
भाग 2:
“उसने क्या किया?” — आंद्रेस ने पूछा, लेकिन पहली बार उसकी आवाज़ में वह बनावटी शालीनता नहीं थी।
वह अब कच्चे गुस्से से भरी आवाज़ थी।
दोना रेबेका एक कदम आगे बढ़ीं, मानो उनके मोती का हार आने वाले तूफ़ान को रोक सकता हो।
“इसाबेल, मैं तुम्हें चेतावनी देती हूँ, मेरा बेटा कोई साधारण डॉक्टर नहीं है। यह पूरा अस्पताल उसी की वजह से खड़ा है।”
मैं धीरे-धीरे खड़ी हो गई।
“नहीं, रेबेका।
यह अस्पताल इसलिए खड़ा है क्योंकि मेरे परिवार ने इसकी नींव के लिए पैसा दिया था।
उपकरणों के लिए।
लाइसेंसों के लिए।
यहाँ तक कि उन स्वागत के फूलों के लिए भी, जिन पर तुम हर समारोह में गर्व करती फिरती हो।”
आंद्रेस व्यंग्य से हँस पड़ा।
“कृपया।
तुमने सिर्फ़ कुछ पैसे दान किए थे।
इससे तुम्हें यहाँ आकर तमाशा करने का अधिकार नहीं मिल जाता।”
“पैसा नहीं…” मैंने कहा।
“दृष्टि।
जो तुम्हारे पास कभी थी ही नहीं।”
वह शब्द सीधे उसके भीतर जा लगा।
तकनीशियन मारिसोल दीवार से लगकर खड़ी रह गई।
वैलेरिया ने मेरा हाथ इतनी ज़ोर से पकड़ लिया कि उसके नाखून मेरी त्वचा में धँस गए।
“माँ…”
“साँस लो, बेटी।
स्क्रीन की ओर देखो।”
मेरी नातिन का दिल फिर से नियमित रूप से धड़कने लगा।
उसकी धड़कन पूरे कमरे में एक छोटे लेकिन जिद्दी ढोल की तरह गूँज रही थी।
आंद्रेस मंच की ओर एक कदम बढ़ा।
“वैलेरिया।
अपनी माँ से कहो कि यहाँ से चली जाए।
अभी।”
यह अनुरोध नहीं था।
यह आदेश था।
वैलेरिया ने मुँह खोला।
लेकिन उसके होंठों से कोई शब्द नहीं निकला।
आंद्रेस ने वही मीठी मुस्कान ओढ़ ली जो वह टीवी इंटरव्यू में इस्तेमाल करता था।
“जान…
तुम जानती हो कि तनाव तुम्हारे लिए ठीक नहीं है।
इस समय ज़रा-सा तनाव भी ऑपरेशन को जटिल बना सकता है।”
धमकी…
रेशम में लपेटकर दी गई थी।
मैं उसके और ऑपरेशन टेबल के बीच आकर खड़ी हो गई।
“इसे छूने की कोशिश भी मत करना।”
उसकी आँखें बदल गईं।
अब वह डॉक्टर नहीं था।
पति भी नहीं।
सिर्फ़ एक ऐसा आदमी…
जिसे इस बात पर गुस्सा था कि किसी ने उसकी पसंदीदा संपत्ति को उसकी जगह से हटा दिया था।
“दूर हटो।”
“कोशिश करके देखो।”
दोना रेबेका वैलेरिया के पास पहुँचीं।
“बेटी…
इतनी एहसानफ़रामोश मत बनो।
आंद्रेस ने तुम्हें अपना नाम दिया।
घर दिया।
सबसे अच्छे डॉक्टर दिए।
ड्राइवर दिया।
अब तुम्हें और क्या चाहिए?
क्या ऐसा पति चाहिए जो साँस लेने से पहले भी तुमसे अनुमति माँगे?”
वैलेरिया चुपचाप रोने लगी।
उसी क्षण…
मुझे एक बात समझ में आ गई।
रेबेका को सिर्फ़ सब कुछ पता ही नहीं था।
उन्होंने ही अपने बेटे को सिखाया था कि औरतें इंसान नहीं…
संपत्ति होती हैं।
मेरा फ़ोन फिर कंपन करने लगा।
**अनुच्छेद 87 लागू।
बोर्ड ने उसे पद से हटा दिया।
कैमरा सिस्टम बाहरी सर्वर पर स्थानांतरित कर दिया गया।
ऑडियो और वीडियो अब मरीज की सुरक्षा के अंतर्गत सुरक्षित हैं।**
मैंने छत पर लगे कैमरे की ओर देखा।
आंद्रेस ने मेरी नज़र का पीछा किया।
उसके चेहरे से खून उतर गया।
“यह…
गैरकानूनी है…” उसने बुदबुदाया।
“नहीं।
जब यह कमरा उस फ़ाउंडेशन की इकाई का हिस्सा हो, जो मरीजों की सुरक्षा संबंधी प्रोटोकॉल के तहत संचालित होती है।
तीन साल पहले पोलांको में आयोजित डिनर में…
इन दस्तावेज़ों पर तुम्हीं ने हस्ताक्षर किए थे।
याद है?
