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“मेरी फैमिली को नौकरानी की तरह संभालो” — पति ने 15 रिश्तेदारों के सामने पत्नी से कहा, लेकिन खाली बैंक खाता और गमले में छिपा कैमरा उसी दिवाली रात ऐसा राज खोल गया कि सबकी सांसें अटक गईं।

भाग 1:
नैना को अपने ही घर में 15 लोगों के लिए रसोइया, नौकरानी और बेचारी बहू बनाकर खड़ा कर दिया गया, और उसका पति आरव बस इतना कहता रहा—

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—मेरी फैमिली है, इज़्ज़त करना सीखो।

यह बात उसने इतने ठंडे स्वर में कही कि नैना के हाथ में पकड़ी चाय की ट्रे कांप गई। बाहर गुरुग्राम की उस सोसाइटी के गेट पर 3 कैब रुकी थीं। उनमें से सूटकेस, थैले, मिठाई के डिब्बे, पटाखों की पेटियां, गंदे जूते और चिल्लाते बच्चे उतर रहे थे। तारीख 8 नवंबर थी, दिवाली से 2 दिन पहले। नैना ने सोचा था कि इस बार दिवाली शांत होगी—बस वह, आरव और उनकी 6 साल की बेटी मायरा। उसने बालकनी में दीये सजाए थे, फ्रिज में थोड़ी सी मिठाई रखी थी और शाम को मायरा के साथ रंगोली बनाने का प्लान किया था।

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लेकिन दरवाज़ा खुलते ही सब कुछ बदल गया।

सबसे पहले अंदर आईं आरव की मां शकुंतला देवी। माथे पर बड़ी बिंदी, गले में मोटी सोने की चेन और चेहरे पर वही अधिकार, जैसे यह फ्लैट नैना का नहीं, उनका हो।

—आ गए हम सब। अरे, कोई सामान अंदर रखवाओ। और ध्यान रहे, फर्श खराब मत करना, मेरे बेटे ने मेहनत से घर बनाया है।

नैना ने गहरी सांस ली। यह फ्लैट उसके पिता ने शादी से पहले उसके नाम खरीदा था। आरव ने कभी EMI तक नहीं भरी थी, फिर भी हर रिश्तेदार के सामने यही कहता था कि “घर हमारा है।”

शकुंतला देवी के पीछे आरव का बड़ा भाई नितिन, उसकी पत्नी पूजा, छोटा भाई वरुण, मामा जी, मौसी, 5 बच्चे और एक दूर का कजिन रोहित भी अंदर घुस आए। कुछ ही मिनटों में ड्रॉइंग रूम में चप्पलें, बैग, बच्चों के खिलौने, खुले चिप्स के पैकेट और तेज़ आवाज़ में चल रहे मोबाइल वीडियो फैल गए।

मायरा डरकर नैना की साड़ी पकड़कर खड़ी हो गई। उसके चचेरे भाइयों ने उसकी रंगोली की थाली उठा ली।

—ये मेरी है… मत गिराओ…

एक लड़के ने हंसकर रंग फर्श पर उड़ेल दिया।

—रोती क्यों है? दिवाली है, खेलेंगे ना!

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नैना ने आरव की ओर देखा। वह मुस्कुराकर अपने रिश्तेदारों को गले लगा रहा था, जैसे सब कुछ पहले से तय हो।

—आरव, ये सब अचानक? तुमने बताया क्यों नहीं?

आरव ने उसे रसोई की तरफ खींचते हुए धीरे से कहा—

—मां ने कहा गांव में ठंड बढ़ गई है, सब दिवाली हमारे साथ मनाना चाहते थे। अब क्या मना करता?

—लेकिन 15 लोग हैं। मेरे पास इतना राशन नहीं है। मेरी ऑफिस की डेडलाइन भी है। मैं 10 नवंबर तक काम कर रही हूं।

तभी शकुंतला देवी ने बात सुन ली।

—आजकल की बहुएं भी कमाल हैं। ससुराल वाले घर आ जाएं तो मुंह ऐसे बनाती हैं जैसे टैक्स भरना पड़ रहा हो। हमारी पीढ़ी में बहुएं रात भर खड़ी रहकर 50 लोगों को खिला देती थीं।

पूजा ने फ्रिज खोल दिया।

—अरे भाभी, बस इतनी मिठाई? काजू कतली कहां है? पनीर? मटन? बच्चों के लिए पिज्जा? दिवाली में इतना सूखा इंतज़ाम?

नैना ने जवाब देना चाहा, लेकिन आरव ने उसकी कलाई दबा दी।

—नैना, प्लीज़ ड्रामा मत करो। मार्केट जाओ, सब ले आओ। मेरी फैमिली को शर्मिंदा मत करवाओ।

—पैसे?

