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3 हफ्ते बाद लौटी मां ने अपनी 8 साल की बेटी को आंगन में घुटनों के बल रेंगते देखा, बच्ची रोई “मुझे यहां फिर मत छोड़ना”, फिर उसी मां ने चोरी, धमकी और पति की सच्चाई अदालत में खोल दी

PART 1

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“इस घर में रहना है तो कुत्ते की तरह चलना सीखो!”

गुड़गांव के सेक्टर 57 की आलीशान कोठी के खुले आंगन से यह आवाज सुनते ही प्रिया मल्होत्रा के हाथ में पकड़े सारे गिफ्ट बैग जमीन पर गिर पड़े। 3 हफ्ते बाद वह मुंबई से लौटी थी, जहां उसने अपनी डिजिटल मार्केटिंग कंपनी के लिए 1 बड़ा कॉन्ट्रैक्ट फाइनल किया था। जाते समय उसने अपनी 8 साल की बेटी अनन्या को पति रोहन की मां कमला देवी के पास छोड़ा था। सबने भरोसा दिलाया था कि बच्ची छुट्टियों में चचेरे भाई-बहनों के साथ खुश रहेगी।

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लेकिन आंगन में जो दिखा, उसने प्रिया की सांस रोक दी।

अनन्या गरम पत्थर की फर्श पर घुटनों और हथेलियों के बल रेंग रही थी। उसकी फ्रॉक धूल से सनी थी, घुटनों से खून की जगह काली दवा और मिट्टी मिली हुई थी। उसकी पीठ पर रोहन की बहन सीमा का 10 साल का बेटा आरव बैठा था, जैसे किसी जानवर की सवारी कर रहा हो। उसके हाथ में पुरानी चमड़े की बेल्ट थी।

—चल न, नौकरानी की बेटी! नानी ने कहा है, असली वारिस मैं हूं। तू तो बस इसलिए यहां रहती है क्योंकि तेरी मां पैसे देती है!

अनन्या कांपते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी।

—आरव भैया, मत मारो… दर्द हो रहा है…

आरव ने बेल्ट झटके से खींची और उसकी कमर पर मार दी।

प्रिया ने चीख नहीं मारी। वह बस आगे बढ़ी। इतनी शांत कि रसोई के दरवाजे पर खड़ी सीमा को पहले खतरे का अंदाजा ही नहीं हुआ। प्रिया ने बेल्ट आरव के हाथ से छीनी, उसे अनन्या की पीठ से उतारा और दूर कर दिया। आरव जमीन पर बैठकर रोने लगा, जैसे वही पीड़ित हो।

—मेरे बच्चे को धक्का दिया तूने! सीमा चिल्लाई। बच्चे खेल रहे थे!

कमला देवी बरामदे से निकलीं, माथे पर बड़ी बिंदी, हाथ में चाय का कप।

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—बहुत नखरे पाल दिए हैं अपनी बेटी के। लड़के ऐसे ही खेलते हैं। हमारी परवरिश पर उंगली उठाने से पहले अपना घर देख।

प्रिया अनन्या के पास घुटनों के बल बैठ गई। बच्ची ने मां की गर्दन पकड़ ली, जैसे डूबता इंसान किनारा पकड़ता है।

—मम्मा… मुझे यहां फिर कभी मत छोड़ना…

उस एक वाक्य ने प्रिया के भीतर सालों से दबा हर अपमान तोड़ दिया।

उसने फोन निकाला। अनन्या के घुटनों की तस्वीर ली, बेल्ट की, आरव के चेहरे की, सीमा की घबराहट की, कमला देवी के तिरस्कार भरे चेहरे की।

—फोन नीचे कर! सीमा झपटी।

—पास आई तो यह वीडियो सिर्फ परिवार में नहीं, स्कूल, पुलिस और बाल संरक्षण विभाग तक जाएगी, प्रिया ने धीमी आवाज में कहा।

कमला देवी हंसीं।

—तू क्या करेगी? बहू होकर ससुराल की इज्जत नीलाम करेगी?