तुमने कहा था—
‘अनुबंध पढ़ना छोटे लोगों का काम है।'”
दोना रेबेका मुस्कुराना भूल गईं।
आंद्रेस का फ़ोन बज उठा।
फिर दूसरा।
फिर तीसरा।
लगातार।
उसने स्क्रीन देखी।
और अपनी दुनिया को एक-एक करके टूटते देखा।
बैंक।
साझेदार।
वकील।
वित्त निदेशक।
मुख्य सुरक्षा अधिकारी।
“तुमने…
क्या किया?” उसने फिर पूछा।
“वही…
जिसकी किसी माँ से तुमने कभी उम्मीद नहीं की थी कि वह चुपचाप कर सकती है।”
तभी दरवाज़ा खुल गया।
जाँच पुलिस के दो अधिकारी और काले सूट में अभियोजन कार्यालय की एक अधिकारी भीतर आईं।
“डॉ. आंद्रेस रोब्लेस…
आपको तत्काल प्रभाव से मरीज वैलेरिया अरांदा से किसी भी प्रकार के संपर्क से अलग किया जाता है।
हमारे पास आपातकालीन सुरक्षा आदेश है।
साथ ही चिकित्सा और वीडियो साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की न्यायिक अनुमति भी।”
आंद्रेस ने गुस्से में हाथ उठा दिए।
“यह एक निजी अस्पताल है!
मैं इसका महाप्रबंधक हूँ!”
“था।” मैंने शांत स्वर में कहा।
अधिकारी ने पहले मेरी ओर देखा।
फिर बहुत नरम आवाज़ में वैलेरिया से पूछा—
“श्रीमती वैलेरिया…
हम आपकी सुरक्षा के लिए यहाँ हैं।
क्या आप पुष्टि करती हैं कि आप किसी दूसरे अस्पताल में इलाज कराना चाहती हैं?”
वैलेरिया काँप रही थी।
उसने आंद्रेस की ओर देखा।
आंद्रेस ने धीरे-धीरे सिर झुका लिया।
उसके होंठों पर हल्की मुस्कान थी।
मानो वह अब भी सिर्फ़ अपनी आँखों से उसे नियंत्रित कर सकता हो।
“अच्छी तरह सोच लो, जान…” उसने फुसफुसाकर कहा।
“इसके बाद…
वापस लौटने का कोई रास्ता नहीं रहेगा।”
वैलेरिया ने धीरे-धीरे अपना हाथ अपने पेट पर रखा।
एक पल के लिए मुझे लगा…
डर जीत जाएगा।
फिर…
उसने अपना अस्पताल का गाउन थोड़ा-सा उठाया।
इतना कि उसकी पसलियों पर पड़े नीले निशान दिखाई देने लगे।
अभियोजन अधिकारी स्तब्ध रह गईं।
मारिसोल फूट-फूटकर रोने लगी।
“उसने…
मुझे लात मारी थी,” वैलेरिया बोली।
“उसने कहा था…
अगर मैंने किसी को बताया…
तो मेरी बेटी बिना माँ के पैदा होगी।”
आंद्रेस अपना आपा खो बैठा।
“झूठ!
इसका दिमाग़ भर दिया गया है!
यह औरत हमेशा से कमज़ोर रही है!”
अभियोजन अधिकारी ने तुरंत संकेत किया।
पुलिस अधिकारी आगे बढ़ गए।
दोना रेबेका चीख उठीं।
“मेरे बेटे को छूने की हिम्मत मत करना!”
लेकिन उसके बाद जो हुआ…
उसने पूरे कमरे को जड़ कर दिया।
दरवाज़े पर अस्पताल की एक वरिष्ठ नर्स दिखाई दी।
उसके हाथ में नीली फ़ाइल थी।
“मुझे माफ़ कीजिए…” उसकी काँपती आवाज़ निकली।
“लेकिन…
मेरे पास भी सबूत हैं।
और…
सिर्फ़ श्रीमती वैलेरिया के नहीं।”
आंद्रेस ने उसे ऐसे देखा…
मानो उसने कोई भूत देख लिया हो।
नर्स ने फ़ाइल खोली।
पहले पन्ने पर दर्ज थे—
महिलाओं के नाम।
प्रसव की तारीखें।
झूठे दर्ज किए गए चिकित्सीय जटिलताओं के विवरण।
और…
गुप्त भुगतान।
वैलेरिया रोना बंद कर चुकी थी।
उसी क्षण…
मुझे समझ में आ गया—
मेरी बेटी…
उसकी पहली शिकार नहीं थी।
और…
पूरा सच अभी सामने आना बाकी था।
Disclaimer : This content may be created by AI for entertainment purposes. Any resemblance to real persons, events, or places is coincidental.