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जब मैं काम से घर लौटा, तो मेरी छह साल की बेटी लाया मेरी बाँहों में सिकुड़ी हुई थी। उसकी साँस इतनी तेज़ी से फूल रही थी कि उसके छोटे से लोमड़ी वाले पायजामे का कपड़ा हर उथली साँस के साथ ऊपर-नीचे हो रहा था। मेरे माता-पिता को वह दवा लानी थी, जिसे डॉक्टर ने समय पर न मिलने पर “तत्काल जान का ख़तरा” बताया था। लेकिन वे दवा लाने के बजाय रिश्तेदारों के साथ एक स्टेकहाउस में खाना खाने चले गए और मुझसे बोले, “उसे कुछ नहीं होगा, अपने-आप ठीक हो जाएगी।” मैंने रसोई के काउंटर पर पड़ी खाली दवा की थैली को देखा, और उसी पल मुझे समझ आ गया कि वे किस तरह के दादा-दादी हैं।

भाग 2:

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मार्लीन ने एक हाथ ऐसे लहराया जैसे मेज़ से रोटी के टुकड़े झाड़ रही हो।

“भगवान के लिए, स्कॉट। इसे देखो। यह बिल्कुल ठीक है।”

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“यह ठीक है क्योंकि मैं इसे समय रहते अर्जेंट केयर सेंटर ले गया।”

डग एक कदम आगे बढ़ा।

“हमसे बस एक छोटी-सी गलती हो गई।”

छोटी।

यह शब्द पूरे कमरे में गूँजता रह गया।

स्कॉट ने अपने पिता से अपनी माँ की ओर देखा।

“क्या आपने वह नोट पढ़ा था?”

दोनों में से किसी ने कोई जवाब नहीं दिया।

“डॉक्टर वाला नोट,” स्कॉट ने कहा। “जिसे मैंने आज सुबह आपके साथ बैठकर समझाया था। जिसमें लिखा था कि यह तत्काल ख़तरे की स्थिति है।”

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मार्लीन ने नज़रें फेर लीं।

डग का जबड़ा एक बार भींचा, फिर ढीला पड़ गया।

“आपने उसे पढ़ा था,” स्कॉट ने कहा। “आप जानते थे।”

“हम उसे कल ले जाते,” डग बुदबुदाया। “ऐसा तो नहीं था कि वह बारह घंटे के भीतर मर जाती।”

स्कॉट की आवाज़ और भी धीमी हो गई।

“डॉक्टर ने कहा था कि अगर एक-दो घंटे और हो जाते, तो उसे अस्पताल में भर्ती करना पड़ता। उसकी साँसें एक-दो घंटे और हवा के लिए लड़ती रहतीं।”

मार्लीन का चेहरा एक पल के लिए पीला पड़ गया।

लेकिन सिर्फ़ एक पल के लिए।

“तुम आज भी अपने बचपन का बदला हमसे ले रहे हो।”

स्कॉट लगभग हँस पड़ा।

“आदर्श माता-पिता?” उसने कहा। “मैं तो सिर्फ़ इतना चाहता था कि आप कम से कम ठीक-ठाक माता-पिता होते।”

डग का चेहरा सख़्त हो गया।

“हम तुम्हारा परिवार हैं।”

“नहीं,” स्कॉट ने कहा। “तुम वे लोग थे जिनके साथ मैं तब तक जीता रहा, जब तक वहाँ से निकल नहीं गया।”

यही वह वाक्य था जिसने आखिरकार दोनों को चुप करा दिया।

पहली बार उनके पास कोई तैयार बहाना नहीं था।

स्कॉट अतिथि कक्ष में गया और अलमारी से उनका सामान निकालना शुरू कर दिया।

जूते।

जैकेट।

साफ़-सफ़ाई का सामान।

उसकी माँ की पत्रिकाएँ।

उसके पिता का पढ़ने वाला चश्मा।

“तुम क्या कर रहे हो?” मार्लीन ने पूछा।

“ताकि तुम्हारे लिए यहाँ से जाना आसान हो जाए।”

वे पूरे घर में उसके पीछे-पीछे चलते रहे।

कभी विरोध करते हुए।

कभी रोते हुए।

कभी धमकियाँ देते हुए।

लेकिन स्कॉट बिना रुके अपना काम करता रहा।

मुख्य दरवाज़े पर पहुँचकर उसने उनके बैग नीचे रख दिए और दरवाज़ा खोल दिया।

मार्लीन ने धीमे स्वर में कहा,

“कृपया ऐसा मत करो।”

स्कॉट ने उसकी ओर देखा।

“यह सब तुमने किया है। मैंने नहीं।”

Disclaimer : This content may be created by AI for entertainment purposes. Any resemblance to real persons, events, or places is coincidental.