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एक महिला वैज्ञानिक को 7 दिन के तूफान में मरने के लिए छोड़ा गया, फिर उसी पर चरित्र का झूठा दाग लगाया गया… लेकिन उसके बचाए गए पौधों और मौसम डेटा ने सबकी बोलती बंद कर दी

भाग 1

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पहाड़ की चोटी पर तूफान ने पहला तंबू ऐसे फाड़ दिया जैसे किसी ने 10 साल की मेहनत को बीच से चीरकर फेंक दिया हो। हिमाचल की उस ऊँची घाटी में बारिश पत्थरों की तरह गिर रही थी, हवा देवदार के पेड़ों को झुका रही थी और मिट्टी हर कदम के नीचे धँस रही थी। आरव मेहरा ने अपने सीने से बंधा मौसम डेटा वाला स्टील केस कसकर पकड़ा और टूटे हुए तंबू के कपड़ों के बीच से बाहर निकला। उसकी सांस ठंडी हवा में धुएँ जैसी दिख रही थी। नीचे जाने वाली कच्ची सड़क पहले ही पानी से भर चुकी थी, और पहाड़ का दबाव इतनी तेजी से गिर रहा था कि उसका हर मॉडल खतरे की चीख मार रहा था।

उसी समय उसे दूसरी तरफ से एक और आवाज सुनाई दी। प्लास्टिक के डिब्बे गिरने की आवाज। डॉ. काव्या सेन अपने तंबू के बाहर खड़ी थी। उसके हाथों में पौधों के नमूनों के 3 मजबूत डिब्बे थे। ये साधारण पौधे नहीं थे। ये हिमालय की ऊँचाई पर उगने वाली दुर्लभ जड़ी-बूटियाँ थीं, जिन पर वह पिछले 10 साल से शोध कर रही थी। अगर उनका तापमान बिगड़ता या वे 48 घंटे से ज्यादा बिना देखभाल रह जाते, तो उसकी पूरी जिंदगी की मेहनत मिट्टी हो जाती।

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उसकी मुसीबत सिर्फ मौसम नहीं था। दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन, डॉ. आरिस मल्होत्रा, महीनों से उसका प्रोजेक्ट बंद करवाना चाहते थे। वह कहता था कि पहाड़ों में जाकर जीवित नमूने बचाना बेवकूफी है, पैसा बर्बाद करना है। असल में वह यह फंड अपने निजी प्रयोगशाला प्रोजेक्ट में लगाना चाहता था। सुबह उसने काव्या को आदेश भेजा था कि वह किसी भी हालत में नीचे चेकपोस्ट पहुँचे। अब वही सड़क मलबे में बदलने वाली थी।

आरव का अपना शोध भी दांव पर था। उसके सेंसर चट्टानों के नीचे लगे थे। अगर वे यह तूफानी दबाव रिकॉर्ड कर लेते, तो उसे राष्ट्रीय मौसम अनुदान मिल सकता था। अगर वह उन्हें छोड़कर चला जाता, तो 3 साल की मेहनत अधूरी रह जाती। पर सेंसर अपने आप रिकॉर्ड कर सकते थे। काव्या के जीवित नमूने ऐसा नहीं कर सकते थे।

आरव की नजर उसके तंबू के उत्तर कोने पर गई। खूंटी कीचड़ से बाहर निकल रही थी। कपड़ा हवा में फूल रहा था।

—काव्या, रस्सी ढीली हो रही है! —उसने चिल्लाकर कहा।

काव्या ने बारिश के पार उसे देखा। उसके चेहरे पर डर नहीं था, सिर्फ जिद थी।

—मिट्टी पकड़ नहीं रही!

