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“क्योंकि उसने तुम पर सेब फेंका था।”

भाग 2

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आइवी बिना किसी दिखावे के सोफ़ी और लड़कों के बीच आकर खड़ी हो गई।

“मैं और सोफ़ी ऊपर जाकर अपना सामान खोलेंगे। तुम लोग हमें जगह दोगे।”

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“डैड ने तो ऐसा नहीं कहा।”

“मैं कह रही हूँ।”

सैम ने उसे घूरकर देखा।

आइवी ने भी उतनी ही दृढ़ता से उसकी आँखों में देखा।

“अगर मुझे पता चला कि तुममें से किसी ने भी जानबूझकर उसे डराने की कोशिश की, तो उसके परिणाम होंगे। समझ गए?”

ज़िंदगी में पहली बार सैम ने बहस नहीं की।

ऊपर जाकर आइवी और सोफ़ी ने वह कमरा देखा जिसे मिसेज़ रेयेस ने उनके लिए तैयार किया था।

दो बिस्तर।

नई चादरें।

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उनका अपना अलग बाथरूम।

ड्रेसर पर पीले फूलों का एक गुलदस्ता।

सोफ़ी बिस्तर पर बैठी और आखिरकार रो पड़ी।

“वे बहुत बुरे हैं।”

आइवी उसके पास बैठ गई।

“वे डरे हुए हैं।”

“उनकी माँ मर चुकी है। उनके पिता अब नरम होना नहीं जानते। और अब दो अजनबी उनके घर में आकर रहने लगे हैं।”

“मैं भी उनके साथ बुरा व्यवहार करूँगी।”

“शायद,” आइवी ने कहा। “लेकिन तुम्हारे पास उसकी वजह होगी।”

एक घंटे बाद, जब वे अपने कपड़े, सोफ़ी की किताबें और पार्क से इकट्ठा किए हुए उसके चिकने पत्थरों का संग्रह खोल चुकी थीं, तभी दरवाज़े पर हल्की-सी दस्तक हुई।

आइवी ने दरवाज़ा खोला।

बाहर हैंक खड़ा था।

उसके हाथ में एक किताब थी।

वह सैम से छोटा था, ओवेन से ज़्यादा शांत और वॉल्ट से भी ज़्यादा घबराया हुआ।

उसके हाथ बहुत सावधानी से हिल रहे थे, जैसे उसे डर हो कि अगर उसने दुनिया को ज़ोर से छू लिया तो वह टूट जाएगी।

उसने सोफ़ी की ओर देखकर कहा,

“सुना है तुम सात साल की हो गई हो।”

“यह किताब सात साल के बच्चों के लिए बहुत अच्छी है।”

“इसमें तस्वीरें भी हैं… और असली शब्द भी।”

“बच्चों वाली भाषा नहीं।”

सोफ़ी ने किताब की ओर देखा।

उसके कवर पर एक ड्रैगन बना था।

हैंक फिर बोला,

“लाइब्रेरी में पढ़ने का एक कोना है।”

“तीसरी मंज़िल पर।”

“खिड़की के पास वाली कुर्सी।”

“वहाँ कोई तुम्हें परेशान नहीं करेगा।”

“जब सैम और ओवेन बहुत शोर करते हैं, तो मैं वहीं चला जाता हूँ।”

वह कुछ पल रुका।

“हमेशा से ऐसा ही करता आया हूँ।”

सोफ़ी के चेहरे पर एक हल्की-सी मुस्कान आ गई।

हैंक ने किताब बिस्तर पर रख दी और चुपचाप चला गया।

आइवी ने देखा कि सोफ़ी उसे कितनी देर तक देखती रही।

“माँ…”

“हाँ, बेटा?”

“शायद… यहाँ सब कुछ इतना बुरा नहीं होगा।”

आइवी मुस्कुरा दी।

“शायद नहीं।”

उस रात, जब सोफ़ी आखिरकार सो गई, आइवी नीचे चाय बनाने चली गई।

आधी रात के समय यह हवेली बिल्कुल अलग लगती थी।

न कोई अफ़रा-तफ़री।

न कोई चिल्लाहट।

बस लंबी परछाइयाँ।

चमकते हुए लकड़ी के फ़र्श।

और ऐसी ख़ामोशी, मानो वह भी सब कुछ सुन रही हो।

रसोई में आइवी ने केतली में पानी भरा और अनजाने में धीरे-धीरे गुनगुनाने लगी।

एक पुरानी इतालवी लोरी।

जो उसकी नानी ने उसकी माँ को सुनाई थी।

उसकी माँ ने उसे सुनाई थी।

और आइवी ने सोफ़ी को हर उस किराए के घर, हर आश्रय और हर उधार के बिस्तर पर सुनाई थी जहाँ वे कभी रही थीं।

“स्टेला… स्टेल्लीना…”

“रुको।”

आइवी चौंककर मुड़ी।

लियो दरवाज़े पर खड़ा था।

उसकी कमीज़ की बाँहें कोहनियों तक मुड़ी हुई थीं।

उसका चेहरा अपने सामान्य संयम के नीचे असामान्य रूप से फीका पड़ गया था।

“तुम्हें यह लोरी कैसे पता है?”

