
भाग 2….
डेरेक ने अपना सिर घुमाया और अँधेरे गैरेज में आँखें सिकोड़कर देखने लगा।
टॉमी और दुबला-पतला आदमी पीछे हट गए, अपने हथियार उठाए और उस व्यक्ति को ढूँढ़ने लगे जिसने अभी-अभी आवाज़ लगाई थी।
दो गाड़ियों के बीच से एक आदमी बाहर आया।
वह किसी नायक बनने की कोशिश करने वाले इंसान जैसा बिल्कुल नहीं दिख रहा था।
सबसे पहले मैंने यही बात नोटिस की।
वह शायद अड़तीस साल का था।
लगभग पाँच फुट ग्यारह इंच लंबा।
उसने फीकी पड़ चुकी डेनिम जींस, घिसे हुए हाइकिंग बूट और मोटी ऑलिव रंग की कैनवास जैकेट पहन रखी थी।
उसकी दाढ़ी करीने से कटी हुई थी।
ऊपर टिमटिमाती रोशनी में उसकी स्लेटी-भूरी आँखें चमकीं, लेकिन उनमें क्या चल रहा था, पढ़ पाना नामुमकिन था।
बाद में मुझे पता चला कि उसका नाम जेडन चावेज़ था।
उसे वहाँ होना ही नहीं चाहिए था।
वह पिछले छह घंटे ऊपर ऑन्कोलॉजी वार्ड में अपने पूर्व कमांडिंग ऑफिसर, कैप्टन रॉबर्ट मिशेल, के पास बैठा था, जो अग्न्याशय के कैंसर से एक कठिन लड़ाई लड़ रहे थे।
जेडन कभी नेवी सील रह चुका था।
डीईवीजीआरयू।
ऐसा आदमी जिसे उन जगहों के लिए प्रशिक्षित किया गया था जहाँ एक पल की हिचकिचाहट की भी भारी कीमत चुकानी पड़ती है।
वह अफ़ग़ानिस्तान में दो बार और इराक में एक बार तैनात रह चुका था।
फल्लूजा में एक आईईडी विस्फोट ने उसके बाएँ कान में हमेशा के लिए घंटी जैसी आवाज़ छोड़ दी थी, और कुछ ऐसे ज़ख्म भी, जिन्हें वह चुपचाप अपने भीतर ढोता था।
वह अकेले कुछ पल बिताने के लिए गैरेज में आया था।
लेकिन वहाँ उसे मैं कंक्रीट पर पड़ी मिली।
उसने एक पल से भी कम समय में पूरी स्थिति का आकलन कर लिया।
तीन हमलावर।
मुख्य हमलावर मुझे पकड़े हुए।
दो साथी दोनों ओर।
एक हथियार साफ़ दिखाई दे रहा था।
भागने का रास्ता बहुत सीमित।
“तू कौन है?” डेरेक ने मेरी जैकेट पकड़े हुए गुर्राकर कहा। “यहाँ से निकल जा। यह तेरा मामला नहीं है।”
जेडन नहीं रुका।
उसकी चाल नपी-तुली थी।
हाथ ढीले।
खुले हुए।
वह दिखावा नहीं कर रहा था।
वह बस धीरे-धीरे दूरी कम कर रहा था।
“मैं आख़िरी बार कह रहा हूँ,” जेडन बोला। “उसे छोड़ दो। पीछे हट जाओ। तब तुम अपने पैरों पर चलकर इस गैरेज से बाहर जा सकोगे।”
दुबले आदमी ने व्यंग्य से मुस्कुराते हुए टायर आयरन को पूरे ज़ोर से घुमाया।
जेडन उसी वार के भीतर घुस गया।
इतनी तेज़ी से।
इतनी कि आँखें उसका पीछा भी न कर सकीं।
उसके बाएँ हाथ ने हमलावर की बाँह का रुख बदल दिया, जबकि दाएँ हाथ ने गले के निचले हिस्से पर एक सटीक और नियंत्रित वार किया।
टायर आयरन उसके हाथ से छूट गया।
ज़मीन पर गिरने से पहले ही जेडन ने उसे ज़ोर से गिरा दिया।
वह दोबारा नहीं उठा।
उधर टॉमी भारी टॉर्च लेकर बगल से झपटा।
जेडन घूम गया।
उसने टॉर्च का हल्का-सा वार अपने कंधे पर झेला, टॉमी की कलाई पकड़ ली और बेहद दक्षता से उसे मोड़ दिया।
टॉमी दर्द से चिल्ला उठा।
अगले ही पल जेडन का घुटना उसके पेट में धँस गया।
फिर हथेली का एक तेज़ प्रहार।
टॉमी वहीं दोहरा होकर ज़मीन पर गिर पड़ा।
उसका काम खत्म हो चुका था।
यह पूरी मुठभेड़ कुछ ही सेकंड चली।