—हमारी जॉइंट अकाउंट से ले लो।

नैना चुपचाप पर्स लेकर बाहर निकली। लिफ्ट में खड़ी होकर उसने बैंक ऐप खोला। उसी खाते में 9,80,000 रुपये थे। वह पैसा उन्होंने मायरा के स्कूल एडमिशन, एक छोटी कार और इमरजेंसी के लिए बचाया था। नैना ने अपनी तनख्वाह से ज़्यादा जमा किया था। आरव अक्सर कहता था कि शादी में सब साझा होता है।

स्क्रीन खुली।

बैलेंस: ₹0.00

खाता खाली।

नैना को लगा जैसे लिफ्ट की दीवारें उसके ऊपर गिर रही हैं। उसने दोबारा ऐप खोला। फिर स्टेटमेंट देखा। पिछले 4 दिनों में 5 बड़े ट्रांसफर हुए थे। कुछ रकम “कृष एंटरप्राइज”, कुछ “रोहित ट्रेडिंग”, और एक बड़ा ट्रांसफर “सिया कपूर” के नाम।

नैना वापस फ्लैट में आई। अंदर टीवी पर तेज़ गाने चल रहे थे। बच्चे सोफे पर कूद रहे थे। शकुंतला देवी ने पूजा से कहा—

—बहू को बोलो चाय गरम करके लाए। ठंडी चाय से गला बैठ जाता है।

नैना सीधे आरव के पास गई।

—जॉइंट अकाउंट खाली क्यों है?

आरव का चेहरा उतर गया।

—अभी बात मत करो। सब बैठे हैं।

—9,80,000 रुपये कहां गए?

कमरे में अचानक आवाज़ धीमी हो गई। शकुंतला देवी ने आंखें सिकोड़ लीं।

आरव ने नैना को बेडरूम में धकेला और दरवाज़ा बंद कर दिया।

—मैंने पैसे बिजनेस में लगाए हैं। रोहित ने एक प्लॉट डील बताई थी। दिवाली के बाद डबल होकर आएंगे।

—बिना मुझसे पूछे? यह मायरा की स्कूल फीस का पैसा था।

—तुम हर बात में शक क्यों करती हो? मैं मर्द हूं इस घर का। फैसले ले सकता हूं।

—यह घर मेरा है, आरव। और वह पैसा मेरी बेटी का था।

दरवाज़ा खुल गया। शकुंतला देवी बाहर खड़ी थीं।

—घर मेरा है, पैसा मेरी बेटी का है… यही रट लगाई रहती है। शादी की है या हिसाब की दुकान खोली है? मेरा बेटा अगर निवेश करे तो तुम उसका सम्मान करो।

नैना ने पहली बार सीधा जवाब दिया—

—सम्मान चोरी से नहीं मिलता, मांजी।

शकुंतला देवी का चेहरा लाल हो गया।

—बहू होकर मुझसे ज़ुबान लड़ाएगी?

आरव ने बीच में आकर कहा—

—नैना, माफी मांगो।

—मैंने क्या गलत कहा?

—माफी मांगो।

मायरा दरवाज़े के पास खड़ी सब सुन रही थी। उसकी आंखों में डर था। नैना ने अपने आंसू रोक लिए।

उस रात नैना ने सबके लिए खाना बनाया। 15 लोगों की प्लेटें, बच्चों के लिए अलग पास्ता, बड़ों के लिए पनीर, पूड़ी, आलू, खीर। वह रसोई में खड़ी रही और मायरा डाइनिंग टेबल के कोने पर सूखी रोटी खाती रही। आरव ने एक बार भी नहीं पूछा कि नैना ने खाना खाया या नहीं।

रात के 1 बजे सब सो गए। नैना बर्तन धो रही थी। उसके हाथों में साबुन था, उंगलियां लाल हो चुकी थीं। तभी बेडरूम में रखे आरव के फोन पर रोशनी चमकी। स्क्रीन लॉक थी, लेकिन नोटिफिकेशन दिख गया।

“जान, दवाइयों के पैसे भेज देना। डॉक्टर ने कहा है बेबी को ज्यादा केयर चाहिए। तुम्हारी मां ने कहा था दिवाली के बाद सब हमारा हो जाएगा।”

सेंडर का नाम था: सिया ❤️

नैना ने सांस रोक ली। उसने फोन उठाया, नोटिफिकेशन की फोटो अपने मोबाइल से ली और कुछ सेकंड तक उसे देखती रही। उसके दिमाग में बैंक स्टेटमेंट, खाली खाता, अचानक आए रिश्तेदार और शकुंतला देवी की बातें एक साथ जुड़ने लगीं।

आरव सिर्फ पैसे नहीं छिपा रहा था। वह किसी और औरत को भी घर के भीतर लाने की तैयारी कर रहा था। और उसकी मां, उसके रिश्तेदार—सब शायद पहले से जानते थे।

नैना ने रात भर नींद नहीं ली। सुबह 5 बजे उसने अपने पुराने कॉलेज की दोस्त मीरा को मैसेज किया। मीरा अब फैमिली कोर्ट की वकील थी।

“मुझे तुम्हारी जरूरत है। अभी।”

मीरा का जवाब 2 मिनट में आया।

“डॉक्यूमेंट्स संभालो। घर किसके नाम है?”