आरव की आवाज तूफान में भी साफ आई।

—तो हम मिट्टी पर भरोसा नहीं करेंगे। जड़ और चट्टान पर करेंगे।

वह दौड़कर पहुँचा। उसने अपने बैग से लोहे की खूंटियाँ निकालीं, देवदार की खुली जड़ के चारों तरफ रस्सी लपेटी और तंबू को नीचे की तरफ खींचा। काव्या ने बिना सवाल किए नमूनों को हवा से बचाया। दोनों ने मिलकर तंबू को झुका दिया ताकि हवा उसके ऊपर से फिसल जाए। एक पल के लिए उनके दस्ताने छुए। ठंडा पानी उनके बीच से बह गया। फिर दोनों अलग होकर काम में लग गए।

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जब वे अंदर घुसे, तंबू काँप रहा था पर बच गया था। बाहर आरव का तंबू पूरी तरह खत्म हो चुका था। अंदर गीली मिट्टी, दवाइयों की शीशियों और पाइन की गंध थी। एक छोटा लालटेन छत से झूल रहा था। बीच में कपड़े का पर्दा टंगा था, जिससे पीछे बदलने की छोटी जगह बनी थी।

काव्या ने नमूने रखे, हर लॉक चेक किया और पहली बार आरव की तरफ ठीक से देखा।

—तुम्हारा तंबू गया।

—हाँ।

—नीचे वाली सड़क भी शायद गई।

—कुछ घंटों में पूरी तरह।

काव्या ने बाहर की तरफ देखा। फिर अपने नमूनों की तरफ। उसका निर्णय तेज था, पर हल्का नहीं।

—आज रात तुम यहीं रहोगे।

आरव ने तंबू की छोटी जगह देखी। एक महिला वैज्ञानिक, एक पुरुष मौसम विशेषज्ञ, बाहर जानलेवा तूफान और अंदर 10 साल की रिसर्च। भारतीय समाज में ऐसी बात अगले दिन खबर बन सकती थी, गलत तरीके से। काव्या भी यह जानती थी। इसलिए उसकी आवाज सख्त थी।

—यह एहसान नहीं है। यह जीवित रहने का फैसला है। तुम उस तरफ रहोगे। मैं इस तरफ। पर्दे के पार बिना पूछे कोई नहीं आएगा। कोई मजाक नहीं। कोई गलतफहमी नहीं।

आरव ने सिर हिलाया।

—सीमा साफ है।

काव्या ने गीली जैकेट उतारने से पहले पर्दे की तरफ इशारा किया।

—पीछे मुड़कर मत देखना।

आरव ने अपना चेहरा अपने डेटा केस की तरफ कर लिया।

—देखना होता तो मैं तूफान नहीं, शहर में काम करता।

काव्या ने पहली बार हल्की सांस छोड़ी, जैसे हँसी को रोक लिया हो।

रात तक दोनों ने भोजन को 7 हिस्सों में बांटा, नमूनों का तापमान दर्ज किया और नक्शे पर दूसरा रास्ता खोजा। नीचे की सड़क खतरनाक थी। ऊपर पुराना सर्वे ट्रेल था, जो चट्टानी रिज से होकर एक वन विभाग की पुरानी झोपड़ी तक जाता था। वहाँ रेडियो रिपीटर हो सकता था। अगर वे 5वें या 6वें दिन वहाँ पहुँचे, तो 7वें दिन बचाव संभव था।

रात 12 बजे हवा अचानक उत्तर-पश्चिम से चली। तंबू का एक हिस्सा अंदर धंसने लगा। आरव ने दस्ताने पहने।

काव्या तुरंत उठी।

—मैं भी चलती हूँ।

—नहीं। तुम अंदर रहो। अगर तंबू खिसका तो नमूनों को सूखी तरफ सरकाना।

—तुम्हें बाहर 3 मिनट से ज्यादा नहीं लगने चाहिए।

—5।

—4।

—ठीक है।

आरव बाहर निकला। बारिश उसके चेहरे पर चाबुक की तरह लगी। उसने खूंटी को और गहरा ठोका, दूसरी रस्सी जोड़ी और जड़ के पीछे त्रिकोण बाँधा। जब वह वापस आया, उसका चेहरा ठंड से सख्त था। काव्या ने उसके हिस्से में हीटर के पास सूखा तौलिया रखा था।

—4 मिनट 40 सेकंड —उसने कहा।

आरव ने भीगते हुए जवाब दिया।

—एक पत्थर से बहस हो गई थी।

—पत्थर जीता?