—एक 10 साल का बच्चा अगर 8 साल की बच्ची को बेल्ट से मारता है और 2 औरतें खड़ी होकर उसे खेल कहती हैं, तो इज्जत पहले ही नीलाम हो चुकी है।

प्रिया ने अनन्या को उठाया। बच्ची इतनी हल्की लग रही थी कि प्रिया का दिल कांप गया। उसे याद आया, पिछले 9 सालों में उसने इस घर के लिए क्या-क्या नहीं किया था। कमला देवी की तीर्थ यात्रा, सीमा के बेटे की स्कूल फीस, रोहन के बिजनेस लंच, घर के फ्रिज से लेकर हर त्योहार की सोने की चेन तक। हर बार रोहन कहता था, “परिवार है, मदद करनी पड़ती है।”

आज पहली बार उसे समझ आया कि वह मदद नहीं कर रही थी, वह चुप रहने की कीमत चुका रही थी।

वह अनन्या को कार में बैठाकर सीधे मेदांता अस्पताल ले गई। डॉक्टर ने घुटनों की सफाई की, कमर के निशान देखे और मेडिकल रिपोर्ट बनवाई।

तभी रोहन वहां पहुंचा। प्रिया ने 1 पल को सोचा, वह बेटी को देखकर टूट जाएगा।

लेकिन रोहन ने अनन्या की ओर देखा तक नहीं।

—तुमने मम्मी के घर तमाशा क्यों किया?

प्रिया की आंखें ठंडी हो गईं।

—तुम्हारी बेटी घायल है, और तुम्हारी पहली चिंता तमाशा है?

रोहन बोला।

—बच्चों की शरारत थी। तुम हमेशा बात बढ़ाती हो क्योंकि तुम्हें लगता है पैसा कमाती हो तो सबको खरीद सकती हो।

अनन्या बिस्तर पर सिकुड़ गई।

प्रिया खड़ी हुई।

—आज से मेरी बेटी और मैं उस आदमी के साथ नहीं रहेंगे जो बेल्ट से पिटती बच्ची से ज्यादा अपनी मां की इज्जत बचाता है।

रोहन आगे बढ़ा ही था कि प्रिया ने नर्स कॉल बटन दबा दिया। सिक्योरिटी अंदर आ गई।

रोहन गुस्से से बाहर चला गया। जाते-जाते बोला।

—तुम्हें बहुत पछताना पड़ेगा।

प्रिया ने अनन्या का हाथ पकड़ा। उसे नहीं पता था कि असली चोट अभी बाकी थी।

क्योंकि उसी रात, जब अनन्या सो रही थी, प्रिया को बैंक से 1 पुराना अलर्ट मिला—अनन्या के नाम की फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़ दी गई थी।

रकम थी 48,00,000 रुपये।

PART 2

अगली शाम प्रिया खुद कमला देवी के घर गई। सबको लगा, वह माफी मांगने आई है। डाइनिंग टेबल पर पनीर, पुलाव और रायता सजाकर “परिवार की बात” करने का नाटक रचा गया था।

प्रिया ने अपना बैग खिड़की के पास रखा। उसमें दूसरा फोन रिकॉर्डिंग पर था।

थोड़ी देर बाद वह पानी लेने के बहाने बाहर हुई और अंदर से आवाजें खुलने लगीं।

सीमा बोली।

—लगता है शांत हो गई। मैंने तो सोचा था पुलिस तक चली जाएगी।

कमला देवी हंसीं।

—बहू है, तलाक का डर दिखाओ तो घुटनों पर आ जाएगी।

रोहन ने कहा।

—उसे अभी 48,00,000 का पता नहीं है। अनन्या की एफडी मैंने तोड़ी, सीमा को 18,00,000 दिए। बाकी से अपना ऑनलाइन ट्रेडिंग घाटा भर दिया। प्रिया अकाउंट देखती ही कहां है?

प्रिया के पैरों तले जमीन खिसक गई।

सीमा ने धीमे से कहा।

—गाड़ी बुक कर दी है। गोवा भी कर लेंगे।

प्रिया अंदर आई, टेबल पर बैंक स्टेटमेंट रखे और बोली।

—चोरी को तुम्हारे घर में रिश्तेदारी कहते हैं या आशीर्वाद?