नैना ने लिखा—

“मेरे नाम। शादी से पहले पापा ने खरीदा था।”

जवाब आया—

“तो रोना बंद करो। खेल शुरू करो। कुछ भी साइन मत करना।”

उसी समय बाहर ड्रॉइंग रूम से शकुंतला देवी की आवाज़ आई—

—नैना! चाय कहां है? मेहमान उठ गए हैं!

नैना ने मोबाइल मुट्ठी में दबाया। वह रसोई की तरफ बढ़ी, लेकिन इस बार उसके कदम कमजोर नहीं थे।

उस दिन उसने चाय बनाई, नाश्ता परोसा, बच्चों की गंदगी साफ की, पूजा की ताने सुने, नितिन की फरमाइशें पूरी कीं। लेकिन दोपहर में जब सब सो रहे थे, उसने अलमारी से घर की रजिस्ट्री, बैंक स्टेटमेंट, शादी के पेपर और मायरा के मेडिकल डॉक्यूमेंट्स निकालकर स्कैन किए और मीरा को भेज दिए।

शाम को उसने ड्रॉइंग रूम की तुलसी वाली बड़ी पॉट में एक छोटी सी कैमरा डिवाइस छिपा दी। मीरा ने ही भिजवाई थी।

रात को जब नैना ने बहाना बनाया कि उसे ऑफिस कॉल करनी है, वह बेडरूम में चली गई। लेकिन उसका फोन लाइव रिकॉर्डिंग दिखा रहा था।

ड्रॉइंग रूम में असली बैठक शुरू हुई।

शकुंतला देवी सोफे पर बैठी बोलीं—

—आरव, दिवाली की रात सबके सामने भावुक हो जाना। कहना कि पति-पत्नी में भरोसा होना चाहिए। उससे कहो कि फ्लैट में तुम्हारा नाम जोड़ दे।

नितिन बोला—

—फिर उस पर लोन उठेगा। मेरा कर्ज उतर जाएगा। वरुण की दुकान भी खुल जाएगी।

पूजा हंसी—

—और सिया के लिए अलग फ्लैट भी ले लेना। वैसे भी वह लड़का देने वाली है। नैना तो बस लड़की की मां बनकर अकड़ रही है।

आरव ने धीमे स्वर में कहा—

—अगर नैना ने मना कर दिया तो?

शकुंतला देवी ने ठंडी हंसी हंसी।

—मना करेगी तो उसे इतनी बुरी बहू साबित करेंगे कि खुद शर्म से साइन कर देगी। और नहीं किया तो कह देंगे कि वह मायरा को हमसे दूर रखती है। कोर्ट-कचहरी में कौन पड़ेगा?

नैना ने फोन की स्क्रीन को ऐसे पकड़ा जैसे उसकी उंगलियां पत्थर बन गई हों। वह टूट नहीं रही थी। वह सब याद रख रही थी।

अगली सुबह आरव उसके पास गुलाब जामुन की प्लेट लेकर आया।

—नैना, मैं सोच रहा था कि हमारे रिश्ते में भरोसा बढ़ना चाहिए। घर की रजिस्ट्री में मेरा नाम भी हो जाए तो अच्छा रहेगा। आखिर हम पति-पत्नी हैं।

नैना ने उसकी आंखों में देखा।

—अजीब बात है। रात में मैंने भी सपना देखा कि कोई मेरा घर चुराने आया है।

आरव का चेहरा सफेद पड़ गया।

तभी दरवाज़े की घंटी बजी।

पूजा दरवाज़ा खोलने दौड़ी। बाहर एक खूबसूरत जवान औरत खड़ी थी। लाल सलवार सूट, हाथ में मिठाई का डिब्बा और पेट पर हल्की सी उभरी हुई गोलाई।

शकुंतला देवी खिल उठीं।

—आओ बेटी, आओ। यही है सिया।

नैना ने उसे पहचान लिया। वही नाम बैंक स्टेटमेंट में था। वही फोन पर था। वही औरत जिसके लिए उसकी बेटी का भविष्य खाली कर दिया गया था।