—समझौता हुआ।

काव्या के चेहरे पर पहली असली मुस्कान आई। उसी क्षण रेडियो से टूटती हुई आवाज आई।

—डॉ. सेन… तुरंत नीचे उतरिए… आदेश डीन आरिस का है…

दोनों चुप हो गए। बाहर पहाड़ गरजा। और फिर नीचे कहीं से मिट्टी टूटने की ऐसी आवाज आई कि तंबू का फर्श कांप उठा।

भाग 2

सुबह 6:12 पर पहाड़ सचमुच खिसक गया। दोनों तंबू से बाहर निकले तो नीचे की सड़क भूरे पानी, पत्थरों और उखड़े पेड़ों की नदी बन चुकी थी। जिस रास्ते पर डॉ. आरिस ने काव्या को उतरने का आदेश दिया था, वह 30 सेकंड में गायब हो गया। रेडियो अचानक चीखा।

—डॉ. सेन, आपने चेकपोस्ट आदेश तोड़ा है। मैं आपकी फील्ड टीम को लापरवाह घोषित कर रहा हूँ।

काव्या ने रेडियो को इतना जोर से पकड़ा कि उसका दस्ताना चरमराया।

—सड़क बह चुकी है। आपका आदेश हमें मौत में भेजता।

आरिस की आवाज ठंडी रही।

—आपको कल उतरना था। अब आपकी फंडिंग रोक दी जाएगी।

आरव ने हाथ बढ़ाया।

—रेडियो दीजिए।

काव्या ने उसे देखा, फिर रेडियो दे दिया।

—डॉ. आरिस, मैं आरव मेहरा, स्वतंत्र मौसम विशेषज्ञ। यह बातचीत रिकॉर्ड हो रही है। इस सड़क पर कल दोपहर से 90 प्रतिशत से ज्यादा मिट्टी संतृप्ति थी। दबाव गिरावट, वर्षा दर और भूस्खलन जोखिम मेरे डेटा में दर्ज है। डॉ. काव्या ने गलत आदेश नहीं तोड़ा, उन्होंने जान बचाई और शोध सामग्री सुरक्षित रखी। यदि आपने इन्हें दोषी ठहराया, तो यह पूरा रिकॉर्ड विश्वविद्यालय समिति और वन विभाग को जाएगा।

कुछ सेकंड सिर्फ बारिश की आवाज आई। फिर आरिस बोला।

—नमूने सही-सलामत पहुँचने चाहिए।

लाइन कट गई।

काव्या ने धीरे से कहा।

—वह चाहता था मैं उसी सड़क पर फंस जाऊँ।

आरव ने रेडियो वापस दिया।

—वह चाहता था गलती तुम्हारे नाम लिखी जाए। अब आवाज उसके नाम रिकॉर्ड है।

उस दोपहर वे ऊपर वाले पुराने रास्ते पर निकले। आरव ने सबसे भारी नमूना केस अपनी पीठ पर बांधा। काव्या ने विरोध किया, पर उसके बाएं कंधे की अकड़न साफ दिख रही थी।

—मैं तुम्हारी आजादी नहीं छीन रहा —आरव बोला— सिर्फ वजन बदल रहा हूँ, ताकि तुम चल सको।

पहला मील 2 घंटे में पूरा हुआ। कीचड़ जूतों को पकड़ता, शाखाएं चेहरे पर पानी फेंकतीं, और नीचे घाटी से टूटती मिट्टी की आवाज आती रहती। एक जगह काव्या ने आरव की बांह पकड़कर रोक लिया। आगे पत्तों के नीचे पतली दरार थी। आरव ने डंडे से छुआ तो जमीन 6 फीट नीचे खिसक गई।

—अच्छी नजर है —आरव ने कहा।

—पौधे जमीन सिखाते हैं। तुम आसमान देखते हो, मैं मिट्टी।

आरव ने नक्शे पर लाल निशान लगाया।

—तभी हम अभी तक जिंदा हैं।

शाम तक बर्फीली बारिश शुरू हो गई। उन्हें एक चट्टान के नीचे रुकना पड़ा। नमूनों के तापमान पैक कमजोर हो रहे थे। काव्या की आंखों में पहली बार टूटन दिखी।

