने माइल्स को फ़ोन किया।

उसने जम्हाई लेते हुए फ़ोन उठाया।

“हेलो, जन्मदिन वाली वाइकिंग।”

“माइल्स।”

वह तुरंत चुप हो गया।

“क्या हुआ?”

मैंने उसे सब कुछ बता दिया।

लैब।

लापता बच्ची।

माँ के हाथ से गाजर गिरना।

ड्राइववे।

पीला कंबल।

वह पर्ची।

ज़िंदगी में पहली बार…

मेरे भाई के पास कोई मज़ाक नहीं था।

आख़िर में उसने सिर्फ़ इतना कहा,

“मैं अभी आता हूँ।”

दस मिनट बाद…

वह बिना दरवाज़ा खटखटाए मेरे घर में आया।

आकर मेरे पास सोफ़े पर बैठ गया।

“तो…” उसने धीरे से कहा।

“तुम अब भी मेरी बहन हो।”

मैंने उसकी ओर देखा।

वह डरा हुआ था।

लेकिन उसके भीतर पूरा विश्वास था।

“मुझे पता है कि यही सबसे बड़ा सवाल नहीं है,” उसने कहा।

“लेकिन मुझे ज़रूरत है कि तुम पहले यह सुनो।”

और उसी पल…

मैं पहली बार फूट-फूटकर रो पड़ी।

अगली सुबह…

माइल्स मुझे डेनवर स्थित जीनट्रेस लैब लेकर गया।

डॉ. आर्डेन एक छोटे-से कॉन्फ़्रेंस रूम में हमारा इंतज़ार कर रही थीं।

मेज़ पर पहले से एक फ़ाइल रखी हुई थी।

उन्होंने समय बर्बाद नहीं किया।

“1993 में,” उन्होंने कहा, “नेब्रास्का के लिंकन शहर से एरिया फ़ेनविक नाम की छह महीने की बच्ची का अपहरण कर लिया गया था।”

उन्होंने एक तस्वीर मेरी ओर सरका दी।

एक नन्ही बच्ची।

गहरी आँखें।

गोल-मटोल गाल।

पीले रंग के रज़ाईदार कंबल में लिपटी हुई।

मेरा पेट मरोड़ खाने लगा।

“वह कंबल… अभी भी मेरे पास है,” मैंने फुसफुसाकर कहा।

डॉ. आर्डेन की आँखें नरम पड़ गईं।

“हमने आपके डीएनए नमूने की तुलना कई सत्यापित प्रोफ़ाइलों से की है।”

“आप मोनिका और जूड फ़ेनविक की जैविक संतान हैं।”

माइल्स आगे झुक गया।

“कितनी निश्चितता है?”

“99.9 प्रतिशत।”

कमरा बिल्कुल शांत हो गया।

डॉ. आर्डेन ने एक और कागज़ मेरी ओर बढ़ाया।

एक लापता बच्चे का पोस्टर।

एरिया फ़ेनविक।

जन्म: 24 जुलाई 1993।

आख़िरी बार अपने पालने में देखी गई।

उस बच्ची का चेहरा देखते हुए मेरे हाथ काँपने लगे।

वह चेहरा…

जो कभी मेरा था…

उससे पहले कि मैं एवन बनी।

डॉ. आर्डेन ने धीरे से पूछा,

“क्या आप चाहती हैं कि हम फ़ेनविक परिवार को सूचित करें कि डीएनए मिलान की पुष्टि हो चुकी है?”

उस प्रश्न का उत्तर देना असंभव होना चाहिए था।

लेकिन…

नेब्रास्का में कहीं…

दो लोग लगभग तीस वर्षों से यह सोचते हुए जी रहे थे कि उनकी बेटी कहाँ है।

और कोलोराडो में…

दो लोगों ने, जिनसे मैं प्यार करती थी…

एक ऐसे रहस्य पर अपना पूरा परिवार बना लिया था।

मैंने तस्वीर में उस पीले कंबल की ओर देखा।

फिर उस नाम की ओर…

जिसके बारे में मुझे कभी पता ही नहीं था कि वह मेरा था।

“हाँ,” मैंने कहा।

कहानी का अगला भाग नीचे पिन की गई टिप्पणी में जारी है, क्योंकि इस कहानी को थोड़ा और स्थान चाहिए।

Disclaimer : This content may be created by AI for entertainment purposes. Any resemblance to real persons, events, or places is coincidental.