आरव ने निगाहें झुका लीं।

सिया ने मीठी आवाज़ में कहा—

—माफ़ कीजिएगा, मुझे कहीं और जाने की जगह नहीं थी।

नैना ने उसकी मुस्कान देखी। उस मुस्कान में शर्म नहीं थी। दावा था।

और उसी पल नैना समझ गई कि दिवाली की रात सिर्फ दीये नहीं जलेंगे, कुछ चेहरों की असलियत भी आग की तरह चमकेगी।

कमेंट्स में दिए गए लिंक से पूरी कहानी पढ़े 👇

भाग 2:

सिया के घर में कदम रखते ही नैना की रसोई, उसका कमरा और उसकी सांस तक छोटी पड़ने लगी। शकुंतला देवी ने उसे मायरा के कमरे में रुकवाने की कोशिश की, लेकिन नैना ने पहली बार साफ कह दिया कि बच्ची का कमरा किसी अजनबी को नहीं मिलेगा। इस पर पूजा ने बच्चों के सामने ताना मारा कि कुछ औरतें मां तो बन जाती हैं, पर घर की लक्ष्मी नहीं बन पातीं। आरव चुप रहा। दोपहर के खाने में सिया को सबसे पहले परोसा गया, उसके लिए बादाम वाला दूध बनाया गया, और मायरा जब अपनी मां के पास बैठने आई तो नितिन के बेटे ने उसे धक्का देकर कहा कि अब घर में असली बेबी आने वाला है। मायरा गिर पड़ी। उसका माथा टेबल के कोने से टकराया और हल्की सूजन आ गई। नैना दौड़ी, लेकिन उससे पहले शकुंतला देवी चीखीं कि बच्ची ने जानबूझकर सिया की तरफ गिरकर उसे डराया है। फिर उन्होंने मायरा की बांह झटके से पकड़ ली। नैना की आंखों में ऐसी आग थी कि पूरा कमरा शांत हो गया। उसने मायरा को सीने से लगाया और कहा कि अगली बार किसी ने उसकी बेटी को छुआ तो यह घर पुलिस स्टेशन बन जाएगा। उसी शाम मीरा ने नैना को 3 बातें भेजीं—सिया का असली मेडिकल रिकॉर्ड, आरव की पुरानी फर्टिलिटी रिपोर्ट और बैंक ट्रांसफर का पूरा निशान। रिपोर्ट में साफ था कि आरव के पिता बनने की संभावना लगभग न के बराबर थी, और सिया जिस 14 हफ्ते के गर्भ का दावा कर रही थी, उस समय आरव मुंबई में दुर्घटना के बाद अस्पताल में भर्ती था। लेकिन सबसे बड़ा झटका रात में छिपे कैमरे ने दिया। सिया फोन पर किसी “कबीर” से कह रही थी कि आरव बेवकूफ है, उसे बच्चा अपना लग रहा है, फ्लैट पर नाम आते ही वह पैसे लेकर निकल जाएगी। नैना ने वह रिकॉर्डिंग सेव की, मायरा के सिर पर दवा लगाई और टूटी हुई रंगोली के पास बैठकर दीयों को देखा। बाहर लोग दिवाली की तैयारी कर रहे थे, अंदर 15 लोग उसकी जिंदगी लूटने की तैयारी कर रहे थे। उसी रात नैना ने फैसला कर लिया कि लक्ष्मी पूजा की थाली में इस बार सिर्फ फूल नहीं होंगे, सबूत भी रखे जाएंगे, और दिवाली की दावत उनकी आखिरी चाल साबित होगी। ❤️नमस्ते, प्यारे रीडर्स! अगर आप अगले पार्ट के लिए तैयार हैं, तो प्लीज़ नीचे “Yes” लिखें, और मैं इसे तुरंत भेज दूँगा। मैं उन सभी के अच्छे स्वास्थ्य और खुशी की कामना करता हूँ जिन्होंने यह कहानी पढ़ी और पसंद की है! 💚

भाग 3:

दिवाली की सुबह गुरुग्राम की उस सोसाइटी में हर बालकनी रोशनी से चमक रही थी। कहीं लड्डू बांटे जा रहे थे, कहीं बच्चे नए कपड़ों में पटाखों की बातें कर रहे थे, कहीं औरतें रंगोली पर फूल सजा रही थीं। लेकिन नैना के फ्लैट के अंदर अजीब सी घुटन थी। जैसे दीवारें भी जानती थीं कि आज कुछ बड़ा होने वाला है।