—मेरे पास 40 घंटे हैं। शायद 56, अगर इन्हें जमीन से ऊपर रख सकूँ।

आरव ने अपना फोम मैट निकाला।

—इसे काट लो।

—नहीं। तुम्हें ठंड लगेगी।

—मेरे डेटा सेंसर सांस नहीं लेते। तुम्हारे नमूने लेते हैं।

काव्या ने कुछ नहीं कहा। उसने मैट काटकर केसों के चारों ओर इन्सुलेशन बना दिया। रात में आरव पत्थर पर ठंड से जागता रहा। चौथी बार उठने पर काव्या ने अपनी अतिरिक्त नमूना चादर उसकी तरफ फेंकी।

—ले लो। अब इनके पास तापमान का मार्जिन है।

—यह तुम्हारे काम की है।

—तुम नहीं चलोगे तो मेरा काम भी नहीं चलेगा।

सुबह आसमान साफ था, पर पहाड़ और खतरनाक। वे चट्टानों पर चढ़े। एक बार काव्या फिसली, आरव ने उसका हाथ पकड़ा, संतुलन मिलते ही तुरंत छोड़ दिया। काव्या ने सांस संभालते हुए कहा।

—तुम्हें सीमा निभाने में बहुत मेहनत लगती है।

—यह भी फील्ड स्किल है।

दोपहर में आरव का बैरोमीटर फिर गिरा। दूर बादल हरे-भूरे रंग में मुड़ रहे थे।

—2 घंटे में अगला मोर्चा आएगा —वह बोला।

काव्या ने केस कसकर पकड़े।

—तो बोलना बंद करो और चलो।

वे दौड़ते नहीं, पर तेज चलते रहे। बिजली कड़की। हवा पीछे से दरवाजा बंद करती हुई आई। सूर्य ढलने से ठीक पहले देवदारों के बीच एक लकड़ी की पुरानी वन झोपड़ी दिखी। आरव ने लॉकबॉक्स खोला, दरवाजा धकेला और दोनों अंदर गिरते-गिरते बचे।

सूखी जगह। जलने लायक लकड़ी। एक पुराना रेडियो।

आरव ने तीसरी फ्रीक्वेंसी पर कॉल किया।

—मार्क, सुन रहे हो? हम झोपड़ी तक पहुँच गए। नमूने जीवित हैं।

स्पीकर से राहत भरी आवाज फूटी।

—तुम दोनों जिंदा हो? भगवान का शुक्र है। समिति तुम्हारा इंतजार कर रही है। और सुनो… आरिस ने बेस कैंप में रिपोर्ट जमा कर दी है कि काव्या ने एक पुरुष ठेकेदार के साथ नियम तोड़कर निजी तंबू साझा किया।

काव्या का चेहरा सफेद पड़ गया। तूफान से भी घातक हमला अब शुरू हुआ था।

भाग 3

झोपड़ी के भीतर आग जल रही थी, पर काव्या के हाथ ठंड से नहीं, अपमान से कांप रहे थे। बाहर तूफान फिर दीवारों पर थप्पड़ मार रहा था। अंदर लकड़ी की मेज पर उसके नमूना केस रखे थे, और रेडियो से निकली मार्क की बात हवा में जहरीले धुएँ की तरह फैल चुकी थी। आरिस ने भूस्खलन, आदेश और सुरक्षा की बात नहीं की थी। उसने वही हथियार चुना था, जिससे कई महिला वैज्ञानिकों को चुप कराया जाता है—चरित्र।

काव्या ने धीरे से कुर्सी खींची और बैठ गई। उसकी आँखें नम थीं, पर आँसू नीचे नहीं आए। उसने अपने दस्ताने उतारे, नोटबुक खोली और पन्ने पलटने लगी। आरव ने कुछ बोलने के लिए मुंह खोला, फिर रुक गया। उसे लगा कोई भी सांत्वना अभी छोटी पड़ेगी।

काव्या ने खुद ही कहा।

—मेरी मां ने मुझे 16 की उम्र में कहा था, पहाड़ पर जाना है तो अपने जूते मजबूत रखना, पर अपनी इज्जत का सबूत हर किसी को मत देती फिरना। आज 34 की उम्र में भी मुझे अपने पौधों से पहले अपने चरित्र को बचाना पड़ रहा है।