आइवी का दिल ज़ोर से धड़कने लगा।

“मेरी नानी ने मुझे सिखाई थी।”

“यह एलेना की लोरी थी।”

एलेना।

उसकी दिवंगत पत्नी।

“वह हर रात लड़कों को यही लोरी सुनाती थी,” लियो ने धीमी आवाज़ में कहा।

“हर रात… जब तक…”

वह आगे नहीं बोल पाया।

आइवी सब समझ गई।

“मुझे माफ़ कीजिए। मुझे नहीं पता था।”

लियो की आँखें फिर सख़्त हो गईं।

“क्या मिसेज़ रेयेस ने तुम्हें बताया था?”

“क्या किसी ने तुम्हें मेरी पत्नी की आदतों के बारे में इसलिए बताया ताकि तुम मेरे बेटों को… या मुझे… अपने वश में कर सको?”

“नहीं।”

“तो फिर तुमने यह कहाँ सीखी?”

“मेरी नॉनना इसे लैंकेस्टर में गाती थीं।”

“उनकी माँ इसे पालेर्मो में गाती थीं।”

“यह बहुत पुरानी इतालवी लोरी है, मिस्टर ब्रेनन।”

“मैं इसे अपनी बेटी को तब गाती हूँ जब उसे नींद नहीं आती।”

“बस इतनी-सी बात है।”

लियो एक बार हँसा।

लेकिन उस हँसी में कोई खुशी नहीं थी।

“तुम मेरे घर में आई… और मेरी मरी हुई पत्नी की लोरी गाने लगी।”

आइवी ने पहली बार पूरी दृढ़ता से उसकी आँखों में देखा।

“मैं अपनी बेटी के लिए गा रही थी।”

“अपने कमरे में।”

“मुझे नहीं पता था कि कोई मुझे सुन लेगा।”

“और मुझे नहीं पता था कि इससे आपको तकलीफ़ होगी।”

“लेकिन अपनी बेटी को सांत्वना देने के लिए मैं माफ़ी नहीं माँगूँगी।”

उसी समय केतली सीटी बजाने लगी।

दोनों में से कोई नहीं हिला।

आख़िरकार लियो ने नज़रें फेर लीं।

“तुम्हारी आवाज़… उसकी जैसी है।”

उसका गुस्सा गायब हो चुका था।

अब सिर्फ़ दर्द बचा था।

आइवी ने चूल्हा बंद किया।

दो कप चाय बनाई।

एक कप लाकर उसके सामने रख दिया।

“मैं उसकी जगह लेने की कोशिश नहीं कर रही।”

“मैं ऐसा कभी नहीं कर सकती।”

लियो कुछ देर तक चाय के कप को देखता रहा।

फिर धीरे-धीरे कुर्सी पर बैठ गया।

“तीन साल…”

उसने धीमे से कहा।

“तीन साल हो गए… लेकिन आज भी मुझे लगता है कि वह गलियारे में चल रही है।”

“आज भी मैं सुबह उठकर सोचता हूँ कि वह नहा रही होगी।”

“कई बार मैं उसके लिए कॉफ़ी का कप निकाल देता हूँ… फिर याद आता है कि वह अब नहीं है।”

आइवी उसके सामने बैठ गई।

“जब वह मरी… लड़के बहुत छोटे थे।”

उसने आगे कहा।

“एक शराबी ड्राइवर ने शहर के बीचोंबीच लाल बत्ती तोड़ दी।”

“मैं अस्पताल पहुँचने से पहले ही एलेना जा चुकी थी।”

“मुझे बहुत दुख है।”

“उन्हें उसकी याद भी मुश्किल से है।”

उसकी आवाज़ भर्रा गई।

“हैंक को उसकी बनाई कुकीज़ याद हैं।”

“वॉल्ट को उसकी लोरी।”

“सैम को सिर्फ़ इतना याद है कि उससे वनीला की ख़ुशबू आती थी।”

“ओवेन कहता है कि उसे कुछ याद नहीं… लेकिन आज भी वह उसका स्कार्फ़ तकिए के नीचे रखकर सोता है।”

आइवी का गला भर आया।

लियो ने पहली बार स्वीकार किया—

“मुझे नहीं पता कि मैं उनका पिता कैसे बनूँ।”

“मुझे एक साम्राज्य चलाना आता है।”

“दुश्मनों को सज़ा देना आता है।”

“डर और पैसे से लोगों को वफ़ादार बनाए रखना आता है।”

“लेकिन मुझे यह नहीं आता कि मैं चार छोटे लड़कों को कैसे यक़ीन दिलाऊँ कि वे सुरक्षित हैं… जबकि उनकी ज़िंदगी का सबसे सुरक्षित इंसान उनसे छिन गया।”

आइवी ने धीरे से कहा,

“आपने कर्मचारियों को रखा… देखभाल करने वाले लोगों को नहीं।”

लियो ने उसकी ओर देखा।

“और तुम्हें लगता है कि तुम उनकी देखभाल कर सकती हो?”

