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जब मेरे 11 साल के पोते ने फुसफुसाकर बताया कि उसकी किशोर बहन अपने सौतेले पिता के कमरे से चीख रही है, तो मुझे तुरंत समझ आ गया कि कुछ बहुत गलत है। लेकिन जब मैंने वह दरवाज़ा खोला और देखा कि वहाँ मौजूद हर व्यक्ति इतना डरा हुआ क्यों था, तब छा गई खामोशी के लिए मैं बिल्कुल तैयार नहीं थी।

भाग 2

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लिसा ने पहले कुछ नहीं कहा। वह बिस्तर पर रखी नकदी को घूरती रही, फिर दवाइयों के लेबल को देखा, फिर मिया के हाथ में पकड़े फोन को।

“यह क्या है?” उसने पूछा।

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डैरेन ने धीरे-धीरे साँस छोड़ी, मानो वह एक ऐसे कमरे में अकेला समझदार इंसान हो जहाँ बाकी सब बेवजह का हंगामा कर रहे हों।

“यह वैसा नहीं है जैसा दिख रहा है।”

मैंने कहा, “जब किसी दोषी आदमी के सारे झूठ खत्म हो जाते हैं, तो वह हमेशा यही कहता है।”

वह मेरी ओर मुड़ा।

“एवलिन, तुम्हें मेरे घर से निकल जाना चाहिए।”

मैं एक बार हँसी, लेकिन उस हँसी में ज़रा भी मज़ाक नहीं था।

“तुम्हारा घर? मेरी बेटी इसकी मॉर्गेज भरती है। मेरी बेटी टैक्स देती है। मेरी बेटी उस खाने का खर्च उठाती है जिसे तुम पति होने का नाटक करते हुए खाते हो।”

लिसा लड़खड़ा गई, लेकिन उसने मेरी बात नहीं काटी।

मिया ने डैरेन का फोन उठाया।

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“माँ, मुझे सारे मैसेज मिल गए। इसने मरीज़ों के नाम, जन्मतिथि और बीमा की जानकारी भेजी है। पहले मुझे समझ नहीं आया था, लेकिन फिर मैंने इसे इसके लैपटॉप पर लॉग इन देखा।”

लिसा ने कुछ कहना चाहा, लेकिन शब्द ही नहीं निकले।

डैरेन एक कदम आगे बढ़ा।

गलियारे से कैलेब ज़ोर से चिल्लाया—

“नहीं!”

उस एक शब्द ने पूरे कमरे का माहौल बदल दिया।

आख़िरकार लिसा हरकत में आई। वह कैलेब के सामने गई और उसे अपने पीछे कर लिया। उसका चेहरा, जो अब तक सदमे और उलझन से भरा था, अचानक सख्त हो गया। कई सालों बाद मैंने उसमें वही दृढ़ता देखी।

“डैरेन,” उसने कहा, “बैठ जाओ।”

वह पलकें झपकाने लगा।

“क्या?”

“उस कुर्सी पर बैठ जाओ। और अपनी जगह से मत हिलना।”

उसके आदेश ने डैरेन को चौंका दिया, क्योंकि उसने वर्षों तक लिसा को इतनी आदत डाल दी थी कि वह ज़ोर से साँस लेने से पहले भी उससे इजाज़त माँगती थी।

लेकिन आज…

वह इजाज़त नहीं माँग रही थी।

डैरेन का जबड़ा कस गया।

“तुम बहुत बड़ी गलती कर रही हो।”

“नहीं,” लिसा ने कहा।

“गलती मैंने तीन साल पहले की थी।”

मिया फूट-फूटकर रोने लगी।

मैंने धीरे से उसका फोन लिया और अपनी कार की चाबियाँ उसके हाथ में रख दीं।

“तुम और कैलेब मेरी कार में जाकर बैठो। दरवाज़े लॉक कर लेना। मेरे या अपनी माँ के अलावा किसी के लिए मत खोलना।”

मिया झिझकी।

लिसा ने कहा—

“जाओ।”

बच्चे बाहर निकल गए। सीढ़ियों से भागते हुए उनके कदमों की आवाज़ गूँज उठी।

बच्चों के जाते ही डैरेन का चेहरा बदल गया।

अब उसने एक और मुखौटा पहन लिया।

दुख।

टूटा हुआ दिल।

धोखा खाए पति का अभिनय।

“लिसा,” उसने बहुत नरम आवाज़ में कहा, “तुम्हारी बेटी ने गलत समझा है। मैं बस हमारे लिए कोशिश कर रहा था। तुम जानती हो बिल, खर्चे, दबाव…”

“तुमने मेरे क्लिनिक की लॉगिन जानकारी इस्तेमाल की।”

“मैंने बस उधार ली थी।”

“तुमने मरीज़ों की निजी मेडिकल जानकारी बेची।”

उसके चेहरे की मांसपेशियाँ फड़क उठीं।

“तुम यह साबित नहीं कर सकती।”

मैंने फोन उठा लिया।

वह मेरी तरफ झपटा।

लेकिन मैं तैयार थी।

हो सकता है मैं इकहत्तर साल की हूँ।

हो सकता है हर सुबह मेरे घुटने दर्द करते हों।

लेकिन मैंने चालीस साल अदालत में स्टेनोग्राफर के रूप में गुस्से में भरे आदमियों को देखा है।

मुझे पता होता है कि कोई आदमी हाथ उठाने से पहले उसके कंधे कैसे बदलते हैं।

मैं एक कदम पीछे हट गई।

उसी समय लिसा ने बेडसाइड टेबल से भारी सिरेमिक लैम्प उठा लिया।

उसने कहा—

“मेरी माँ को हाथ मत लगाना।”

डैरेन वहीं रुक गया।

कुछ सेकंड तक किसी ने साँस तक नहीं ली।

फिर दूर कहीं से पुलिस सायरन की आवाज़ सुनाई दी।

शायद कैलेब ने मेरी कार से 911 पर कॉल कर दिया था।

ठीक वैसे ही, जैसा मैंने उसे सिखाया था।

बहुत समझदार बच्चा।

बहुत बहादुर बच्चा।

डैरेन ने भी सायरन सुन लिया।

उसका चेहरा आख़िरी बार बदल गया।

न आकर्षण।

न पछतावा।

सिर्फ़ हिसाब-किताब।

उसने खिड़की की ओर देखा।

लिसा ने उसकी नज़र पहचान ली।

“मत करना।”

लेकिन डैरेन दौड़ पड़ा।

Disclaimer : This content may be created by AI for entertainment purposes. Any resemblance to real persons, events, or places is coincidental.