
भाग 2: मैं वहीं जड़ हो गई।
“आपका क्या मतलब है कि मैं नहीं जाऊँगी?” मैंने पूछा।
लूसिया ने सिर हिलाया।
“मेरी माँ, पालोमा, को थोड़े आराम की ज़रूरत है। और क्योंकि आप पहले ही बहुत यात्राएँ कर चुकी हैं, हमने सोचा कि यही न्यायसंगत होगा।”
हावियर ने हल्की-सी साँस छोड़ी।
“माँ, इसे व्यक्तिगत मत लीजिए। पालोमा एक कठिन दौर से गुज़र रही है।”
मैंने सूटकेस की ओर देखा, फिर अपनी काँपती उँगलियों की ओर, जो कार की चाबी कसकर पकड़े हुए थीं। शर्म, गुस्सा और टूटा हुआ दिल—तीनों एक साथ मुझ पर टूट पड़े। लेकिन मैंने खुद को गहरी साँस लेने के लिए मजबूर किया।
“मैं समझती हूँ,” मैंने कहा।
मैं बिल्कुल भी नहीं समझती थी।
मैंने कोई बहस नहीं की।
मैंने गिड़गिड़ाने से इनकार कर दिया।
मैं धीरे-धीरे मुस्कुरा दी।
“बहुत बढ़िया। आपकी यात्रा शानदार रहे।”
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