आरव ने आग में लकड़ी सरकाई।

—सबूत हम देंगे। पर तुम्हारे बचाव में नहीं। उसकी साजिश के खुलासे में।

काव्या ने उसकी तरफ देखा।

—फर्क है।

—बहुत बड़ा।

उसने तंबू की फील्ड लॉग निकाली। हर घंटे का तापमान, नमूना स्थिति, हवा की दिशा, तंबू मरम्मत, बाहर जाने का समय, अंदर रहने की सीमा—सब लिखा था। आरव ने अपनी मौसम डायरी खोली। उसमें दर्ज था: रात 00:18 पर एंकर चेक, 00:22 पर वापसी, काव्या नमूना सेक्शन में, आरव बाएं हिस्से में। हर बात वैज्ञानिक भाषा में थी। बिना रोमांस, बिना अस्पष्टता। सच कभी-कभी सबसे सख्त शैली में लिखा जाता है।

मार्क फिर रेडियो पर आया।

—काव्या, तुम्हारा तापमान लॉग मिला था क्या? जो तुमने पहले दिन मुझे छोटे ट्रांसमिशन में पढ़वाया था, वह मेरे पास दर्ज है।

काव्या लगभग झटके से उठी।

—तुमने रिकॉर्ड किया था?

—मैं बेवकूफ दिखता हूँ, पर पूरी तरह हूँ नहीं। और आरव की पहली धमकी के बाद से मैंने हर आधिकारिक लाइन रिकॉर्ड की। वन विभाग के पास सड़क बंद करने का समय भी है। आरिस ने रिपोर्ट में लिखा है कि तुमने ‘व्यक्तिगत सुविधा’ के लिए रुकना चुना। मैंने उसके नीचे भूस्खलन का समय लगा दिया है।

आरव हल्का मुस्कुराया।

—मार्क, तुम्हारा मजाकिया होना आज उपयोगी निकला।

—मैं हमेशा उपयोगी हूँ। लोग देर से समझते हैं।

काव्या की आंखों में पहली बार आग लौटी।

—समिति को अभी कॉपी करो। और मेरी तरफ से लिखो: मैं बेस कैंप पहुंचते ही सार्वजनिक समीक्षा चाहती हूँ। बंद कमरे में नहीं।

—तुम्हें यकीन है?

—जिसने मुझे सार्वजनिक रूप से बदनाम किया है, उसे सार्वजनिक जवाब मिलेगा।

रात लंबी थी। आरव ने रेडियो हर घंटे चेक किया। काव्या ने नमूनों की नमी पोंछी, केसों को तापमान क्रम में रखा और फिर अपने नोट्स लिखने लगी। बाहर हवा थी, अंदर खामोशी। लेकिन यह डर की खामोशी नहीं थी। यह उस अदालत से पहले की खामोशी थी, जहाँ कोई झूठ अब अकेला नहीं जाएगा।

आरव ने उसे लिखते देखा। उसके बाल बारिश और थकान से बिखरे थे, उंगलियां ठंड से लाल थीं, पर वह हर पंक्ति सावधानी से लिख रही थी। उसने सोचा, यह औरत बचाए जाने के लिए नहीं बनी। यह सच को अपने कंधे पर बांधकर चलने के लिए बनी है। उसे सिर्फ कोई ऐसा चाहिए था जो उसका बोझ छीनने की कोशिश न करे, बल्कि रास्ते में वजन बराबर कर दे।

सुबह 7वें दिन नीली धूप देवदारों पर गिरी। तूफान ने रात भर पहाड़ धोया था। हर पत्ती चमक रही थी, जैसे दुनिया ने खुद को अपराध के बाद साफ करने की कोशिश की हो। दूर से ट्रैक वाहन की आवाज आई। मार्क लाल जैकेट में हाथ हिलाता हुआ उतरा।

—तुम दोनों इंसानों जैसे नहीं लग रहे —उसने पुकारा।

काव्या ने 2 केस उठाए।

—तुम हमेशा थके हुए लोगों का स्वागत बहुत सुंदर करते हो।

—मैंने आरव पर अभ्यास किया है।

आरव ने सबसे भारी केस उठाकर वाहन में रखा। मार्क ने उसे एक मोटी फाइल दी।

—आरिस की रिपोर्ट, हमारी रिकॉर्डिंग, वन विभाग का मलबा समय, तुम्हारा दबाव डेटा, काव्या का तापमान लॉग। समिति बेस कैंप में है।

काव्या ने फाइल देखी।

—वह भी वहाँ है?

