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क्रिसमस की पूर्व संध्या की सुबह, सात साल की ग्रेस काँपते हाथों में एक पर्ची लेकर अपनी माँ के पास आई और उन्हें जगाया। उस पर्ची पर लिखा था: “हम हवाई जा रहे हैं। कृपया हमारे लौटने तक यह घर छोड़ देना।”

भाग 2:

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मैंने अपनी दोस्त लॉरेन को फ़ोन किया।

“मुझे क्रिसमस बचाने में मदद चाहिए।”

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उसने पूरी कहानी जानने की कोशिश नहीं की।

“ग्रेस को लेकर आ जाओ,” उसने कहा। “एमा उसे देखकर खुशी से पागल हो जाएगी।”

दोपहर होने से पहले ही ग्रेस लॉरेन के घर के सोफ़े पर बैठी थी। उसके हाथ में गरम चॉकलेट थी, सिर पर सांता की टोपी थी, और उसके साथ एक ऐसी दोस्त थी जिसने उसे ऐसा महसूस कराया जैसे वह सचमुच वहीं की हो।

उस दिन पहली बार वह हँसी।

दिल से हँसी।

क्रिसमस के बाद मैंने बिना देर किए कदम उठाए।

मुझे तुरंत रहने के लिए एक साधारण दो बेडरूम वाला अपार्टमेंट मिल गया।

मैंने अपनी स्थिर आय का प्रमाण दिया।

आवेदन किया।

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और कुछ ही दिनों में चाबियाँ मेरे हाथ में थीं।

फिर मैं अपने माता-पिता के घर से वह सब कुछ ले आई जिसके पैसे मैंने दिए थे।

सोफ़ा।

कुर्सी।

कॉफ़ी टेबल।

वह सारा फर्नीचर जिसे उन्होंने चुना था, पसंद किया था, सबके सामने उसकी तारीफ़ की थी, और उसी दौरान मेरे वहाँ रहने को “आरामदायक मुफ़्त व्यवस्था” कहकर छोटा बताया था।

ग्रेस हमारे नए ड्रॉइंग रूम में आई और चारों ओर देखने लगी।

“क्या यह सब हमारा है?”

“हाँ,” मैंने कहा।

वह ऐसे मुस्कुराई जैसे उसे पहली बार सचमुच यक़ीन हो गया हो।

जब मेरे माता-पिता हवाई से लौटे, तो मेरी माँ का फ़ोन आया।

“तुमने हमारे ड्रॉइंग रूम का क्या हाल कर दिया?”

“मैं अपना फर्नीचर ले आई।”

“तुमने चोरी की है।”

“पुलिस को बुला लो,” मैंने कहा। “मैं खरीदारी की सारी रसीदें भेज दूँगी।”

फिर उसकी आवाज़ बदल गई।

गुस्से में छिपी हुई चिंता।

“तुमने बेला के विश्वविद्यालय वाले खाते के साथ क्या किया?”

“अब पोर्टल पर मेरा कार्ड जुड़ा हुआ नहीं है।”

“तुम अपनी बहन को सज़ा नहीं दे सकती।”

“मैं उसे सज़ा नहीं दे रही। मैं सिर्फ़ उसकी पढ़ाई का खर्च अब नहीं उठा रही।”

फिर असली घबराहट शुरू हुई।

बेला की अगली शिक्षा ऋण की किश्त जारी होने के लिए कुछ दस्तावेज़ पूरे करने थे।

एक सह-हस्ताक्षरकर्ता चाहिए था।

मैं।

“बस हस्ताक्षर कर दो,” मेरी माँ ने कहा।

“नहीं।”

फिर बेला का फ़ोन आया।

वह गुस्से से भर चुकी थी।

“अब मैं क्या करूँ?”

मैंने उसे वही जवाब दिया जो उसने कभी मुझे दिया था।

“एक ज़िम्मेदार वयस्क बनो। ख़ुद कोई रास्ता निकालो।”

Disclaimer : This content may be created by AI for entertainment purposes. Any resemblance to real persons, events, or places is coincidental.