शकुंतला देवी सुबह से आदेश दे रही थीं।

—नैना, शाम को कम से कम 12 चीज़ें बननी चाहिए। पनीर, छोले, पूरी, पुलाव, हलवा, दही भल्ले, टिक्की, सब कुछ। और सिया के लिए कम मसाले वाला खाना अलग।

पूजा ने चाय का कप टेबल पर छोड़ते हुए कहा—

—और मिठाई अच्छे ब्रांड की होनी चाहिए। सोसाइटी वाले आएंगे तो हमारी नाक कटनी नहीं चाहिए।

नैना ने शांत स्वर में कहा—

—आज सबको वही मिलेगा जिसके वे हकदार हैं।

पूजा हंस पड़ी।

—देखा मांजी? बहू को आखिर अक्ल आ ही गई।

नैना ने कुछ नहीं कहा। वह रसोई में चली गई। उसने सचमुच खाना बनाया। मसाले भुने, आटा गूंथा, पूरियां तलीं, दाल बनाई, हलवा सजाया। हर थाली चमक रही थी। लेकिन इस बार उसके हाथ डर से नहीं, निर्णय से चल रहे थे।

मायरा बार-बार रसोई में आती और पूछती—

—मम्मा, आप ठीक हो?

नैना हर बार उसके माथे को चूमती।

—आज के बाद सब ठीक होगा।

शाम 7 बजे तक घर मेहमानों से नहीं, साजिश करने वालों से भरा हुआ था। शकुंतला देवी ने सिया को अपने पास बिठाया। आरव उसकी प्लेट में खाना रख रहा था। मायरा नैना के पास कुर्सी पर चुप बैठी थी। उसके माथे की सूजन हल्की दिख रही थी, पर डर अभी भी आंखों में था।

आरव ने धीमे से नैना से कहा—

—आज प्लीज़ कोई तमाशा मत करना। मां की तबीयत ठीक नहीं रहती।

नैना ने मुस्कुराकर पूछा—

—तुम्हें मेरी बेटी की तबीयत कब याद आई?

आरव ने नजरें फेर लीं।

कुछ देर बाद लक्ष्मी पूजा शुरू हुई। शकुंतला देवी ने आरती की थाली उठाई और सिया को आगे बुलाया।

—आओ बेटी, तुम आरती करो। तुम्हारे पेट में हमारे घर का वारिस है। शुभ काम तुम्हारे हाथ से ही होगा।

कमरे में एक पल के लिए सन्नाटा छा गया। नैना ने देखा कि आरव की छाती गर्व से तन गई। नितिन और वरुण मुस्कुरा रहे थे। पूजा मोबाइल से वीडियो बना रही थी, शायद बाद में रिश्तेदारों को भेजने के लिए।

सिया ने आरती की थाली उठाई और झूठी लाज से बोली—

—नहीं मांजी, नैना दीदी बड़ी हैं।

शकुंतला देवी ने तिरस्कार से नैना की ओर देखा।

—बड़प्पन पेट से नहीं, किस्मत से आता है। कुछ औरतें घर में रोशनी लाती हैं, कुछ बस खर्चा।

यह सुनकर मायरा ने नैना का हाथ कसकर पकड़ लिया।

नैना ने धीरे से उसका हाथ दबाया। फिर वह उठी। उसने पूजा की थाली से फूल हटाए और नीचे रखी एक मोटी फाइल उठा ली। मीरा ठीक उसी समय दरवाज़े से अंदर आई। उसने नीली साड़ी पहनी थी और हाथ में दूसरा फोल्डर था।

शकुंतला देवी भड़क उठीं।

—ये कौन है? दिवाली की पूजा में बाहरी औरत?

नैना ने कहा—

—मेरी दोस्त मीरा। वकील है। आज पूजा के बाद प्रसाद नहीं, सच बांटेगी।

आरव का चेहरा बदल गया।

—नैना, यह क्या है?

मीरा ने शांत स्वर में कहा—

—अगर किसी ने कुछ गलत नहीं किया, तो डरने की जरूरत नहीं।

नितिन ने हंसने की कोशिश की।

—अरे वकील-वकील क्या लगा रखा है? परिवार की बात है।

नैना ने डाइनिंग टेबल के बीच रखी बड़ी चांदी की थाली उठाई, जिसमें पूरियां और मिठाई रखी थीं। उसने उसे जोर से टेबल पर पटक दिया। पूरियां बिखर गईं, कटोरियां खनक उठीं, हलवे की खुशबू हवा में फैल गई, और हर चेहरा उसकी ओर मुड़ गया।