मार्क की आवाज गंभीर हो गई।

—हाँ। और शायद उसे लगता है तुम टूटकर आओगी।

काव्या ने अपने गीले दस्ताने उतारे और फाइल अपने सीने से लगा ली।

—तो वह मुझे ठीक से नहीं जानता।

बेस कैंप पर भीड़ थी। विश्वविद्यालय समिति के 2 सदस्य, वन विभाग अधिकारी, मेडिकल टीम, रिसर्च सहायक, ड्राइवर और कुछ छात्र। बीच में डॉ. आरिस मल्होत्रा साफ जैकेट में खड़ा था, जैसे उसने कभी कीचड़ देखा ही न हो। उसके चेहरे पर वही मुस्कान थी जो बड़े लोग छोटे लोगों को खत्म करने से पहले पहनते हैं।

काव्या वाहन से उतरी। उसने कोई जल्दी नहीं की। उसने प्रमुख नमूना केस खुद उठाया। आरव उसके पीछे डेटा टैबलेट और फील्ड लॉग लेकर चला। मार्क फाइल पकड़े था। हवा में डीजल, गीली मिट्टी और चाय की गंध थी।

आरिस आगे बढ़ा।

—डॉ. सेन, आप बहुत कठिन स्थिति में थीं। हमें निजी तौर पर बात करनी चाहिए।

काव्या ने केस को उससे दूर किया।

—मेरे शोध को हाथ मत लगाइए।

पूरा कैंप चुप हो गया।

आरिस की मुस्कान पतली हुई।

—आप भावुक हो रही हैं।

—नहीं। मैं रिकॉर्ड पर बोल रही हूँ। आपने मेरी फंडिंग रोकी। आपने मुझे असुरक्षित सड़क पर उतरने का आदेश दिया। आपने भूस्खलन के बाद भी मुझे दोषी लिखा। और फिर आपने मेरी सुरक्षा व्यवस्था को चरित्रहीनता बनाकर रिपोर्ट किया।

समिति की महिला सदस्य ने तुरंत मार्क से फाइल ली।

आरिस बोला।

—तंबू साझा करना फील्ड प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।

काव्या ने अपना लॉग खोला।

—एक ही सुरक्षित आश्रय था। मौसमीय खतरा दर्ज था। अंदर अलग हिस्से बनाए गए। हर गतिविधि, तापमान जांच और एंकर निरीक्षण समय सहित दर्ज है। यह ‘निजी सुविधा’ नहीं, आपदा प्रबंधन था।

आरव ने अपना टैबलेट ऑन किया। स्क्रीन पर दबाव गिरावट, वर्षा दर, मिट्टी संतृप्ति और भूस्खलन जोखिम का ग्राफ दिखा।

—सड़क आदेश के समय ही असुरक्षित थी —उसने कहा— अगर ये नीचे उतरतीं, तो 6:12 के भूस्खलन में फंस सकती थीं। इनके रुकने से जान बची, नमूने बचे और डेटा बचा। यह मेरा स्वतंत्र मौसम रिकॉर्ड है।

वन विभाग अधिकारी ने सिर हिलाया।

—हमने उस मार्ग को भूस्खलन के बाद बंद किया। सच कहूँ तो वह उससे पहले ही खतरनाक था। किसी को वहाँ भेजना गलत था।

आरिस ने आवाज ऊँची की।

—आप लोग समझ नहीं रहे हैं। फील्ड रिसर्च में अनुशासन जरूरी है। अगर हर शोधकर्ता तूफान का बहाना बनाकर—

काव्या ने बीच में काटा।

—तूफान बहाना नहीं था। आपका आदेश बहाना था।

यह वाक्य जैसे हवा में हथौड़े की तरह गिरा। आसपास खड़े छात्रों के चेहरों पर तनाव और आश्चर्य था। कुछ लोग पहली बार आरिस को इस तरह चुनौती खाते देख रहे थे।

समिति सदस्य ने रिपोर्ट का पन्ना उठाया।

—डॉ. मल्होत्रा, आपने अपनी रिपोर्ट में भूस्खलन का उल्लेख क्यों नहीं किया?