मैं ज़मीन पर पड़ी सब कुछ देखती रही।
मेरी साँस सीने में अटक गई थी।
यह अजनबी लड़ नहीं रहा था।
वह उन्हें एक-एक करके निष्क्रिय कर रहा था।
आख़िरकार डेरेक ने मुझे छोड़ दिया।
वह पीछे लड़खड़ाया और पीला पड़ता हुआ एक मिनीवैन के सहारे जा लगा।
जेडन धीरे-धीरे उसकी ओर मुड़ा।
न गुस्सा।
न डर।
सिर्फ़ बर्फ़ जैसी ठंडी एकाग्रता।
डेरेक के हाथ काँप रहे थे।
“त… तू…” वह हकलाया। “पास मत आना।”
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जेडन ने नपा-तुला एक और कदम आगे बढ़ाया।
निराशा उसकी आँखों में साफ़ दिखाई दे रही थी।
डेरेक ने अपनी कमर के पीछे हाथ डाला और अपनी पैंट में खोंसी हुई एक चीज़ झटके से बाहर निकाली।
धुंधली रोशनी में चोरी की गई ग्लॉक 19 की धातु की स्लाइड सोडियम लाइट की चमक में दमक उठी।
उसने काँपते हाथों से बंदूक सीधे जेडन के सीने पर तान दी।
“मैं तुझे मार डालूँगा!” डेरेक चीखा। उसकी आवाज़ कंक्रीट की दीवारों से टकराकर गूँज उठी।
“तेरे सीने में गोली उतार दूँगा!”
एलिसन ने दर्द से हाँफते हुए अपनी घायल पसलियों पर हाथ रख लिया।
“सावधान! उसके पास बंदूक है!”
जेडन रुक गया।
वह लोड की हुई बंदूक की नली से ठीक छह फ़ुट की दूरी पर बिल्कुल स्थिर खड़ा रहा।
उसकी स्लेटी आँखें ग्लॉक की काँपती हुई नली से उठकर डेरेक की डरी हुई फैली हुई पुतलियों पर टिक गईं।
“सेफ़्टी पहले ही हट चुकी है।
उँगली ट्रिगर पर है।
लेकिन तुम्हारा संतुलन बिगड़ा हुआ है और पकड़ ज़रूरत से ज़्यादा कसी हुई है,” जेडन ने बेहद शांत स्वर में कहा।
“अगर अभी ट्रिगर दबाओगे, तो गोली नीचे और बाईं तरफ़ जाएगी।
और अगर पहली गोली में मैं नहीं मरा…” जेडन ने हल्का-सा सिर टेढ़ा किया।
“तो मैं वादा करता हूँ, दूसरी गोली चलाने का मौका तुम्हें नहीं मिलेगा।”
जमी हुई ठंडी हवा और भी भारी हो गई।
पूरा कंक्रीट का गैरेज मानो लकवाग्रस्त सन्नाटे में डूब गया।
डेरेक सुलिवन काँप रहा था।
उसके पसीने से भीगे हाथों में चोरी की गई ग्लॉक 19 बेकाबू होकर काँप रही थी।
उसकी भारी, घबराई हुई साँसें ठंडी हवा में सफ़ेद भाप के बादल बना रही थीं।
जबकि उससे सिर्फ़ छह फ़ुट दूर खड़ा अनुभवी सैनिक ऐसे साँस ले रहा था मानो अपने ही बिस्तर पर आराम से सो रहा हो।
जेडन चावेज़ ने एक पल के लिए भी नज़रें नहीं हटाईं।
वह जानता था कि जब इंसान का दिमाग़ एड्रेनालिन और डर से भर जाता है, तो उसकी सोचने-समझने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो जाती है।
डेरेक घबरा चुका था।
उसका आदिम मस्तिष्क उसे ट्रिगर दबाने के लिए चीख-चीखकर उकसा रहा था।
लेकिन जेडन द्वारा उसकी मुद्रा का किया गया सटीक विश्लेषण उसके मन में संदेह का एक बीज बो चुका था।
“तुझे लगता है मैं गोली नहीं चलाऊँगा?” डेरेक चीखा।
उसकी आवाज़ टूट रही थी।
अब वह शाम को ट्रॉमा बे 4 में घुसने वाला निर्दयी हमलावर नहीं, बल्कि डरा हुआ बच्चा लग रहा था।
“मेरे पास खोने के लिए कुछ नहीं है।”
“हर किसी के पास खोने के लिए कुछ न कुछ होता है,” जेडन ने जवाब दिया।
उसकी आवाज़ सम्मोहित करने वाली थी।
धीमी।
मुलायम।