—अब परिवार की बात होगी। सबके सामने।

शकुंतला देवी खड़ी हो गईं।

—बहू, हद में रहो।

—आज हद मैं नहीं, आप सब पार कर चुके हैं।

मीरा ने पहला पेपर निकाला।

—यह फ्लैट नैना के पिता ने उसकी शादी से पहले उसके नाम खरीदा था। रजिस्ट्री साफ है। आरव का इस घर पर कोई कानूनी हक नहीं है।

आरव ने गुस्से में कहा—

—मैं इस घर में 7 साल से रह रहा हूं।

मीरा ने तुरंत जवाब दिया—

—किराएदार भी सालों रहते हैं, मालिक नहीं बन जाते।

पूजा बड़बड़ाई—

—बहुत अकड़ है इसमें।

नैना ने मोबाइल टीवी से कनेक्ट किया। स्क्रीन पर वही वीडियो चलने लगा जिसमें शकुंतला देवी सोफे पर बैठकर कह रही थीं कि पहले नैना को भावुक करना है, फिर रजिस्ट्री में आरव का नाम डलवाना है, फिर घर पर लोन उठाना है।

वीडियो खत्म होते ही कमरे में ऐसा सन्नाटा फैल गया कि बाहर पटाखों की आवाज़ भी दूर लगने लगी।

नितिन ने शकुंतला देवी की तरफ देखा।

—मां, आपने कहा था नैना खुद मान जाएगी।

वरुण ने दांत पीसकर कहा—

—अब मेरा दुकान वाला प्लान गया।

आरव चिल्लाया—

—ये सब एडिटेड है।

नैना ने दूसरा वीडियो चलाया। उसमें पूजा मायरा की अलमारी खोलकर नैना के गहनों का छोटा डिब्बा निकाल रही थी। फिर अगली फोटो में वही कंगन पूजा के हाथ में दिख रहे थे, जो उसने दोपहर में सेल्फी डालते समय पहने थे।

पूजा का चेहरा पीला पड़ गया।

—मैं तो बस देख रही थी।

मीरा ने कहा—

—गहने देखने के लिए ब्लाउज के अंदर छिपाकर नहीं ले जाए जाते।

पूजा ने झट से कंगन उतारे और टेबल पर फेंक दिए।

—लो, रखो अपनी चीज़ें। जैसे लाखों की हों।

नैना ने कहा—

—ये मेरी मां की आखिरी निशानी थी। कीमत रुपये में नहीं होती।

शकुंतला देवी ने बात मोड़ने की कोशिश की।

—बहू घर की छोटी बातों को पुलिस तक ले जाएगी? यही संस्कार दिए हैं तेरे बाप ने?

नैना का चेहरा कठोर हो गया।

—मेरे पिता ने मुझे घर दिया था, गुलामी नहीं।

मीरा ने बैंक स्टेटमेंट टेबल पर रखे।

—जॉइंट अकाउंट से 9,80,000 रुपये निकाले गए। 4 ट्रांसफर सिया कपूर को, 1 रोहित ट्रेडिंग को, और 2 कैश निकासी आरव के नाम पर।

आरव ने सफाई दी—

—वह बिजनेस के लिए था।

नैना ने पूछा—

—कौन सा बिजनेस? गर्भवती प्रेमिका की दवाइयों का?

सिया पहली बार असहज हुई।

—आप गलत समझ रही हैं।

नैना ने उसकी ओर देखा।

—नहीं, मैं बहुत देर से सही समझ रही हूं।

सिया ने पेट पर हाथ रखा।

—इस बच्चे का अपमान मत कीजिए। यह आरव का है।

शकुंतला देवी तुरंत बोलीं—

—हां, हमारा वारिस है। इसी ने इस घर में इज्जत बचाई है।

मीरा ने फाइल से मेडिकल रिपोर्ट निकाली।

—यह आरव की फर्टिलिटी रिपोर्ट है, 1 साल पुरानी। डॉक्टर ने लिखा है कि प्राकृतिक रूप से पिता बनने की संभावना लगभग शून्य है।

आरव की सांस अटक गई।

—ये रिपोर्ट तुम्हारे पास कैसे?

नैना ने कहा—

—तुम्हारे पुराने मेडिकल फोल्डर में थी। जिसे तुमने छिपाया था।

सिया ने हड़बड़ाकर कहा—

—रिपोर्ट पुरानी है। डॉक्टर भी गलत होते हैं।

मीरा ने दूसरा पेपर उठाया।

—और यह अस्पताल का रिकॉर्ड है। जिस सप्ताह सिया गर्भ ठहरने का दावा कर रही है, आरव मुंबई में 12 दिन अस्पताल में भर्ती था। हिप फ्रैक्चर के कारण बेड रेस्ट पर।

कमरे में फुसफुसाहट फैल गई। शकुंतला देवी का चेहरा पहली बार ढहता दिखा, लेकिन वह अभी भी सिया को बचाना चाहती थीं।

—कुछ भी हो सकता है। भगवान की मर्जी…

नैना ने फोन पर ऑडियो चलाया।

सिया की आवाज़ कमरे में गूंज उठी—

—कबीर, घबराओ मत। बच्चा तुम्हारा ही है। आरव को बस बेवकूफ बनाना है। उसकी मां खुद मुझे घर में लाई है। फ्लैट पर नाम आ जाए, पैसे मिल जाएं, फिर मैं निकल जाऊंगी।

ऑडियो खत्म हुआ।

आरव ने कुर्सी पकड़ ली।

—सिया… ये क्या है?

