
भाग 2
अगले दिन एस्तेबान लूगो सांता फ़े स्थित मोंटिएल सलूद डिजिटल के दफ़्तर पहुँचा। उसने धूसर रंग का ब्लेज़र, साफ़ बूट पहन रखे थे और उसके चेहरे पर उस इंसान का सुकून था, जिसे किसी के सामने कोई सफ़ाई नहीं देनी थी।
सैंटियागो ने उसे एक कॉन्फ़्रेंस रूम में बैठाया, जहाँ से पूरा शहर दिखाई देता था।
करीब चालीस मिनट तक दोनों ने अनुबंधों, फ़ाइलों, अस्पतालों के लिए प्रचार अभियानों और इमेज लाइसेंसों पर चर्चा की।
सैंटियागो की पलकें तक मुश्किल से झपकीं।
एस्तेबान ज़रा भी घबराया हुआ नहीं लग रहा था।
वह नज़रें नहीं चुरा रहा था।
उसके चेहरे पर वह अपराधबोध नहीं था, जिसकी कल्पना सैंटियागो पिछले पाँच वर्षों से करता आया था।
जब वकील कॉफ़ी लेने बाहर गए, तो एस्तेबान ने एक ऐसा वाक्य कहा जिसने कमरे की हवा तक बदल दी।
“अजीब लग रहा है यहाँ होना। मेरी चचेरी बहन की शादी तुमसे हुई थी, है न? कैमिला रूइज़… या उस समय कैमिला मोंटिएल।”
सैंटियागो के चेहरे का रंग उड़ गया।
“तुम्हारी… चचेरी बहन?”
एस्तेबान ने भौंहें सिकोड़ लीं।
“हाँ। मेरी माँ की तरफ़ से। क्या उसने कभी मेरा ज़िक्र नहीं किया?”
सैंटियागो ने कोई जवाब नहीं दिया।
एस्तेबान बोलता रहा, बिना यह जाने कि उसका हर शब्द हथौड़े की तरह गिर रहा था।
“एक बार हम रोमा वाले रेस्तराँ में साथ खाना खा रहे थे। वह गर्भवती थी। मेरी माँ का कैंसर फिर से लौट आया था, यह सुनाकर मैंने उसे बताया तो वह रो पड़ी। बेचारी हर बात पर मुझसे माफ़ी माँग रही थी। उसी समय मार्कोस भी वहाँ से गुज़रा था।”
सैंटियागो ने सिर उठाया।
“मार्कोस?”
“हाँ, तुम्हारा भाई। उसने हमारी मेज़ पर आकर नमस्ते की थी। कैमिला ने मेरा परिचय अपने चचेरे भाई के रूप में कराया था। मैंने खुद उसे बताया था कि मैं मॉन्टेरे से आया हूँ।”
कमरे में ऐसा सन्नाटा छा गया कि साँस लेना भी मुश्किल हो गया।
अचानक एस्तेबान सब समझ गया।
“नहीं यार… क्या उसने उसी बात का इस्तेमाल उसके ख़िलाफ़ किया?”
वकीलों के लौटने से पहले ही सैंटियागो खड़ा हो गया।
उसने किसी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर नहीं किए।
कुछ समझाया भी नहीं।
वह सीधे मार्कोस के दफ़्तर की ओर चला गया।
मार्कोस वीडियो कॉल पर था।
हमेशा की तरह मुस्कुरा रहा था।
हाथ में महँगी कॉफ़ी का कप था।
जैसे ही उसने सैंटियागो का चेहरा देखा, उसने लैपटॉप बंद कर दिया।
“क्या हुआ, भैया?”
सैंटियागो ने दरवाज़ा बंद कर दिया।
“एस्तेबान लूगो।”
मार्कोस एक पल के लिए बिल्कुल स्थिर रह गया।
बस एक सेकंड।
लेकिन वही काफ़ी था।
“तुमने कहा था कि तुम उसे नहीं जानते।”
“तुम क्या कह रहे हो?”
“तुम उससे रेस्तराँ में मिले थे। कैमिला ने उसका परिचय अपने चचेरे भाई के रूप में कराया था। उसने खुद तुम्हें बताया था।”
मार्कोस हल्का-सा हँसा।
बिना किसी खुशी के।
“अब तुम अपने भाई से ज़्यादा एक अजनबी पर भरोसा करोगे?”
सैंटियागो उसके करीब आ गया।
पाँच साल पहले यही सवाल उसे रोक देता।
लेकिन आज नहीं।
“मैं सच पर भरोसा करूँगा।”
मार्कोस का चेहरा बदल गया।
प्यारे और मज़ाकिया भाई का मुखौटा टूट गया।
उसके नीचे एक ऐसा आदमी था, जो जीवन भर अपने बड़े भाई की परछाई बनकर जीते-जीते जल चुका था।
“सब कुछ तुम्हें ही मिलना था!” उसने ज़हर उगलते हुए कहा। “कंपनी, घर, आदर्श पत्नी, बच्चा… यहाँ तक कि माँ का सारा प्यार भी। और मेरे हिस्से क्या आया? बस वह छोटा भाई, जो परिवार की तस्वीरों में हँसता हुआ दिखाई देता है?”