सन्नाटा गिर गया।

फिर उसने बैंक को स्पीकर पर कॉल किया।

—रोहन मल्होत्रा की ऐड-ऑन कार्ड, नेट बैंकिंग एक्सेस और संयुक्त खर्च की सभी अनुमति अभी बंद कीजिए।

रोहन उछल पड़ा।

—पागल हो गई हो?

प्रिया ने उसकी आंखों में देखा।

—नहीं। पहली बार होश में आई हूं।

PART 3

उस रात प्रिया ने अपने डीएलएफ फेज 2 वाले अपार्टमेंट के सारे लॉक बदलवा दिए। यह फ्लैट उसने शादी से 2 साल पहले खरीदा था, लेकिन रोहन ने हमेशा उसे “हमारा घर” कहकर उसके भीतर अपना अधिकार गढ़ लिया था। वॉचमैन को नई हिदायत दी गई, बायोमेट्रिक से रोहन की एंट्री हटाई गई, गेट का कोड बदला गया। रोहन के कपड़े 3 बड़े काले बैग में पैक होकर सोसाइटी के सिक्योरिटी रूम में रख दिए गए।

रात 11 बजे रोहन गेट पर पहुंचा।

—दरवाजा खोलो, प्रिया! यह मेरा भी घर है!

इंटरकॉम पर प्रिया की आवाज आई।

—कागजों पर नहीं।

—तुम मुझे बाहर सुलाओगी?

—अपनी मां के पास जाओ। परिवार सब माफ कर देता है, याद है?

आधी रात को उसका फोन आया। आवाज में पहले वाला अहंकार नहीं था।

—कार्ड काम नहीं कर रहा। होटल वाले पेमेंट मांग रहे हैं। बस आज के लिए कार्ड खोल दो।

प्रिया ने सोती हुई अनन्या को देखा। बच्ची अभी भी कुशन से घिरी सो रही थी, जैसे दीवारें बनाकर खुद को बचा रही हो।

—जिस आदमी ने बेटी की बचत तोड़कर शान दिखाई, उसके पास 1 रात की छत के पैसे नहीं? शुभ रात्रि, रोहन।

उसने फोन काट दिया।

लेकिन अगली सुबह कहानी और गहरी हो गई।

प्रिया ने अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट और वकील नंदिता अरोड़ा को बुलाया। 3 घंटों में जो कागज सामने आए, वे सिर्फ चोरी नहीं थे, एक पूरी साजिश थे। रोहन ने पिछले 8 महीनों में ऑनलाइन बेटिंग ऐप्स पर लगभग 27,00,000 गंवाए थे। उसने 3 रिश्तेदारों से “स्टार्टअप इन्वेस्टमेंट” के नाम पर पैसे लिए थे। वह जयपुर की एक 23 साल की इवेंट होस्ट के लिए किराए का फ्लैट भी दे रहा था। उसके रेस्टोरेंट, परफ्यूम, टैक्सी और होटल के बिल प्रिया के कार्ड या उसके अकाउंट से घूमकर चुकाए जा रहे थे।

प्रिया को जलन नहीं हुई। उसे सिर्फ घिन आई। जैसे किसी ने उसके घर की दीवारों में दीमक छुपा दी थी और वह सालों से उन्हें रंगती रही थी।

72 घंटे की मोहलत खत्म हुई। सीमा ने 1 रुपया नहीं लौटाया।

उस सुबह प्रिया अनन्या को स्कूल की कॉपी खरीदने ले जा रही थी। बच्ची धीरे-धीरे चल रही थी। घुटनों पर पट्टी थी। पार्किंग में पहुंचते ही खुरचने की आवाज आई।

प्रिया ने अनन्या को पिलर के पीछे रोका।

आरव उसकी काली कार के दरवाजे पर पत्थर रगड़ रहा था। सीमा पास खड़ी थी।

—जोर से कर। उसे समझ में आना चाहिए कि पैसे से सबको दबा नहीं सकती, सीमा फुसफुसाई।

प्रिया ने पूरा वीडियो रिकॉर्ड किया। फिर आगे बढ़ी।

—तुम अपने बेटे को बदला लेना सिखा रही हो या अपराध?

सीमा पलटी, चेहरा सफेद।

—बच्चा है!