सिया पीछे हट गई।

—यह झूठ है। यह मेरी आवाज़ नहीं।

तभी रोहित, जो अब तक कोने में चुप बैठा था, अचानक बोला—

—मुझे इसमें मत घसीटना। मुझे तो बस कहा गया था कि अकाउंट से पैसे घुमाने हैं।

सभी उसकी तरफ देखने लगे।

नितिन चिल्लाया—

—चुप रह बेवकूफ!

रोहित डर गया, लेकिन बोल चुका था।

—मैंने कुछ नहीं लिया। पैसे सिया और नितिन भैया के कहने पर गए थे। आरव भैया खुद बोले थे कि नैना भाभी को कुछ मत बताना।

आरव ने नितिन की कॉलर पकड़ ली।

—तूने कहा था यह निवेश है!

नितिन ने उसे धक्का दिया।

—तुझे भी तो सिया चाहिए थी। अब संत मत बन।

शकुंतला देवी चीखीं—

—बस करो! सब लोग बहू के सामने घर की इज्जत मिट्टी में मिला रहे हो।

नैना ने ठंडे स्वर में कहा—

—इज्जत तब मिट्टी में मिली थी जब आपने मेरी बेटी को धक्का खाने दिया और उसकी जगह उस औरत के पेट को आशीर्वाद दिया, जिसका सच आप जानती थीं या जानना नहीं चाहती थीं।

मायरा कुर्सी से उतरकर नैना के पीछे खड़ी हो गई। उसकी छोटी उंगलियां नैना की साड़ी में उलझी थीं।

आरव ने पहली बार बेटी को देखा।

—मायरा… बेटा…

मायरा ने तुरंत चेहरा छिपा लिया।

—मुझे बेटा मत बोलो। आपने मुझे रोते देखा था।

आरव जैसे भीतर से टूट गया। लेकिन नैना के लिए वह टूटना भी देर से आया था।

उसी समय दरवाज़े की घंटी बजी। मीरा ने दरवाज़ा खोला। बाहर 2 पुलिसकर्मी, सोसाइटी मैनेजर और महिला सुरक्षा अधिकारी खड़े थे।

मीरा ने कहा—

—घरेलू हिंसा, आर्थिक धोखाधड़ी, संपत्ति हड़पने की साजिश और बच्ची के साथ मारपीट की शिकायत दर्ज करानी है। सबूत तैयार हैं।

शकुंतला देवी सिर पकड़कर बैठ गईं।

—दिवाली के दिन पुलिस बुला ली? बहू होकर कुल का नाश कर दिया तूने।

नैना ने पहली बार ऊंची आवाज़ में कहा—

—कुल का नाश मैंने नहीं किया। आपने अपने बेटे को लालच, झूठ और बेइज्जती सिखाकर किया।

पुलिस ने सबके बयान लेने शुरू किए। पूजा रोते हुए कंगन वापस रखने लगी। नितिन बार-बार कह रहा था कि उसे कुछ नहीं पता। वरुण अपना बैग पैक करने लगा। रोहित ने बचने के लिए सारे ट्रांसफर की चैट दिखा दी। सिया चुपचाप दरवाज़े की ओर बढ़ी, लेकिन महिला अधिकारी ने उसे रोक लिया।

—मैडम, आप भी रुकिए। आपको भी बयान देना होगा।

आरव नैना के सामने आकर खड़ा हुआ। उसकी आंखों में डर था।

—नैना, प्लीज़। मैं गलती कर गया। मां ने दबाव डाला। नितिन ने उकसाया। सिया ने फंसाया। मैं…

नैना ने उसे बीच में रोक दिया।

—एक गलती होती है दूध जल जाना। तुमने मेरी बेटी का भविष्य खाली किया। मेरे घर पर नजर डाली। मेरी रसोई में अपनी प्रेमिका को बिठाया। मेरी बेटी के आंसुओं पर चुप रहे। और मुझे ही बदतमीज़ बहू कहा। यह गलती नहीं, चरित्र है।