जानबूझकर इतनी धीमी कि डेरेक को ध्यान लगाकर सुनना पड़े।
यह पूछताछ और तनाव कम करने की एक पारंपरिक रणनीति थी।
“इस समय तुम्हारे ऊपर हमला और मारपीट का मामला बनता है।
अगर तुम ट्रिगर दबा देते हो, तो तुम ऐसी सीमा पार करोगे जहाँ से कभी लौट नहीं पाओगे।
तुम एक हत्यारे बन जाओगे।
और अपनी बाकी पूरी ज़िंदगी कंक्रीट की एक कोठरी में, बासी हवा में साँस लेते हुए, ऐसे लोगों के बीच बिताओगे जो तुमसे कहीं ज़्यादा ख़तरनाक हैं।”
जेडन ने आधा कदम आगे बढ़ाया।
यह इतना छोटा था कि उसका अगला पैर तेल लगे डामर पर बस कुछ इंच ही सरका।
उसके हाथ अब भी खुले हुए थे।
हथेलियाँ ऊपर की ओर थीं।
मानो वह शांति का संकेत दे रहा हो।
लेकिन उसका शरीर पूरी तरह संतुलित था।
एक खिंचे हुए स्प्रिंग की तरह।
“हिलना मत!” डेरेक चीखा और बंदूक पर अपनी पकड़ और कस ली।
ट्रिगर का शुरुआती दबाव लेते हुए धातु की हल्की-सी क्लिक पूरे गैरेज में गूँज उठी।
एलिसन प्रेस्कॉट ज़मीन पर पड़ी हुई अपनी घायल पसलियों को हाथ से थामे सब देख रही थी।
उसका चिकित्सकीय प्रशिक्षण अपने आप सक्रिय हो गया।
वह बंदूक पकड़े आदमी की शारीरिक स्थिति का विश्लेषण कर रही थी।
डेरेक की पुतलियाँ पूरी तरह फैल चुकी थीं।
उसके हाथ इतने बुरी तरह काँप रहे थे कि पिस्तौल की नली हवा में अनियमित आठ का आकार बना रही थी।
वह बस एक क्षण दूर था, जब घबराहट में अनजाने में गोली चल सकती थी।
उसने उस अजनबी को पीछे हटने के लिए चेतावनी देने के लिए मुँह खोला।
लेकिन शब्द निकलने से पहले ही आमना-सामना टूट गया।
यह सब दो धड़कनों के बीच की दूरी में हुआ।
डेरेक ने पलक झपकी।
पसीने की एक बूँद उसकी दाहिनी आँख में जा गिरी।
बस उसी पल उसका ध्यान बँट गया।
जेडन बिजली की तरह हरकत में आ गया।
वह पीछे नहीं हटा।
वह सीधा आगे झपटा।
और गोली की सीध से एकदम साफ़ हट गया।
जैसे ही डेरेक के दिमाग़ ने यह हरकत समझी, उसकी उँगली झटके से ट्रिगर पर दब गई।
एक बहरे कर देने वाली धमाकेदार आवाज़ ने पार्किंग गैरेज का सन्नाटा चकनाचूर कर दिया।
9 मिमी की गोली चल चुकी थी।
मज़ल फ्लैश ने नारंगी रोशनी की चमक से पूरे अँधेरे को एक पल के लिए जगमगा दिया।
गोली उस कंक्रीट के खंभे में जा लगी जहाँ एक मिलीसेकंड पहले जेडन खड़ा था।
टूटा हुआ सीमेंट चारों ओर बिखर गया।
डेरेक दोबारा निशाना साध पाता, उससे पहले ही जेडन उसके बिल्कुल पास पहुँच चुका था।
जेडन का बायाँ हाथ साँप की तरह लपका और उसने ग्लॉक की स्लाइड को मज़बूती से जकड़ लिया।
उसने इतनी ज़ोर से पकड़ बनाई कि बंदूक ऊपर की ओर मुड़ गई और उसकी नली सीधे कंक्रीट की छत की ओर हो गई।
स्लाइड पर पड़े उस अत्यधिक दबाव ने बंदूक को तुरंत बैटरी से थोड़ा बाहर कर दिया, जिससे वह यांत्रिक रूप से दूसरी गोली चलाने में असमर्थ हो गई।
उसी क्षण जेडन का दायाँ अग्रबाहु पूरी ताकत से डेरेक की कोहनी के अंदरूनी हिस्से से टकराया।
उसका जोड़ अपनी सामान्य सीमा से आगे मुड़ गया और उसका पूरा संतुलन टूट गया।
डेरेक दर्द से चीख उठा।
उसकी पिस्तौल पर पकड़ पूरी तरह छूट गई।
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