—बच्चा तुम्हारा है। आदेश तुम्हारा था।

सोसाइटी गार्ड और पुलिस दोनों बुलाए गए। सीमा रोने लगी, हाथ जोड़ने लगी।

—इतनी सी गाड़ी की बात है, बहन!

प्रिया ने कहा।

—कल मेरी बेटी की कमर “इतनी सी” थी, आज कार “इतनी सी” है। अब हर चीज कागज पर होगी।

उसी दोपहर प्रिया, नंदिता अरोड़ा के साथ सीमा के पति अमित के ऑफिस पहुंची। अमित साइबर सिटी की एक बड़ी कंपनी में सीनियर मैनेजर था और प्रमोशन की कतार में था। उसे हमेशा लगता था कि उसकी पत्नी बस थोड़ी भावुक है। प्रिया ने उसके सामने 2 फाइलें रखीं। एक में 48,00,000 की चोरी के कागज थे, दूसरी में कार की तोड़फोड़ का वीडियो और पुलिस शिकायत।

अमित ने पहले चिढ़कर देखा, फिर पढ़ते-पढ़ते उसकी गर्दन झुकती गई।

—सीमा, तुमने सच में पैसे लिए?

सीमा चुप।

—और आरव से कार रगड़वाई?

—उसने हमें अपमानित किया था…

अमित कुर्सी से उठ खड़ा हुआ।

—नहीं। तुमने खुद को अपमानित किया है। गाड़ी कैंसल करो, गोवा कैंसल करो, गहने बेचो, लेकिन आज पैसे लौटाओ। अगर मेरी नौकरी पर असर आया तो तुम्हारा मायका खुला है।

शाम 6 बजे प्रिया के अकाउंट में 53,00,000 आए। मूल रकम, खर्च और नुकसान का पहला भुगतान।

प्रिया चाहती थी कि बात वहीं खत्म हो जाए। वह बस अनन्या को ठीक करना चाहती थी। लेकिन रोहन ने उसे यह अधिकार भी नहीं दिया।

3 दिन बाद तेज बारिश की रात, सोसाइटी गेट पर हंगामा हुआ। सिक्योरिटी स्क्रीन पर रोहन दिखा। नशे में भीगा हुआ, हाथ में 2 ईंटें।

—प्रिया! बाहर आ! तूने मुझे बर्बाद कर दिया!

प्रिया ने सिक्योरिटी सिस्टम की रिकॉर्डिंग ऑन की।

—चले जाओ। पुलिस बुला रही हूं।

रोहन ने ईंट उठाई।

—दरवाजा नहीं खोला तो जान से मार दूंगा। तेरी बेटी जिंदगी भर रोएगी।

गलियारे में खड़ी अनन्या ने यह सुन लिया। उसकी आंखों से आवाज के बिना आंसू गिरने लगे।

प्रिया ने तुरंत आपातकालीन बटन दबाया और 112 डायल किया। 10 मिनट के भीतर पुलिस ने रोहन को गेट के बाहर काबू कर लिया। हथकड़ी लगते ही वह रोने लगा।

—नशे में था, प्रिया… मेरी नौकरी चली जाएगी…

प्रिया इतनी पास गई कि वह सुन सके।

—जब बेटी की एफडी तोड़ी थी, जब उसे पिटने दिया था, जब दूसरी औरत का किराया मेरे पैसे से दे रहे थे, तब नौकरी याद नहीं आई?

रोहन का चेहरा बुझ गया।

इसके बाद परिवार ने आखिरी चाल चली। कमला देवी ने रिश्तेदारों की पंचायत बुला ली। जगह थी उनके बड़े देवर का फार्महाउस, जहां अक्सर जन्मदिन और सगाई होती थी। उस दिन वहां कुर्सियों की कतार लगाई गई, जैसे प्रिया कोई अपराधी हो जिसे समाज के सामने खड़ा किया जाना हो।

प्रिया अकेली पहुंची। हाथ में भूरे रंग की फाइल थी।

कमला देवी बीच में बैठी थीं। सिर पर पल्लू, आंखों में बनावटी आंसू। चाचा, ताऊ, मामा, बुआ—सब नैतिकता के पहरेदार बनकर बैठे थे।