आरिस चुप।

—आपने यह क्यों लिखा कि डॉ. सेन ने ‘व्यक्तिगत कारणों’ से आश्रय साझा किया, जबकि मौसम लॉग में इसे आपदा स्थिति बताया गया है?

आरिस की गर्दन लाल हो गई।

—मुझे पूरी जानकारी नहीं मिली थी।

मार्क आगे आया।

—गलत। मैंने 3 बार जानकारी भेजी। यहाँ रेडियो ट्रांसक्रिप्ट है। आपने जवाब दिया था: ‘नमूने सही-सलामत पहुँचने चाहिए।’ यानी आपको स्थिति पता थी।

अब चुप्पी आरिस पर भारी थी। काव्या ने अपना केस मेज पर रखा और लॉक खोला। अंदर छोटे पारदर्शी कंटेनरों में वे दुर्लभ पौधे सुरक्षित थे। उनकी हरी पत्तियां ठंड से थोड़ी झुकी हुई थीं, मगर जिंदा थीं।

काव्या की आवाज इस बार धीमी थी, पर हर शब्द साफ था।

—ये नमूने 10 साल की मेहनत हैं। इन्हें बचाने के लिए हमने 7 दिन तूफान, ठंड, भूस्खलन और झूठ का सामना किया। मैं फील्ड खाता तुरंत चालू करने, अनुशासन नोट हटाने, और डॉ. आरिस मल्होत्रा के आदेशों की नैतिक जांच चाहती हूँ। आज।

समिति सदस्य ने दूसरे सदस्य की तरफ देखा। फिर बोली।

—फील्ड खाता तत्काल अस्थायी रूप से बहाल किया जाता है। अनुशासन नोट जांच तक निलंबित रहेगा। डॉ. मल्होत्रा को इस परियोजना से प्रत्यक्ष अधिकार से हटाया जाता है।

काव्या ने आंखें बंद कीं। यह विजय नहीं थी, पूरी मुक्ति नहीं थी। पर यह वह दरवाजा था जिसे वह वर्षों से धक्का दे रही थी।

आरिस ने जाने से पहले आरव की तरफ देखा।

—आपको लगता है आप हीरो हैं?

आरव ने शांत होकर जवाब दिया।

—नहीं। मैं गवाह हूँ। और आज गवाह समय पर पहुँच गया।

आरिस चला गया। उसके पीछे कीचड़ में उसके साफ जूतों के निशान बनते गए, जैसे पहाड़ ने आखिर उसे भी छुआ हो।

दोपहर तक काव्या के नमूने मेडिकल कोल्ड यूनिट में रख दिए गए। आरव के सेंसर डेटा की कॉपी राष्ट्रीय मौसम अनुदान टीम को भेजी गई। मार्क ने बेस कैंप की रसोई में कुछ बनाया, जिसे वह स्टू कह रहा था और बाकी लोग संदेह से देख रहे थे।

काव्या शाम को आरव को ट्रांसपोर्ट वैन के पास मिली। उसके हाथ में एक नई फाइल थी।

—इसे पढ़ो।

आरव ने फाइल खोली। उसमें विश्वविद्यालय की अस्थायी नियुक्ति थी: हिमालयी वनस्पति अध्ययन के लिए मौसमीय सुरक्षा सलाहकार। भुगतान साफ, भूमिका साफ, अधिकार साफ।

काव्या ने कहा।

—कोई एहसान नहीं। कोई धुंधली रेखा नहीं। तुम्हारा काम दर्ज, अलग और सम्मानित रहेगा।

आरव ने कागज बंद किया।

—और उसके बाद?

काव्या ने पहाड़ों की तरफ देखा। बादल अब दूर जा रहे थे।

—उसके बाद रात का खाना। बेस कैंप में। मार्क का स्टू। तुम मना कर सकते हो, और यह नियुक्ति फिर भी रहेगी।

आरव ने उसकी आंखों में देखा।

—पछतावा न करने वाली शर्त अभी भी लागू है?