“मुझे लगता है… मैं पहले से कर रही हूँ।”

“सोफ़ी जैसी नहीं।”

“लेकिन इतना ज़रूर कि मैं उनका दर्द देख सकूँ।”

“इतना कि जब वे मुश्किल बनें, तब भी उनके साथ रह सकूँ।”

लियो बहुत देर तक चुप बैठा रहा।

फिर बोला—

“मुझे वह लोरी सिखाओ।”

आइवी ने हैरानी से पूछा,

“क्या?”

“पूरी।”

“मैं भी उन्हें उसी तरह सुनाना चाहता हूँ… जैसे एलेना सुनाती थी।”

शहर का सबसे ख़तरनाक आदमी आधी रात के अँधेरे में अपनी रसोई में बैठा था…

और एक अकेली, आर्थिक रूप से संघर्ष कर रही माँ से लोरी सीखने की विनती कर रहा था।

आइवी का दिल पिघल गया।

“आज रात नहीं।”

उसने धीरे से कहा।

“आज रात… आप सिर्फ़ सुनिए।”

फिर उसने पूरी लोरी गाई।

हर अंतरा।

हर शब्द।

लियो अपनी बिना छुई चाय को देखता रहा।

जब लोरी समाप्त हुई…

उसकी आँखें आँसुओं से भीग चुकी थीं।

“धन्यवाद।”

उसने फुसफुसाकर कहा।

“जब भी ज़रूरत हो।”

आइवी ने जवाब दिया।

और इस बार…

वह सचमुच दिल से कह रही थी।

अगले दो हफ़्तों में घर बदलने लगा।

पूरी तरह नहीं।

कोई चमत्कार नहीं हुआ।

सैम अब भी हर नियम को ऐसे परखता था जैसे वह कोई ताला हो जिसे खोला जा सकता है।

ओवेन अब भी खिलौने अलमारी में छिपा देता था और एक बार उसने लियो के ड्रेस शूज़ में पैनकेक का आटा भर दिया।

हैंक अब भी ज़रूरत से ज़्यादा चिंता करता था।

वॉल्ट अब भी बोलने से ज़्यादा देखता था।

लेकिन अब लड़के साथ बैठकर खाना खाते थे।

हाथ धोते थे।

सोफ़ी को लाइब्रेरी वाले कोने में शांति से रहने देते थे।

और कभी-कभी…

जब उन्हें लगता कि कोई उन्हें नहीं देख रहा…

वे आइवी से सवाल पूछते।

“क्या हमारी माँ को बारिश पसंद थी?”

“क्या डैड हमेशा से इतने गंभीर थे?”

“क्या स्वर्ग में लोग लोरियाँ सुन सकते हैं?”

आइवी जितना जानती थी, उतना जवाब देती।

लियो भी अब पहले से जल्दी घर आने लगा।

कई बार वह रात के खाने के समय दरवाज़े पर खड़ा होकर मोबाइल देखने का नाटक करता…

जबकि असल में वह अपने बेटों को हँसते हुए देख रहा होता।

कई बार आइवी ने उसे सोफ़ी की चोटी बनाने की कोशिश करते हुए पकड़ा…

क्योंकि सोफ़ी ने उससे पूछा था—

“क्या आपको चोटी बनानी आती है?”

उसे नहीं आती थी।

उसका बनाया हुआ जूड़ा तूफ़ान में उलझी रस्सी जैसा लगता था।

लेकिन सोफ़ी को वह बहुत पसंद आया।

फिर विक्टर क्रॉस ने सवाल पूछने शुरू किए।

वह हर मंगलवार और गुरुवार सुबह ठीक नौ बजे आता था।

एक अंग्रेज़ शिक्षक।

पुराना चमड़े का बैग।

सफ़ेद होते बाल।

और बेहद शांत मुस्कान।

वह एलेना की मृत्यु से पहले से ही लड़कों को पढ़ाता आ रहा था।

चारों लड़के उस पर पूरा भरोसा करते थे।

और यही बात आइवी को सबसे ज़्यादा परेशान कर रही थी।

Disclaimer : This content may be created by AI for entertainment purposes. Any resemblance to real persons, events, or places is coincidental.