सबसे बड़े चाचा बोले।

—बहू, घर की बात पुलिस तक ले जाना ठीक नहीं। रोहन ने गलती की, पर पति-पत्नी में सब चलता है। बच्ची के लिए घर बचा लो। सास से माफी मांगो।

प्रिया ने पूरे हॉल को देखा। यही लोग थे जो हर दिवाली उसके भेजे गिफ्ट लेते थे, हर शादी में उससे लिफाफा खुलवाते थे, हर जरूरत में “तू तो अपनी बेटी जैसी है” कहकर पैसा मांगते थे। और आज वही लोग उसकी बेटी की चोट को “घर की बात” कह रहे थे।

उसने फाइलें बांट दीं।

रोहन के जयपुर फ्लैट की तस्वीरें। होटल बिल। बेटिंग ऐप्स के स्टेटमेंट। अनन्या की मेडिकल रिपोर्ट। आरव की वीडियो तस्वीरें। सीमा की रिकॉर्डिंग। 48,00,000 का ट्रांसफर। गेट पर मौत की धमकी की रिकॉर्डिंग।

—मुझसे पत्नी धर्म की बात करने से पहले यह देख लीजिए कि आप किस पति और किस पिता को बचा रहे हैं।

चाचा के हाथ कांपे। एक बुआ अचानक बोली।

—इसी ने तो मुझसे 5,00,000 लिए थे, बोला था प्रिया का पेमेंट अटका है!

दूसरा रिश्तेदार चिल्लाया।

—मुझसे 7,00,000 लिए, कहा था ट्रेडिंग में दोगुना करेगा!

अमित पीछे से बोला।

—उसने सबको मूर्ख बनाया है।

कमला देवी ने संभालने की कोशिश की।

—ये सब पैसे की बातें हैं। असली बात परिवार है।

प्रिया ने पहली बार उन्हें सीधे नाम लेकर जवाब दिया।

—नहीं, कमला जी। असली बात सत्ता है। आप चाहती थीं कि मैं कमाऊं, चुप रहूं, आपकी बेटी का घर चलाऊं, आपके बेटे की चोरी ढकूं और अपनी बच्ची को रेंगते देख भी बहू बनी रहूं। अब यह नहीं होगा।

हॉल में शोर उठ गया। जो लोग उसे मनाने आए थे, वे अब रोहन से अपने पैसे मांग रहे थे। परिवार की इज्जत वहां खत्म हो गई जहां लोगों को अपनी जेब याद आई।

कुछ दिनों बाद मामला अदालत पहुंचा।

रोहन ने खुद को पीड़ित दिखाने की पूरी कोशिश की। उसने दावा किया कि प्रिया अमीर होने के कारण उसे नीचा दिखाती थी, बेटी को उससे दूर कर रही थी, परिवार को तोड़ रही थी। उसने फ्लैट में हिस्सा मांगा, मेंटेनेंस मांगा, और अनन्या की साझा कस्टडी भी।

प्रिया शांत बैठी रही।

वकील नंदिता ने सब कुछ क्रम से रखा। फ्लैट की खरीद शादी से पहले हुई थी। अनन्या की एफडी अवैध तरीके से तोड़ी गई थी। सीमा को पैसे गए थे। मेडिकल रिपोर्ट में बेल्ट के निशान थे। रसोई की रिकॉर्डिंग में चोरी की बात थी। कार की तोड़फोड़ का वीडियो था। बेटिंग के कर्ज थे। दूसरी महिला के फ्लैट के भुगतान थे। गेट पर जान से मारने की धमकी थी।

जज ने लंबे समय तक रोहन को देखा। फिर सिर्फ 1 सवाल पूछा।

—जब आपकी बेटी घायल हुई, आपने उसे डॉक्टर के पास ले जाने, उसे सुरक्षित रखने या अपनी मां और बहन के खिलाफ कोई कदम उठाने की कोशिश की?