आरव ने हाथ जोड़ दिए।

—मुझे एक मौका दे दो।

—तुमने मौका नहीं मांगा था, कब्ज़ा मांगा था।

मीरा ने तलाक के पेपर उसके सामने रख दिए।

—साइन अभी नहीं करने हैं। लेकिन पढ़ लो। अब नैना कानूनी रास्ते से आगे बढ़ेगी।

आरव ने पेपर देखे। उसके चेहरे पर वही आदमी नहीं था जो 2 दिन पहले पत्नी को आदेश दे रहा था। अब वह अकेला था। उसकी अपनी मां चुप थी, भाई उसे दोष दे रहे थे, प्रेमिका बचने की कोशिश कर रही थी, और बेटी उससे दूर खड़ी थी।

रात 11:40 बजे तक घर खाली होने लगा। शकुंतला देवी ने जाते-जाते कहा—

—तू पछताएगी। अकेली औरत का घर नहीं बसता।

नैना ने दरवाज़े पर खड़े होकर जवाब दिया—

—अकेली औरत का घर बस सकता है। लालची लोगों की भीड़ से घर नहीं बसता।

दरवाज़ा बंद हुआ।

फ्लैट में पहली बार शांति हुई। टेबल पर बिखरा खाना ठंडा था। फर्श पर टूटे दीये का तेल फैला था। रंगोली पहले ही खराब हो चुकी थी। लेकिन नैना को लगा जैसे घर में सचमुच दिवाली अब आई है।

मायरा धीरे से बाहर आई।

—मम्मा, अब कोई नहीं चिल्लाएगा?

नैना घुटनों के बल बैठ गई और उसे गले लगा लिया।

—नहीं, मेरी जान। अब कोई नहीं चिल्लाएगा।

—हम दिवाली मनाएंगे?

नैना की आंखों में आंसू थे, लेकिन मुस्कान साफ थी।

—हां। अभी।

उसने रसोई से वह छोटा डिब्बा निकाला जो उसने पहले ही छिपाकर रख दिया था। उसमें 6 दीये, थोड़ी सी बर्फी और मायरा की पसंद की चॉकलेट थी। दोनों ने बालकनी में दीये जलाए। नीचे पटाखे फूट रहे थे, आसमान रंगों से भर रहा था, और ऊपर 10वीं मंजिल की उस बालकनी में एक मां और बेटी बिना शोर के अपनी जिंदगी वापस पा रही थीं।

कुछ महीनों बाद कोर्ट में नैना की बात मजबूत साबित हुई। घर उसी के नाम रहा। आरव को मायरा की परवरिश के लिए पैसा देना पड़ा और जॉइंट अकाउंट से निकाली रकम का हिसाब भी। नितिन और रोहित के खिलाफ आर्थिक धोखाधड़ी की जांच शुरू हुई। पूजा ने गहने लौटाए, मगर रिश्ते कभी वापस नहीं लौटे। शकुंतला देवी कुछ समय नितिन के घर रहीं, फिर पूजा ने साफ कह दिया कि वह उनकी सेवा नहीं कर सकती। जिस बहू को उन्होंने नौकरानी समझा था, उसी की चुप्पी ने पूरे घर का चेहरा दिखा दिया।

सिया ने बच्चे को जन्म देने से पहले ही शहर छोड़ दिया। बाद में पता चला कि वह कबीर नाम के आदमी के साथ जयपुर चली गई थी। आरव ने कई बार नैना से मिलने की कोशिश की, लेकिन नैना ने सिर्फ मीरा के जरिए जवाब भेजा—

—मायरा से मिलना है तो कोर्ट के नियम से मिलो। मुझसे नहीं।

1 साल बाद दिवाली फिर आई। इस बार नैना ने घर में 15 लोगों के लिए खाना नहीं बनाया। उसने मायरा के साथ मिलकर 15 दीये जलाए—हर दीया उस रात की एक याद के नाम था जिसे उन्होंने पीछे छोड़ दिया था।

मायरा ने पूछा—

—मम्मा, ये वाला दीया किसके लिए?

नैना ने कहा—

—यह उस दिन के लिए, जब हमने डर को घर से बाहर निकाला।

मायरा ने हंसकर आखिरी दीया जलाया।

उस रात नैना ने समझा कि औरत तब नहीं टूटती जब उसका परिवार उसे छोड़ देता है। वह तब टूटती है जब वह उन लोगों को परिवार समझती रहती है, जो उसकी थाली से खाते हैं और उसी की इज्जत नोचते हैं।

नैना ने उस दिवाली दावत खराब नहीं की थी।

उसने बस पहली बार उन लोगों को खाना परोसना बंद कर दिया था, जो सालों से उसकी जिंदगी खा रहे थे।

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