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रात के खाने के दौरान पूरे परिवार के सामने मेरा पानी की थैली फट गई। मैंने उनसे गिड़गिड़ाकर मुझे अस्पताल ले चलने की विनती की, लेकिन मेरे पिता ने बस इतना कहा, “एक उबर बुला लो। हम व्यस्त हैं।” उस रात मैं अकेले ही गाड़ी चलाकर आपातकालीन विभाग पहुँची, जहाँ मेरी आपातकालीन सिज़ेरियन सर्जरी करनी पड़ी। एक हफ्ते बाद मेरी माँ मुस्कुराते हुए आईं और बोलीं, “मुझे अपनी नातिन को देखने दो।” मैंने उनकी आँखों में देखते हुए जवाब दिया, “कौन-सी नातिन?”

भाग 2:

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दोना एलवीरा अस्पताल पहुँचीं।

उन्होंने सिर्फ़ एक गाउन पहन रखा था, पैरों में चप्पलें थीं, बाल बिखरे हुए थे, और हाथ में नवजात के लिए खरीपे गए डायपरों से भरा एक प्लास्टिक का थैला था।

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वह सत्तर वर्ष की थीं और मारियाना के सामने वाले अपार्टमेंट में रहती थीं।

उनका मारियाना से कोई खून का रिश्ता नहीं था।

लेकिन वही थीं जिन्होंने उसे प्रसव-पूर्व कक्षाओं में पहुँचाया।

जब मारियाना डरती थी, तो वही उसके साथ अल्ट्रासाउंड के लिए जाती थीं।

और हर मंगलवार उसके दरवाज़े पर दस्तक देकर पूछती थीं कि बाज़ार से उसके लिए क्या लाना है।

जब नर्स ने बताया कि मारियाना की आपातकालीन सर्जरी होने वाली है, तो एलवीरा ने यह नहीं पूछा कि क्या यह सही समय है।

उन्होंने यह नहीं कहा कि वह थकी हुई हैं।

उन्होंने कोई कारण भी नहीं पूछा।

बच्ची का जन्म रात 11:41 बजे हुआ।

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छोटी-सी।

ज़ोर-ज़ोर से रोती हुई।

ज़िंदा।

डॉक्टरों ने बताया कि प्रसव पीड़ा के दौरान उसकी हृदय गति गिर गई थी, इसलिए आपातकालीन सीज़ेरियन करना पड़ा।

मारियाना को अपनी बेटी को ठीक से देखने तक का समय नहीं मिला।

बस इतना जान सकी…

कि वह जीवित है।

बस।

सेबास्तियान ने केवल एक संदेश लिखा।

न कोई फ़ोन।

न कोई सवाल।

न यह—

“क्या उसने बच्चे को जन्म दे दिया?”

न यह—

“क्या वह ज़िंदा है?”

कुछ भी नहीं।

मारियाना ने वह संदेश तीन बार पढ़ा।

फिर उसने फ़ोन उल्टा रख दिया।

सच ने उसे चौंकाया नहीं।

उसने सिर्फ़ उस ज़हर का नाम बता दिया जिसके साथ वह इतने वर्षों से जी रही थी।

एक सप्ताह बाद…

मारियाना अपने अपार्टमेंट में सोफ़े पर बैठी थी।

उसकी बाँहों में गुलाबी कंबल में लिपटी लूसिया थी।

दरवाज़े के बाहर कार्मेन गुलाबी उपहारों का एक बैग लिए खड़ी थी।

रामिरो के चेहरे पर मजबूरी साफ़ दिखाई दे रही थी।

लोरेना ने धूप का चश्मा पहन रखा था, मानो यहाँ आना उसके लिए कोई बोझ हो।

कार्मेन ने ज़रूरत से ज़्यादा मुस्कुराते हुए कहा—

—मेरी बच्ची… हम अपनी नातिन से मिलने आए हैं।

मारियाना ने दरवाज़ा बस कुछ सेंटीमीटर ही खोला।

—कौन-सी नातिन?

कार्मेन की मुस्कान गायब हो गई।

—क्या मतलब… कौन-सी नातिन?

रामिरो ने सिर हिलाया।

—लूसिया।

—हमारी नातिन।

मारियाना ने हल्का-सा सिर झुका लिया।

—ओह…

—वही नातिन…

—जिसके बारे में पूरे एक हफ़्ते तक किसी ने पूछा तक नहीं?

कार्मेन ने पहली बार लोरेना की ओर उस नज़र से देखा—

जिसमें सिर्फ़ भय था।

—लोरेना…

—मुझसे कहो कि यह सच नहीं है।

लोरेना ने अपना चश्मा उतार दिया।

मारियाना ने अपना फ़ोन आगे बढ़ा दिया।

स्क्रीन पर एक छोटा-सा…

लेकिन बेहद निर्दयी शब्द दिखाई दे रहा था।

उसका लोरेना को भेजा गया संदेश।

शाम 6:12 बजे।

“मेरे बच्चे को हर पाँच मिनट में दौरे पड़ रहे हैं। डॉक्टर ने कहा है कि मुझे सावधान रहना होगा। शायद आज मुझे मदद की ज़रूरत पड़े।”

उसके नीचे केवल एक शब्द लिखा था—

पढ़ा गया।

कार्मेन ने अपना हाथ मुँह पर रख लिया।

रामिरो ने लोरेना की ओर देखा।

—तुम्हें पता था?

लोरेना जल्दी-जल्दी बोलने लगी।

वह हमेशा जल्दी बोलती थी।

हमेशा।

मारियाना ने दूसरा पन्ना उसकी ओर बढ़ा दिया।

—अब दूसरा भी पढ़ लीजिए।

कार्मेन ने काँपते हाथों से वह कागज़ लिया।

वह सेबास्तियान का संदेश था।

“मैंने रात के खाने से पहले वह संदेश देख लिया था। लोरेना ने कहा कि अगर सबको पता चल गया कि तुम दर्द में हो, तो शादी की रात खराब हो जाएगी। जब तुम्हारा पानी टूट गया, तब भी उसने माँ-पापा को यक़ीन दिलाया कि तुम बढ़ा-चढ़ाकर बोल रही हो। मुझमें उनका सामना करने की हिम्मत नहीं थी। मुझे शर्म आती है।”

पूरा कमरा शांत हो गया।

दोना एलवीरा रसोई के दरवाज़े पर हाथ में चाय का कप लिए आकर खड़ी हो गईं।

उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा।

रामिरो धीरे-धीरे बैठ गया।

मानो उसके पैरों ने उसका साथ छोड़ दिया हो।

कार्मेन फिर से लोरेना की ओर देखने लगी।

इस बार उसके चेहरे पर सिर्फ़ दहशत थी।

—लोरेना…

—मुझसे कहो कि यह सच नहीं है।

लोरेना ने अपना चश्मा उतार दिया।

उसकी आवाज़ बर्फ़ जैसी ठंडी थी।

—नहीं।

बस एक शब्द।

धीमा।

लेकिन बिल्कुल साफ़।

कार्मेन जैसे पत्थर बन गई।

—मारियाना…

—कृपया…

—मैं तुम्हारी माँ हूँ।

मारियाना ने उन तीनों को देखा।

—यही बात…

—अब हम करने वाले हैं।

Disclaimer : This content may be created by AI for entertainment purposes. Any resemblance to real persons, events, or places is coincidental.