रोहन ने नजरें झुका लीं।

—मैं बात शांत करना चाहता था।

जज की आवाज सख्त हो गई।

—बच्चे पर हिंसा शांत नहीं की जाती। रोकी जाती है।

फैसला साफ था। अनन्या की प्राथमिक और पूर्ण कस्टडी प्रिया को मिली। रोहन को सिर्फ निगरानी में मुलाकात की अनुमति दी गई, वह भी काउंसलिंग और अदालत की शर्तों के बाद। फ्लैट पर उसका कोई अधिकार नहीं माना गया। प्रिया पर कोई आर्थिक जिम्मेदारी नहीं डाली गई। चोरी, धमकी और धोखाधड़ी की शिकायतें अलग से चलती रहीं।

अदालत से बाहर निकलते ही रोहन को उसके अपने रिश्तेदारों ने घेर लिया। कोई उसका कंधा थपथपाने नहीं आया था। सब अपने पैसे मांग रहे थे। कमला देवी एक कोने में रो रही थीं, लेकिन पहली बार उनकी आवाज पर कोई नहीं रुका।

प्रिया कार तक पहुंची। अनन्या पीछे की सीट पर बैठी थी, अपना छोटा खरगोश वाला खिलौना सीने से लगाए। पिछले कुछ दिनों में वह थोड़ा बोलने लगी थी। वह घरों की ड्रॉइंग बनाती थी जिनमें बड़े दरवाजे होते थे, पर कोई ताला नहीं। बगीचे होते थे, पर कोई दीवार नहीं। कुत्ते होते थे, पर कोई बच्चा उनके जैसा नहीं चलता था।

—मम्मा, अब मैं वहां नहीं जाऊंगी ना?

प्रिया ने रियर-व्यू मिरर में उसे देखा।

—नहीं, मेरी जान। कभी नहीं।

अनन्या ने अपने घुटनों को देखा। पपड़ी उतर रही थी। नई त्वचा हल्की गुलाबी थी, नाजुक, लेकिन जिंदा।

—मैं उनका छोटा कुत्ता नहीं हूं ना?

प्रिया का हाथ स्टीयरिंग पर कस गया। आंखों में पानी भर आया, पर आवाज नहीं टूटी।

—तू मेरी बेटी है। एक बच्ची है। और दुनिया में किसी को भी तुझे इससे कम समझाने का हक नहीं है।

कार गुड़गांव की सुबह में आगे बढ़ी। मेट्रो की पटरियां ऊपर चमक रही थीं, ऑफिस जाने वाली भीड़ भाग रही थी, सड़क किनारे चाय वाले कुल्हड़ सजा रहे थे। किसी को नहीं पता था कि इस कार के भीतर एक मां ने सिर्फ केस नहीं जीता था। उसने अपनी बेटी का बचपन वापस छीना था।

वर्षों तक प्रिया सोचती रही थी कि घर बचाने के लिए चुप रहना पड़ता है। सास के तानों पर मुस्कुराना, पति की कमजोरी छुपाना, रिश्तेदारों के लालच को मदद कहना, हर अपमान के बाद त्योहार पर फिर मिठाई भेजना—यही शादी है, यही परिवार है।

पर उस दिन उसे समझ आया कि जिस शांति में बच्चा कांपता हो, वह शांति नहीं होती, वह कैद होती है।

सच्चा परिवार वह नहीं जो खून के नाम पर अन्याय ढक दे। सच्चा परिवार वह है जो बच्चे की चोट देखकर रिश्तों की दीवार गिरा दे। जो कह सके कि मां होना बहू होने से बड़ा है, बेटी की सुरक्षा शादी की इज्जत से बड़ी है, और प्यार का मतलब किसी को रेंगना सिखाना नहीं, उसे उठाकर खड़ा करना है।

उस रात अनन्या पहली बार अपने कमरे में सोई। प्रिया दरवाजे पर देर तक खड़ी रही। बच्ची ने नींद में करवट ली और धीरे से मुस्कुराई।

फर्श पर उसका स्कूल बैग रखा था। टेबल पर नई कॉपियां थीं। दीवार पर उसने क्रेयॉन से एक घर बनाया था। घर के बाहर 2 लोग हाथ पकड़े खड़े थे—एक मां, एक बेटी। नीचे उसने टेढ़े अक्षरों में लिखा था।

“हमारा घर।”

प्रिया ने वह कागज छुआ। उसे लगा, इतने सालों में पहली बार किसी ने इस घर का असली नाम लिखा है।

Disclaimer: This story is a work of fiction created for entertainment purposes. Any resemblance to real persons, events, or places is coincidental.