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सवाना के एक अभिरक्षा मुक़दमे की अदालत में, गुलाबी पोशाक पहनी एक छोटी बच्ची ने एक वकील का फ़ोन चुरा लिया, न्यायाधीश की कुर्सी के सामने जाकर खड़ी हो गई और शांतिपूर्वक कहा, “मैं जिसे चाहूँ, उसे फ़ोन करूँगी।” न्यायाधीश हेनरी मिलर इतना ज़ोर से हँसे कि पूरा अदालत कक्ष उलझन में पड़कर स्तब्ध रह गया— फिर कॉल जुड़ गई। स्पीकर से एक महिला की काँपती हुई आवाज़ सुनाई दी, “मिया? बेटी… क्या तुम हो?” न्यायाधीश तुरंत हँसना बंद कर दिया। क्योंकि वह आवाज़ उनकी बेटी इसाबेला की थी— वही बेटी, जिसने पिछले दो वर्षों से उनसे बात तक नहीं की थी।

उसने कुछ पल सोचा।

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फिर उसने फ़ोन उनकी ओर बढ़ा दिया।

“माँ आपसे बात करना चाहती हैं।”

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कोई भी नहीं हिला।

फिर जज हेनरी मिलर ने वह किया, जो उस अदालत में पहले कभी किसी ने नहीं देखा था।

वे न्यायासन से नीचे उतर आए।

लकड़ी की तीन सीढ़ियाँ।

सालों से बनी दूरी।

वे पूरे अदालत कक्ष को पार करके उस छोटी बच्ची के सामने घुटनों के बल बैठ गए, ताकि उनकी आँखें एक ही स्तर पर आ जाएँ।

फ़ोन लेते समय उनका हाथ काँप रहा था।

“इसाबेला,” उन्होंने कहा।

दूसरी ओर उनकी बेटी ने एक गहरी, अस्थिर साँस ली।

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“पापा।”

बस एक शब्द।

लेकिन उस एक शब्द में दो साल की ख़ामोशी और पूरी ज़िंदगी का वह दर्द समाया था, जिसमें उसके पिता के लिए हमेशा उनका करियर पहले था।

उन्होंने मुश्किल से निगला।

“मिया यहाँ क्यों है?”

कुछ क्षणों की चुप्पी रही।

फिर इसाबेला ने कहा,

“क्योंकि रॉबर्ट मुझे इलाज के दौरान मिया को मुझसे छीनना चाहता है।”

उनकी नज़र क्लॉड फ़ॉस्टर की ओर उठी।

इलाज?

उनका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा।

“कौन-सा इलाज?”

फ़ोन पर फिर एक लंबी चुप्पी छा गई।

इस बार वह भारी थी।

संभलकर चुनी गई।

फिर इसाबेला ने जवाब दिया,

“दूसरे चरण का स्तन कैंसर।”

“मुझे चार महीने से कीमोथेरेपी चल रही है।”

फ़ोन लगभग उनके हाथ से छूट गया।

उस क्षण उनके आसपास की अदालत जैसे गायब हो गई।

न न्यायासन।

न न्याय का प्रतीक चिह्न।

न वकील।

सिर्फ़ उनकी बेटी की आवाज़…

और उनकी पोती का छोटा-सा हाथ, जो उनकी काली न्यायिक पोशाक की बाँह पर हल्के से टिका हुआ था।

“तुम मुझे यह बताने वाली कब थीं?” उन्होंने फुसफुसाते हुए पूछा।

“जब आपको समझ आ जाता कि सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण क्या है।”

वही शब्द।

वही घाव।

लेकिन इस बार…

उन्होंने सचमुच उसे महसूस किया।

मिया थोड़ा और पास आ गई।

“दादाजी,” उसने धीरे से पूछा, “क्या आप मम्मी से कह सकते हैं कि वे घर आ जाएँ?”

जज मिलर ने अपनी आँखें बंद कर लीं।

जब उन्होंने उन्हें फिर खोला…

तो फ़र्श पर घुटनों के बल बैठा वह आदमी अब अपने न्यायिक चोगे के पीछे नहीं छिपा हुआ था।

उन्होंने बेंजामिन की ओर देखा।

“अदालत खाली करवा दीजिए।”

“इस सुनवाई को नए न्यायाधीश के पास भेजे जाने तक स्थगित किया जाता है।”

क्लॉड फ़ॉस्टर तुरंत खड़े हो गए।

“माननीय न्यायाधीश—”

“बैठ जाइए, श्री फ़ॉस्टर।”

क्लॉड तुरंत बैठ गए।

जज ने फ़ोन मिया को वापस दिया…

बस उतनी देर के लिए कि जब वह उनकी ओर बढ़ी, तो वे दोनों बाँहों से उसे अपने सीने से लगा सकें।

उसके बालों से स्ट्रॉबेरी शैम्पू की खुशबू आ रही थी।

उसमें रंगीन क्रेयॉन की हल्की-सी महक भी थी।

और कई दशकों में पहली बार…

हेनरी मिलर खुलेआम रो पड़े।

कहानी का अगला भाग नीचे पिन की गई टिप्पणी में जारी है, क्योंकि इस कहानी को थोड़ा और स्थान चाहिए।

Disclaimer : This content may be created by AI for entertainment purposes. Any resemblance to real persons, events, or places is coincidental.