काव्या मुस्कुराई।

—सिर्फ एक नई शर्त है। स्टू चखने से पहले उसका अपमान नहीं करना।

—यह कठिन है।

—मुझे पता है।

तभी मार्क ने दूर से चिल्लाया।

—अगर तुम दोनों ने अनुबंध को प्रेम कहानी बना लिया हो तो खाना ठंडा हो रहा है!

काव्या हंस पड़ी। वह हँसी पहाड़ की ठंडी हवा में गर्म चाय जैसी फैल गई। आरव ने उसके पास रखा भारी डफेल उठाया।

काव्या ने भौंह उठाई।

—फिर से वजन बदल रहे हो?

—ताकि तुम चल सको।

इस बार उसने विरोध नहीं किया। वह उसके साथ कदम मिलाकर कमांड टेंट की ओर चली। अंदर 3 स्टील के कटोरे रखे थे। स्टू बहुत गाढ़ा था, बहुत नमकीन था, और 7 दिन की ठंड के बाद अजीब तरह से सही लग रहा था।

काव्या ने एक कौर लिया, फिर आरव को देखा।

आरव ने सावधानी से चखा।

—इसमें संरचनात्मक मजबूती है।

मार्क ने चम्मच उसकी तरफ ताना।

—यह मेरी रसोई की अब तक की सबसे बड़ी तारीफ है।

काव्या फिर हंसी। इस बार आरव ने नजर नहीं हटाई।

रात में वे कमांड टेंट के बाहर खड़े थे। पहाड़ अंधेरा हो चुका था। ऊपर पहले तारे दिखाई दे रहे थे। वही रिज, जहाँ तूफान ने लगभग सब कुछ छीन लिया था, अब शांत था। काव्या ने फाइल सीने से लगा रखी थी।

—कल मैं दिल्ली लौटूंगी।

—और मैं रास्ता खुलते ही अपने सेंसर लेने जाऊंगा।

—फिर तुम अगले तूफान में गायब हो जाओगे?

सवाल हल्का था, पर जवाब भारी। आरव ने देवदारों की तरफ देखा, फिर उसकी ओर।

—अगर हिमालयी अध्ययन को मौसमीय सुरक्षा सलाहकार चाहिए, तो नहीं।

—चाहिए।

—तो मैं समय-सारणी भेज दूंगा।

—समय-सारणी?

—तूफान योजना मांगते हैं।

—और खाना?

आरव ने हल्की मुस्कान के साथ कहा।

—वह भी।

काव्या ने सिर झुका कर कहा।

—अंतिम समीक्षा के बाद शहर में खाना। कोई आपातकालीन राशन नहीं। कोई स्टू नहीं। कोई फंडिंग फाइल मेज पर नहीं।

—यह बहुत सख्त प्रोटोकॉल है।

—तुम प्रोटोकॉल का सम्मान करते हो।

—करता हूँ।

—तो निभाना।

आरव ने उस महिला को देखा जिसने तूफान से बचने के लिए किसी का सहारा नहीं मांगा था, सिर्फ सच को सुरक्षित ले जाने में बराबरी मांगी थी। उसने धीरे से कहा।

—निभाऊंगा।

काव्या भीतर चली गई, जहाँ मार्क प्रिंटर से लड़ रहा था और कागज फंस गया था। आरव बाहर कुछ देर खड़ा रहा। हवा में गीली मिट्टी, देवदार, लकड़ी के धुएँ और बची हुई जान की गंध थी।

पहाड़ ने उस सप्ताह उन्हें सिर्फ जिंदा नहीं छोड़ा था। उसने सिखाया था कि असली सुरक्षा किसी को छोटा करके नहीं आती। असली सुरक्षा वह होती है, जिसमें कोई आपकी सीमा भी बचाए, आपका काम भी, और आपकी आवाज भी।

अंदर से काव्या की आवाज आई।

—आरव, यह प्रिंटर फिर अटक गया है।

आरव ने पहली बार तूफान के बाद बिना थके जवाब दिया।

—आ रहा हूँ।

और उस रात, पहाड़ की खामोशी खाली नहीं लगी। वह किसी के पुकारने से पहले की शांत जगह जैसी लगी, जहाँ उत्तर देने वाला आखिर मौजूद था।

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