सैंटियागो को मतली आने लगी।
“तुमने सिर्फ़ जलन की वजह से मेरा घर बर्बाद कर दिया।”
मार्कोस ने ठंडी आवाज़ में जवाब दिया,
“मैंने तुम्हें घर छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया था। मैंने सिर्फ़ तुम्हें तस्वीरें दिखाईं। फैसला तुमने किया कि उसकी बात नहीं सुनोगे। फैसला तुमने किया कि किसी को फ़ोन नहीं करोगे। फैसला तुमने किया कि अपनी गर्भवती पत्नी को छोड़ दोगे।”
सैंटियागो का मन हुआ कि वह उसे ज़ोरदार मुक्का मारे।
लेकिन वह ऐसा नहीं कर सका।
क्योंकि उस सारे ज़हर के बीच मार्कोस ने एक बात सच कही थी।
झूठ मार्कोस का था।
लेकिन कायरता…
सैंटियागो की थी।
“आज से तुम कंपनी से बाहर हो,” सैंटियागो ने कहा।
मार्कोस गुस्से से मुस्कुराया।
“अगर तुमने मुझे निकाला, तो सबको पता चल जाएगा कि महान सैंटियागो मोंटिएल ने सिर्फ़ अफ़वाहों पर भरोसा करके अपनी गर्भवती पत्नी को छोड़ दिया था।”
“हाँ,” सैंटियागो ने शांत स्वर में कहा, “सबको पता चल जाएगा।”
और पहली बार…
मार्कोस डर गया।
उसी दोपहर सैंटियागो ने निदेशक मंडल, कानूनी विभाग और एक बाहरी ऑडिटर की बैठक बुलाई।
उसने सब कुछ बता दिया।
वह सुविधाजनक कहानी नहीं।
वह कहानी नहीं जिसमें वह खुद निर्दोष पीड़ित था।
बल्कि पूरा सच।
कंपनी के संसाधनों से फ़ोटोग्राफ़र रखना।
परिवार द्वारा की गई साज़िश।
तलाक़।
और अपनी खुद की चुप्पी और कायरता।
सोमवार को मार्कोस को निलंबित कर दिया गया।
मंगलवार को उसने इस्तीफ़ा दे दिया।
बुधवार तक व्यापारिक मीडिया इस मामले की पड़ताल करने लगी।
सैंटियागो ने सिर्फ़ इतना बयान जारी किया कि कंपनी के संसाधनों का दुरुपयोग हुआ था और आंतरिक जाँच चल रही है।
उसने कैमिला का नाम तक नहीं लिया।
उसके दर्द को अपनी ढाल नहीं बनाया।
लेकिन उसी रात उसने “रूइज़ डिज़ाइन” की वेबसाइट खोली।
वहाँ वह थी।
कैमिला।
सफ़ेद ब्लाउज़ में।
छोटे बाल।
चेहरे पर शांत मुस्कान।
ऐसी मुस्कान, जिसे देखने का अधिकार वह खो चुका था।
उसके पास सोफिया खड़ी थी।
हाथ में रंगों का डिब्बा लिए।
पाँच साल की।
सैंटियागो जैसी आँखें।
और कैमिला जैसी अडिग ठुड्डी।
वह बेटी…
जो उसके बिना बड़ी हुई थी।
सैंटियागो ने फ़ोन करने की हिम्मत नहीं की।
उसने वेबसाइट के संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से एक संदेश भेजा।
“अब मुझे सच पता चल गया है। मुझे पता है कि एस्तेबान तुम्हारा चचेरा भाई था। मुझे पता है कि मार्कोस ने झूठ बोला था… और मुझे यह भी पता है कि उस झूठ पर विश्वास करने का चुनाव मैंने खुद किया था। ऐसी कोई माफ़ी नहीं है जो काफ़ी हो सके, लेकिन मैं तुम्हारी आँखों में देखकर माफ़ी माँगना चाहता हूँ। अगर तुम मना कर दो, तो मैं तुम्हारे फैसले का सम्मान करूँगा।”
अगले ही दिन जवाब आ गया।
“शनिवार, सुबह 10:00 बजे। कैफ़े ला बिज़नागा, केरेटारो। मेरे घर मत आना।”
कैमिला समय पर पहुँची।
उसने बेज रंग का ब्लेज़र, गहरे नीले रंग की जीन्स और नीला स्कार्फ़ पहन रखा था।
वह बदल चुकी थी।
ज़्यादा मज़बूत।
ऐसी औरत, जिसने अपनी कोमलता की रक्षा करना सीख लिया था।
सैंटियागो खड़ा हो गया।
“कैमिला…”
“सैंटियागो।”
न कोई आलिंगन हुआ।
न कोई पुरानी याद।
बस एक मेज़…
और उसके दोनों ओर बैठे दो लोग, जिन्होंने कभी साथ पूरी ज़िंदगी बिताने का सपना देखा था।
“जो कहना है, कहो,” कैमिला ने शांत स्वर में कहा।
सैंटियागो ने गहरी साँस ली।
“मैं एस्तेबान से मिला। उसने बताया कि मार्कोस जानता था वह कौन है। और यह भी कि तुमने शुरू से मुझे सच बताया था।”
“हाँ।”
उसके एक शब्द में न आश्चर्य था, न गुस्सा।
“क्या तुम्हें पहले से पता था?”
“मुझे शक था। मार्कोस हमेशा तुम्हारे लिए सबसे महत्वपूर्ण बनना चाहता था। लेकिन सबसे बड़ा दोषी कभी मार्कोस नहीं था।”
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